बिजनेस स्टैंडर्ड - खस्ताहाल निजी बैंकों की नीलामी की योजना
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Thursday, January 23, 2020 03:58 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम मुद्रा खबर

खस्ताहाल निजी बैंकों की नीलामी की योजना

सोमेश झा / नई दिल्ली 01 07, 2020

नीलाम होंगे बीमार निजी बैंक!

अभी निजी और सरकारी बैंकों के लिए पीसीए के समान नियम
एनपीए, पूंजी पर्याप्तता की सीमा का उल्लंघन पर बैंकों को पीसीए में रखा जाता है
अभी छह बैंक पीसीए में, इनमें से दो निजी क्षेत्र के

बिजनेस स्टैंडर्ड खस्ताहाल निजी बैंकों की नीलामी की योजनाभारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) लंबे समय से खराब वित्तीय स्थिति से जूझ रहे निजी क्षेत्र के बैंकों की नीलामी की योजना बना रहा है। केंद्रीय बैंक त्वरित सुधारात्मक कार्रवाई (पीसीए) के तहत सरकारी और निजी बैंकों के लिए अलग-अलग नियामकीय व्यवस्था अपनाना चाहता है। निजी बैंकों की नीलामी इसी योजना का हिस्सा है। आरबीआई के एक अधिकारी ने कहा कि बैंक नियामक पीसीए में शामिल निजी बैंकों के लिए को जल्दी से जल्दी इससे बाहर निकालने की व्यवस्था बनाने पर विचार कर रहा है। इसी के तहत बैंकों की नीलामी की संभावना तलाशी जा रहा है।

सूत्र ने कहा, 'निजी बैंक हमेशा के लिए पीसीए ढांचे में नहीं रह सकते हैं। अगर प्रवर्तक लंबे समय तक बैंक को पटरी पर लाने में नाकाम रहते हैं तो आरबीआई ऐसे बैंकों की परिसंपत्तियों, देनदारियों और परिचालन को नीलाम कर सकता है। इसके लिए एक योजना तैयार की जा रही है।' अब तक आरबीआई ने विलय के जरिये निजी बैंकों की खराब वित्तीय स्थिति को दुरुस्त करने के लिए हस्तक्षेप किया है। आरबीआई ने अंतिम बार सितंबर, 2006 में ऐसा हस्तक्षेप किया था। यूनाइटेड वेस्टर्न बैंक (यूडब्ल्यूबी) के बदतर पूंजी आधार के कारण केंद्रीय बैंक ने उस पर रोक लगा दी थी।

इसके बाद 17 संस्थाओं ने इसमें दिलचस्पी दिखाई थी और आरबीआई ने यूडब्ल्यूबी के कामकाज पर एक महीने की पाबंदी लगाने के बाद उसका आईडीबीआई में विलय करने का फैसला किया था। 2004 से पहले आरबीआई निजी क्षेत्र के ग्लोबल ट्रस्ट बैंक पर तीन महीने की रोक लगाने के बाद उसका सार्वजनिक क्षेत्र के ऑरियंटल बैंक ऑफ कॉमर्स में विलय कर दिया था। अलबत्ता, उसने अब तक किसी कमजोर बैंक की नीलामी नहीं की है। 

सलाहकार फर्म अश्विन पारेख एडवाइजरी सर्विसेज के मैनेजिंग पार्टनर अश्विन पारेख ने कहा, 'आरबीआई को मौजूदा कानून के तहत ऐसा करने का अधिकार है। पहले आरबीआई विलय के जरिये निजी बैंकों की नाजुक वित्तीय स्थिति का समाधान करता था। लेकिन इसमें बैंकों की नीलामी की योजना शामिल नहीं थी। यह आरबीआई का एक प्रगतिशील दृष्टिïकोण लगता है क्योंकि नीलामी के जरिये नाकाम बैंक के शेयरधारकों को अपने निवेश का बेहतर मूल्य मिलेगा। यह व्यवस्था के लिए अच्छा है।' 

अमेरिका में स्वतंत्र एजेंसी द फेडरल डिपॉजिट इंश्योरेंस कॉरपोरेशन को बैंकों के समाधान का अधिकार है और वह नाजुक स्थिति से गुजर रहे वित्तीय संस्थानों की मजबूत बैंकों को नीलामी करता है। भारत में आरबीआई वाणिज्यिक बैंकों (सरकारी और निजी ) की वित्तीय स्थिति को सुदृढ़ रखने के लिए पीसीए को शुरुआती चेतावनी के हथियार की तरह इस्तेमाल करता है। अगर कोई बैंक पूंजी, परिसंपत्ति गुणवत्ता और गैर निष्पादित परिसंपत्तियों (एनपीए) की सीमाओं का उल्लंघन करता है तो उसे पीसीए में डाला जाता है। यह व्यवस्था 2002 से चलन में है और 2017 में आरबीआई ने इसे ज्यादा सख्त बनाया था।

इसके तहत कमजोर बैंकों के विस्तार, लाभांश वितरण और प्रबंधन को मिलने वाले मुआवजे पर पाबंदी लगा दी गई। केंद्रीय बैंक 2020 में पीसीए व्यवस्था की समीक्षा करेगा। अभी छह बैंक पीसीए में शामिल हैं जिनमें निजी क्षेत्र के दो बैंक आईडीबीआई बैंक और लक्ष्मी विलास बैंक शामिल हैं। आईडीबीआई बैंक को मई 2017 में और लक्ष्मी विलास बैंक को सितंबर 2019 में इसमें शामिल किया गया था। एक साल पहले 12 बैंक इसमें शामिल थे जिनमें 11 सरकारी और एक निजी बैंक था। अभी बैंकों को पीसीए से बाहर निकालने के लिए कोई तय व्यवस्था नहीं है। लेकिन एक साल से आरबीआई उन बैंकों पर से पीसीए पाबंदियां हटा रहा है जो पीसीए की सीमाओं के दायरे में आ गए हैं।

Keyword: RBI, fund, govt, Fiscal year, dividend, Reserve Bank of India, private bank, PCA, IDBI bank, Laxmi Vilas bank,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या वित्त आयोग की सिफारिशों से राज्यों पर बढ़ेगा दबाव?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.