बिजनेस स्टैंडर्ड - कृषि व सड़क का घटेगा बजट
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कृषि व सड़क का घटेगा बजट

अरूप रायचौधरी और संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली January 07, 2020

वित्त वर्ष 2019-20 का राजकोषीय घाटा स्वीकार्य स्तर के भीतर बनाए रखने के लिए केंद्र सरकार बचत आगे टालकर और सीधे कटौती कर व्यय में भारी कटौती कर सकती है। वित्त मंत्रालय इसमें 2.2 लाख करोड़ रुपये की कमी करने पर विचार कर रहा है। वहीं सकल कर राजस्व में 2 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आ सकी है और अब विनिवेश लक्ष्य हासिल कर पाने को लेकर भी संदेह किया जा रहा है। 

ज्यादातर उन विभागों व मंत्रालयों के बजट में कटौती की उम्मीद है, जिन्होंने पैसे खर्च नहीं किए हैं। इनमें कृषि, नागरिक उड्डयन, सड़क, जहाजरानी, इलेक्ट्रॉनिक्स, सूचना तकनीक, पर्यटन और सामाजिक क्षेत्र के अलावा अन्य मंत्रालय शामिल हैं। इंडिया रेटिंग के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र पंत ने कहा कि व्यय में कटौती की पहली कुल्हाड़ी पूंजीगत व्यय पर चल सकती है और उसके बाद सामाजिक क्षेत्र का स्थान आता है। उन्होंने कहा, 'चाहे व्यय में कटौती की जाए या उसे आगे बढ़ाया जाए, इसका असर आर्थिक वृद्धि पर पड़ेगा।' 

अधिकारियों का कहना है कि भले ही 2 लाख करोड़ रुपये की कटौती की जाए, ऐसा लगता है कि राजकोषीय घाटे का लक्ष्य मुश्किल होगा। पहली बात यह है कि सालाना आधार पर नॉमिनल जीडीपी में वृद्धि बजट में अनुमानित 12 प्रतिशत से बहुत कम रहेगी। दूसरे, जैसा कि बिजनेस स्टैंडर्ड ने पहले खबर दी थी, वित्तीय दायित्व एवं बजट प्रबंधन अधिनियम में केंद्र को कड़े मानकों के बीच राजकोषीय घाटा 3.8 प्रतिशत तक ले जाने की छूट मिली हुई है, केंद्र सरकार की कवायद होगी कि राजकोषीय घाटा 2019-20 में 3.5 प्रतिशत के करीब रहे। 

सभी विभागों में व्यय को तार्किक बनाने के लिए आर्थिक मामलों के विभाग ने पिछले महीने नोटिस जारी कर कहा था कि विभाग साल भर के लिए आवंटित अपनी राशि का 25 प्रतिशत ही जनवरी मार्च तिमाही में खर्च करें। यह मानकों में कमी है, जबकि विभागों को आवंटित राशि का 33 प्रतिशत खर्च करने की अनुमति होती है।  

जनवरी और फरवरी मिलाकर विभागों को निर्देश दिया गया कि बजट अनुमान का 15 प्रतिशत खर्च करें, जो पहले 18 प्रतिशत था, वहीं मार्च में 10 प्रतिशत खर्च करने की अनुमति दी गई, जबकि पहले 15 प्रतिशत खर्च करने की अनुमति दी गई थी। 

अगर बजट के आकार को देखें तो 27.86 लाख करोड़ रुपये का 33 प्रतिशत 9.19 लाख करोड़ रुपये होता है, जबकि 25 प्रतिशत करीब 6.96 लाख करोड़ रुपये होता है। यह अंतर 2.23 लाख करोड़ रुपये है और इस तरह से खर्च में इतनी राशि कम खर्च करने को कहा गया है।

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