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एयर इंडिया के टेंडर को सरकार की मंजूरी

अरिंदम मजूमदार और अनीश फडणीस / नई दिल्ली January 07, 2020

सार्वजनिक क्षेत्र की एयर इंडिया में 100 प्रतिशत सरकारी हिस्सेदारी बेचने को मंत्रियों के एक समूह ने मंजूरी दे दी है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अध्यक्षता में बने समूह ने एयर इंडिया के विनिवेश की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में इसके लिए रुचि पत्र (ईओआई) और शेयर खरीद समझौते के लिए तैयार प्रारूप को मंजूरी दे दी। बिक्री की प्रक्रिया से जुड़े एक अधिकारी ने बताया कि अखबारों में विज्ञापन के माध्यम से इसकी सार्वजनिक घोषणा दो सप्ताह के भीतर की जाएगी। 

मंत्रिसमूह ने एयरलाइंस के कर्ज व देनदारियों के लिए अतिरिक्त 15,000 करोड़ रुपये अलग रखने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है, जो विशेष उद्देश्य इकाई के माध्यम से दी जाएगी। सरकार का मानना है कि इससे संभावित खरीदारों के लिए एयर इंडिया और आकर्षक हो जाएगी।  एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बताया, 'समिति ने रुचि पत्र, शेयर खरीद समझौते व कर्ज को आगे और पुनर्गठित करने को आज मंजूरी दी है।  बोलीकर्ताओं के लिए रुचि पत्र जल्द ही सार्वजनिक किया जाएगा।' 

यह तीसरा मौका है जब सरकार एयर इंडिया के निजीकरण की कोशिश कर रही है। मोदी सरकार ने 2017 में इसे बेचने की कोशिश की थी, लेकिन असफल रही। एयरलाइंस को खरीदने के लिए एक भी खरीदार सामने नहीं आया। एयर इंडिया के अंकेक्षित खाते के मुताबिक वित्त वर्ष 19 के आखिर में कंपनी पर 58,351 करोड़ रुपये कर्ज था। अगर एयर इंडिया को बेचने में सरकार सफल होती है तो उसे कल्याणकारी योजनाओं के लिए खर्च करने को धन मिल सकेगा, क्योंकि वह वित्तीय दबाव में है। वित्त वर्ष 2018-19 में सराकर ने एयरलाइंस में करीब 30,000 करोड़ रुपये डाले, लेकिन इसका भाग्य बदलने में असफल रही। 

इस मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि करीब 10,000 करोड़ रुपये के अतिरिक्त कर्ज व 10,000 करोड़ रुपये की देनदारी का वहन सरकार करेगी, जिससे संभावित खरीदार पर बोझ कम किया जा सके। एक अन्य अधिकारी ने कहा, 'अतिरिक्त कर्ज व कुछ देनदारियों जैसे तेल कंपनियों का बकाया, एयरपोर्ट ऑपरेटर का बिल चुकाने, लंबित वेदन और स्थायी व सेवानिवृत्त कर्मचारियों को लाभ के भुगतान के लिए सरकार ने अलग से धन रखने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके पीछे वित्तीय बोझ कम करने का विचार है, जो कंपनी की संपत्ति के बराबर है। बाजार की स्थिति को समझने के मामले में हम व्यावहारिक हैं और हम कर्ज को लेकर खरीदार पर दबाव नहीं बना सकते।' 

वित्त वर्ष 2019 तक के आंकड़ों के मुताबिक कंपनी की संपत्ति 28,000 करोड़ रुपये है। एयर इंडिया पर 22,000 करोड़ रुपये की देनदारी है और प्राथमिक रूप से इसमें वेंडरों जैसे एयरपोर्ट और तेल कंपनियों के बकाये के अलावा कार्यशील पूंजी के लिए कम अवधि का कर्ज शामिल है। सरकार ने पहले ही 29,500 करोड़ रुपये कर्ज विशेष उद्देश्य इकाई एयर इंडिया असेट होल्डिंग लिमिटेड (एआईएएचएल) को स्थानांतरित कर दिया है। 

इस मामले से जुड़े सूत्रों ने कहा कि देश की सबसे बड़ी एयरलाइन इंडिगो, विस्तारा, एयरएशिया इंडिया (टाटा संस की), बड़ी वैश्विक एयरलाइंस जैसे इंटरनैशनल एयरलाइंस ग्रुप और सॉवरिन व प्राइवेट ग्लोबल फंड जैसे टेमासेक, केकेआर और वारबर्ग पिंकस ने ईवाई द्वारा एयर इंडिया के लिए आयोजित रोड शो में हिस्सा लिया। ईवाई इस पूरी बिक्री प्रक्रिया के लिए सलाहकार है।

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