बिजनेस स्टैंडर्ड - दूरसंचार राजस्व 50,000 करोड़ रुपये ज्यादा रहने के आसार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, February 25, 2020 04:23 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम कंपनिया खबर

दूरसंचार राजस्व 50,000 करोड़ रुपये ज्यादा रहने के आसार

सुरजीत दास गुप्ता / नई दिल्ली January 07, 2020

वर्ष 2019-20 के लिए सरकार दूरसंचार क्षेत्र से राजस्व के लिए अपने बजटीय लक्ष्य में 13,000 करोड़ रुपये और 50,000 करोड़ रुपये के बीच इजाफा दर्ज कर सकती है। राजस्व में यह वृद्घि सर्वोच्च न्यायालय के पास समीक्षा याचिका पर निर्भर करेगा, जिसमें लाइसेंस शुल्कों और स्पेक्ट्रम उपयोगकर्ता इस्तेमाल (एसयूसी) के तौर पर दूरसंचार कंपनियों से 1.47 लाख करोड़ रुपये का बकाया चुकाने को कहा गया है।

अपने जुलाई के बजट में सरकार ने 2019-20 में दूरसंचार क्षेत्र से 50,519 करोड़ रुपये हासिल होने का लक्ष्य रखा था जो पूर्ववर्ती वर्ष की तुलना में 28 प्रतिशत की वृद्घि है और इसे मुख्य रूप से लाइसेंस शुल्क, एसयूसी, और खरीदे गए स्पेक्ट्रम से संबंधित रकम शामिल होगी।

अपने राजकोषीय घाटे को नियंत्रित बनाए रखने के लिए सरकार को धन जुटाना बेहद जरूरी है। इसका स्पष्ट संकेत है कि सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों में विनिवेश से गैर-कर राजस्व के लिए सरकार का लक्ष्य पूरा नहीं हो सकता है। उदाहरण के लिए, सरकार ने वित्त वर्ष 2020 के लिए 1.05 लाख करोड़ रुपये का विनिवेश लक्ष्य रखा, लेकिन अब तक वह सिर्फ 17,364 करोड़ रुपये जुटाने में ही सफल रही है। भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन और एयर इंडिया के इस साल विनिवेश सूची से अलग रहने से यह लक्ष्य हासिल होने योग्य नहीं दिख रहा है। विनिवेश योजना में विलंब ऐसे समय में हुआ है जब सरकार का राजकोषीय घाटा नवंबर में वित्त वर्ष 2020 के बजट अनुमान के 115 प्रतिशत को छू चुका है।

दूरसंचार क्षेत्र से और भी उम्मीदें हैं। मौजूदा अनुमानों के आधार पर, सरकार को वित्त वर्ष 2020 के लिए विलंब से संबंधित स्पेक्ट्रम भुगतान के तौर पर 21,444 करोड़ रुपये का राजस्व मिलेगा। हालांकि इस राजस्व पर विपरीत प्रभाव अगले वित्त वर्ष (2020-21) में महसूस किया जाएगा, क्योंकि सरकार ने राहत पैकेज के तौर पर दूरसंचार कंपनियों को इस भुगतान के संबंध में अगले दो वित्त वर्षों की मोहलत दी है।

सेल्युलर ऑपरेटर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सीओएआई) के अनुमानों के अनुसार, उद्योग द्वारा लाइसेंस शुल्क और एसयूसी के तौर पर इस वित्त वर्ष में 17,500 करोड़ रुपये से अधिक का भुगतान किए जाने की संभावना है। शुरुआती तिमाहियों में सपाट राजस्व वृद्घि के बाद आखिरी दो तिमाहियों में इसमें तेजी आ सकती है, क्योंकि दूरसंचार कंपनियों ने पिछले साल अक्टूबर में अपनी दरों में 15-40 प्रतिशत तक का इजाफा किया।

दूरसंचार कंपनियों द्वारा दायर की गई समीक्षा याचिकाओं पर अदालती निर्णय महत्वपूर्ण होगा। विश्लेषकों का कहना है कि एक स्थिति यह देखी जा सकती है कि न्यायालय बीच बीच में भुगतान योजना की अनुमति दे, जिसमें कुल रकम का 25 प्रतिशत अग्रिम तौर पर चुकाया जाए और शेष भुगतान कुछ वर्षों में किस्तों के तौर पर किया जाए। उस स्थिति में सरकार को दूरसंचार कंपनियों से अतिरिक्त 36,000 करोड़ रुपये मिलेंगे जिससे उसे इस क्षेत्र से अपना राजस्व बढ़ाकर 75,000 करोड़ रुपये से ज्यादा करने में मदद मिलेगी।

Keyword: Telecom, revenue, SUV, Spectrum, Budget, Fiscal deficit, Non Tax revenue, deivestment, Air India, COAI,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या कोरोनावायरस के खतरे से जल्द निपट पाएगी दुनिया?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.