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नए मार्जिन मानकों से छोटे शेयरों पर दबाव

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई January 07, 2020

कारोबार पर नए मानकों से मिड-कैप, स्मॉल-कैप और चवन्नी शेयरों पर दबाव पडऩे की आशंका है, क्योंकि पिछले सप्ताह एक्सचेंजों द्वारा मार्जिन के संबंध में जारी किए गए स्पष्टीकरण के बाद इनके लिए जरूरी मार्जिन बढऩे का अनुमान है। पिछले सप्ताह जारी सूचना के अनुसार शेयर ब्रोकरों को अपने ग्राहकों से अग्रिम तौर पर (कैश और डेरिवेटिव, दोनों में) मार्जिन जुटाना होगा। 

एक वरिष्ठ शेयर ब्रोकर ने कहा, 'कृत्रिम रूप से बिक्री तैयार करने के लिए डीलरों द्वारा छोटी कंपनियों, खासकर चवन्नी शेयरों में कारोबार देखा गया, क्योंकि अपफ्रंट मार्जिन की कोई व्यवस्था नहीं थी। अब इस कारोबार में गिरावट आएगी।' उनके अनुसार अब ग्राहकों को एक्सचेंज की गणनाओं पर आधारित मार्जिन चुकाने की जरूरत होगी।

विश्लेषकों का मानना है कि तेजी से जुड़े 90 प्रतिशत से ज्यादा चवन्नी शेयरों पर उन ऑपरेटरों की नजर रहती है जो इन कंपनियों के प्रवर्तकों द्वारा दी गई पूंजी का इस्तेमाल करते हैं, न कि किसी मौलिक कारण के लिए। पिछले सप्ताह जारी एक एक्सचेंज गणना के अनुसार, कैश सेगमेंट के लिए, वैल्यू-एट-रिस्क (वीएआर) मार्जिन और एक्सट्रीम लॉस मार्जिन (ईएलएम) कारोबार के अग्रिम तौर पर जुटाना होगा और अन्य मार्जिन स्टॉक एक्सचेंजों द्वारा मार्जिन कॉल के बाद जुटाया जाएगा। वायदा एवं विकल्प (एफऐंडओ) सेगमेंट में अब सदस्यों को ग्राहकों से अग्रिम तौर पर शुरुआती मार्जिन, नेट बाई प्रीमियम, डिलिवरी मार्जिन और एक्सपोजर मार्जिन लेना अनिवार्य है।

प्रभुदास लीलाधर में रिटेल ब्रोकिंग के प्रमुख संदीप राइचुरा ने कहा, 'गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां 400-500 शेयरों से ज्यादा के लिए उधारी नहीं दे रही हैं। अब अतिरिक्त मार्जिन जरूरत ब्रोकरों को उधारी के संबंध में मिली रियायत समाप्त कर देगी। इससे खासकर मिड- और स्मॉल-कैप शेयर प्रभावित हो सकते हैं।' राइचुरा का कहना है, 'हालांकि यह पहल दीर्घावधि में फायदेमंद साबित हो सकती है, लेकिन अल्पावधि में हम इसमें समस्याएं देख सकते हैं।'

नियामक द्वारा म्युचुअल फंडों के लिए इन शेयरों के वर्गीकरण के बाद मिड-कैप और स्मॉल-कैप सेगमेंट पर दबाव पड़ा है। शुरू में शेयरों को लार्ज-, मिड-, या स्मॉल-कैप के तौर पर वर्गीकृत करने के लिए कोई मानक परिभाषा नहीं थी। सेबी द्वारा इन शेयरों को बाजार पूंजीकरण के आधार पर वर्गीकृत किए जाने के बाद यह बदलाव आया। बाजार पूंजीकरण के संदर्भ में प्रमुख-100 कंपनियों को लार्ज-कैप के तौर पर श्रेणीबद्घ किया गया है, 101 से 250 की रैंकिंग वाली कंपनियां मिड-कैप, और 251 से ऊपर की स्मॉल-कैप हैं। 

जीरोधा के मुख्य कार्याधिकारी नितिन कामत ने कहा है, 'सर्कुलरों में कहा गया है कि पूरा शुरुआती मार्जिन व्यापार से पहले अग्रिम तौर पर जुटाने की जरूरत होगी, भले ही यह दिन के कारोबार से संबंधित हो।' 

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