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विद्युत क्षेत्र में फंसी संपत्तियांसात का समाधान, दो दर्जन अधर में

श्रेया जय / नई दिल्ली January 07, 2020

लगभग 2 लाख करोड़ रुपये मूल्य के सर्वाधिक एनपीए (गैर-निष्पादित आस्तियां) वाले विद्युत उत्पादन क्षेत्र को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के नरम मानकों के बाद भी चालू वित्त वर्ष में कम सफलता हाथ लगने की संभावना दिख रही है। एनपीए के समाधान से संबंधित आरबीआई की आखिरी समय-सीमा 7 जनवरी बीत जाने के बाद भी लगभग दो दर्जन परिसंपत्तियां अनुकूल ऋण पुनर्गठन की राह देख रही हैं।

हालांकि लगभग 9-12 मामलों के लिए उम्मीद की किरण दिख रही है। उनका प्रमुख ऋणदाता पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) है, जो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी (एनबीएफसी) है और उसे आरबीआई की इस समय-सीमा से छूट हासिल है। वहीं बैंकों के लिए यह समय-सीमा अनिवार्य है।

विद्युत क्षेत्र में कर्ज की समस्या से जूझ रहीं कुल चिह्नित 36 परिसंपत्तियों में से सात का समाधान ऋणदाताओं द्वारा विभिन्न ऋण पुनर्गठन योजनाओं के जरिये निकाला जा चुका है। इनमें जेपी की प्रयागराज परियोजना भी शामिल है जिसे आईसीआईसीआई बैंक के साथ टाटा पावर के संयुक्त उपक्रम द्वारा खरीदा गया था। इसके अलावा इनमें एनएचपीसी द्वारा खरीदी गई लैंको तीस्ता पनबिजली परियोजना और रत्तन इंडिया पावर की अमरावती विद्युत परियोजना (जिसे हाल में गोल्डमैन सैक्स के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम को बेचा गया है) शामिल है। 

अदाणी पावर ने दो फंसी परिसंपत्तियों - जीएमआर की छत्तीसगढ़ विद्युत परियोजना और अवांता गु्रप की कोरबा वेस्ट विद्युत परियोजना का अधिग्रहण किया है। 25 परियोजनाएं केंद्र सरकार के प्रयासों के बावजूद अभी भी समाधान की राह तलाश रही हैं। इनमें से 14 को राष्ट्रीय कंपनी विधि पंचाट (एनसीएलटी) में दिवालिया प्रक्रिया के लिए भेजा गया है। मौजूदा समय में चार परिसंपत्तियां एनसीएलटी से बाहर कर्ज समाधान की प्रक्रिया से गुजर रही हैं जिनमें जीएमआर कमालंगा, जीएमआर वरोरा, एस्सार टोरी और रत्तन इंडिया पावर नासिक शामिल हैं।

जिन फंसी परियोजनाओं का समाधान नहीं निकला है, उनमें 11,000 मेगावॉट क्षमता की करीब 10 परिसंपत्तियां शामिल हैं, जो अधूरी हैं और उन्हें कोई खरीदार मिलने की संभावना नजर नहीं आ रही है। पीएफसी ने चालू वित्त वर्ष में 14,704 करोड़ रुपये मूल्य की 15 परियोजनाएं एनसीएलटी को सौंपी हैं। साथ ही अन्य ऋणदाताओं के साथ 14,762 करोड़ रुपये मूल्य की 14 परिसंपत्तियों के लिए एनसीएलटी के बाहर भी समाधान प्रक्रिया शुरू की गई है। पीएफसी ने 2019-20 के दौरान बकाया ऋणों के लिए अपने बहीखाते में 16,275 करोड़ रुपये का प्रावधान शामिल किया। 

एक ऋणदाता की सितंबर 2019 की निवेशक रिपोर्ट में कहा गया, 'पीएफसी को जनवरी 2020 तक चार परियोजनाओं जून तक एक अन्य परियोजना का समाधान निकलने का अनुमान है। 9 परियोजनाएं 2,629 करोड़ रुपये के कर्ज से जुड़ी हुई हैं, जो आरबीआई के सर्कुलर से प्रभावित नहीं होंगी।' ये वे परियोजनाएं हैं जिनमें पीएफसी प्रमुख ऋणदाता है।

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