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इराक पर धमकी से तेल पर चिंता

शाइन जैकब / नई दिल्ली January 06, 2020

अमेरिका द्वारा इराक पर प्रतिबंध लगाने की धमकी के बाद सोमवार को कच्चे तेल की कीमतें 70 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गईं। इससे वैश्विक बाजार में आपूर्ति पर दबाव बढ़ सकता है। सप्ताहांत की तुलना में वैश्विक कीमतों में वृद्घि से वाहन ईंधन की खुदरा कीमतों पर प्रभाव पड़ा है। दिल्ली में पेट्रोल की कीमत रविवार के 75.54 रुपये की तुलना में सोमवार को 75.69 रुपये प्रति लीटर पर पहुंच गई, जो 13 महीने का सर्वाधिक ऊंचा स्तर है। इसी तरह डीजल कीमत रविवार के 68.51 रुपये प्रति लीटर से बढ़कर 68.68 रुपये पर पहुंच गई। 

ईरान के जनरल कासिम सुलेमानी के मारे जाने के बाद, इराकी संसद ने अमेरिका सैनिकों को तुरंत देश छोडऩे को कहा था। इस निर्णय से अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप प्रशासन ने नाराजगी जताई है और इराक पर प्रतिबंध लगाने की धमकी दी है।

ईरान से भारत का आयात 2018-19 के 2.39 करोड़ टन से घटकर मौजूदा वित्त वर्ष में 17 लाख टन रह गया है। रेटिंग एजेंसी इक्रा की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि हालांकि इराक में सैन्य टकराव बढऩे से वहां प्रतिदिन 46 लाख बैरल कच्चे तेल का उत्पादन खतरे में पड़ सकता है जिसका भारत को होने वाली कच्चे तेल की आपूर्ति भी प्रभावित हो सकती है और वैश्विक रूप से तेल कीमतों में तेजी आ सकती है। इसके अलावा, यदि ईरान स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज में तेल टैंकर गतिविधियों को रोकता है तो इससे कीमतें और चढ़ सकती हैं।

बोस्टन कंसल्टिंग गु्रप (बीसीजी) में पार्टनर एवं निदेशक अनिर्बन मुखर्जी ने कहा, 'तेजी से बढ़ रही अर्थव्यवस्था के तौर पर हम कच्चे तेल आयात पर निर्भर बने रहेंगे। कीमतों में अस्थिरता का आकलन नहीं किया जा सकता और हमारा आयात मजबूत बना रहेगा। मुख्य ध्यान इस पर रहना चाहिए कि इस घटनाक्रम के खिलाफ हमें स्वयं को किन उपायों के जरिये जोखिम से दूर बनाए रखना है। हमें अच्छी श्रेणी के कच्चे तेल की खरीदारी, रणनीतिक तौर पर भंडारण और मांग प्रबंधन पर ध्यान देने की जरूरत है।'

इक्रा की रिपोर्ट में कहा गया है कि कच्चे तेल को अमेरिकी इन्वेंट्री में आई भारी गिरावट से भी मदद मिली है। हिंदुस्तान ऑयल एक्सप्लोरेशन कंपनी के प्रबंध निदेशक पी इलांगो ने कहा, 'शेल की आवक ने पिछले तीन वर्षों में कच्चे तेल की कीमतों में संतुलन बनाए रखने का कार्य किया था। इस वजह से भू-राजनीतिक कारकों का असर घटा था। हालांकि यदि इराक पर प्रतिबंध लगाया जाता है तो इससे निश्चित तौर पर आपूर्ति कुछ हद तक प्रभावित होगी।'

इक्रा ने कहा है कि अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों में वृद्घि भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए नकारात्मक है, क्योंकि कच्चे तेल की कीमत में प्रत्येक 1 डॉलर प्रति बैरल की वृद्घि से देश का आयात बिल 1.4 अरब डॉलर तक बढ़ेगा। दूसरी तरफ, कच्चे तेल में प्रत्येक 10 डॉलर प्रति बैरल की वृद्घि से राजकोषीय घाटा जीडीपी के लगभग 0.1 प्रतिशत तक बढ़ेगा और इससे सरकार की राजकोषीय स्थिति और ज्यादा प्रभावित हो सकती है। 

हालांकि कच्चे तेल की ऊंची कीमतों से अपस्ट्रीम कंपनियों को बेहतर प्राप्तियों में मदद मिल सकती है। इक्रा में कॉरपोरेट रेटिंग्स के उपाध्यक्ष एवं सह-प्रमुख प्रशांत वशिष्ठ ने कहा, 'जहां अल्पावधि में पीएसयू ओएमसी के विपणन लाभ पर दबाव पड़ सकता है, वहीं उनका क्रेडिट प्रोफाइल मजबूत बना रह सकता है।' 
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