बिजनेस स्टैंडर्ड - कंपनी पंजीयक की याचिका खारिज
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कंपनी पंजीयक की याचिका खारिज

रुचिका चित्रवंशी / नई दिल्ली 01 06, 2020

टाटा संस-मिस्त्री मामला

एनसीएलएटी ने खारिज की कंपनी पंजीयक, मुंबई की याचिका
कंपनी का दर्जा पब्लिक से प्राइवेट में बदलने का है मामला
आदेश से 'गैर कानूनी' और 'कंपनी पंजीयक की मदद से' जैसे शब्द हटाने की मांग

बिजनेस स्टैंडर्ड कंपनी पंजीयक की याचिका खारिजटाटा संस-साइरस मिस्त्री मामले में राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील पंचाट (एनसीएलएटी) ने कंपनी पंजीयक, मुंबई की याचिका को खारिज कर दिया। कंपनी पंजीयक ने अपनी याचिका में टाटा संस-साइरस मिस्त्री मामले में पहले के आदेश में संशोधन की मांग की थी और कहा कि इसमें कंपनी पंजीयक की कोई दुर्भावनापूर्ण मंशा नहीं थी। 

एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उच्चतम न्यायालय के आदेश के आधार पर ही सरकार इस मामले में कोई कदम उठाएगी। उन्होंने कहा, 'अपील पंचाट कानून की व्याख्या करने के लिए स्वतंत्र है। हम अपनी स्थिति स्पष्टï करना चाहते हैं क्योंकि सरकारी संस्था के बारे में इसमें टिप्पणी की गई है। हम इस मामले में उच्चतम न्यायालय के आदेश का इंतजार करेंगे।' 

एनसीएलएटी ने अपने आदेश में कहा है, 'हमने पाया कि कंपनी पंजीयक ने इसे गलत तरीके से लिया है क्योंकि कंपनी पंजीयक मुंबई के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की गई है और न ही उनके खिलाफ कोई आरोप लगाए गए हैं।' कंपनी पंजीयक मुंबई ने टाटा संस को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी में बदलने से संबंधित पंचाट के आदेश से 'गैर कानूनी' और 'कंपनी पंजीयक की मदद से' जैसे शब्द हटाने की मांग की थी। 18 दिसंबर को अपने आदेश में एनसीएलएटी ने कहा था कि टाटा संस ने कंपनी पंजीयक की मदद से कंपनी का दर्जा पब्लिक से प्राइवेट में बदलने में जल्दबाजी दिखाई, जो गैर-कानूनी था। टाटा संस के मानद चेयरमैन रतन टाटा और टाटा कंसल्टेंसी सर्विसे ने एनसीएलएटी के आदेश को अलग से उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी है। 

न्यायाधीश एसजे मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाली दो जजों के पीठ ने कहा कि आदेश में कंपनी और उसके निदेशक मंंडल को संदर्भित किया है न कि कंपनी पंजीयक को। उन्होंने यह भी कहा कि कंपनी का दर्जा बदलने के आदेश कंपनी पंजीयक के खिलाफ नहीं है।

कंपनी पंजीयक ने पंचाट को बताया कि कंपनी (संशोधन) अधिनियम, 2000 के अनुसार धारा 43 ए (2ए) के तहत पब्लिक कंपनी को प्राइवेट कंपनी में बदलने का अधिकार दिया गया है। एनसीएलएटी ने उल्लेख किया कि टाटा संस ने 19 जुलाई, 2018 को अपने पत्र में कंपनी पंजीयक को बताया कि वह धारा 34ए (2ए) का इस्तेमाल कर कंपनी का दर्जा बदल रही है, ऐसे में कंपनी पंजीयक के पास इस बदलाव की अनुुमति देने की संवैधानिक बाध्यता थी। हालांकि न्यायाधीश ने कहा कि कंपनी पंजीयक ने अधिनियम के किसी अन्य प्रावधान को नहीं देखा जिसमें कंपनी द्वारा दर्जा बदलने के लिए केंद्र सरकार की मंजूरी की जरूरत होती है। 

टाटा समूह के वकीलों ने कहा कि एनसीएलएटी के आदेश ने कंपनी अधिनियम, 2013 के तहत गठित कंपनी की वैधता और अस्तित्व पर संकट की तरह है। उन्होंने कहा कि आज के आदेश में भी वर्ष 2000 में खत्म की गई धारा 43ए की उप-धारा (4) को ध्यान में नहीं रखा गया। अभी केवल 43ए की उप-धारा (2ए) ही प्रभावी है। टाटा संस ने इसी धारा के तहत कंपनी पंजीयक के पास आवेदन किया था। लेकिन एनसीएलएटी ने इसकी अनदेखी की।

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