बिजनेस स्टैंडर्ड - सीसीबी की समय सीमा नहीं बढ़ाएगा आरबीआई!
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सीसीबी की समय सीमा नहीं बढ़ाएगा आरबीआई!

रघु मोहन / नई दिल्ली 01 06, 2020

पूंजी संरक्षण कोष मामला

बिजनेस स्टैंडर्ड सीसीबी की समय सीमा नहीं बढ़ाएगा आरबीआई!भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) पूंजी संरक्षण कोष (कैपिटल कंजर्वेशन बफर या सीसीबी) का अनुपालन करने के लिए बैंकों को दी समय सीमा नहीं बढ़ा सकता है। आरबीआई ने पिछले साल बैंकों को वित्त वर्ष 2020 के अंत तक 2.5 प्रतिशत सीसीबी रखने की शर्त पूरी करने का निर्देश दिया था। केंद्र को वित्त वर्ष 2021 में बैंकों को पूंजी मुहैया करते वक्त इस पहलू का ध्यान जरूर रखना होगा। 

सीसीबी वह रकम होती है, जिसका प्रावधान बैंकों को मुश्किल हालात से निपटने के लिए रखना होता है। इस प्रावधान की शुरुआत 2008 के वैश्विक वित्तीय संकट के बाद हुई थी। सीसीबी की अतिरिक्त 0.625 प्रतिशत किस्त टलने से बैंकों के पास 37,000 करोड़ रुपये की अतिरिक्त रकम बच गई थी। इस वजह से बैंकों को 3.5 लाख करोड़ रुपये तक के ऋण आवंटित करने में मदद मिली होगी। हालांकि वित्त वर्ष 2021 में बैंकों को यह सुविधा नहीं मिलेगी जब तक उन्हें सरकार की तरफ से पर्याप्त पूंजी नहीं मिलेगी। 

सीसीबी पर बैंकों की सुस्त चाल से 1 अप्रैल 2013 से पूंजी अनुपात का क्रम टूट गया था। केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय के बीच बजट पूर्व बातचीत में इस मुद्दे पर चर्चा हो सकती है। यह विषय आरबीआई के 7 जून के उस परिपत्र से भी जुड़ा है, जिसमें बैंकों को अधिक प्रावधान करने के लिए कहा गया है। दूरसंचार कंपनियों को केंद्र को ब्याज सहित 1.333 लाख करोड़ रुपये भुगतान करने संबंधी उच्चतम न्यायालय का आदेश भी इस विषय से संबद्ध है। केंद्रीय बैंक ने ट्रेंड ऐंड प्रागे्रस ऑफ बैंकिंग इन इंडिया (2017-18) पर अपनी रिपोर्ट में सीसीबी के संबंध में बैंकों को ढील दिए जाने का खास जिक्र किया था।     

बिजनेस स्टैंडर्ड सीसीबी की समय सीमा नहीं बढ़ाएगा आरबीआई!आरबीआई ने रिपोर्ट में कहा कि केंद्रीय बैंक सरकारी बैंकों में पूंजी तो डाल रही है, लेकिन यह सीसीबी सहित न्यूनतम नियामकीय शर्तें पूरी करने भर को ही पर्याप्त है। रिपोर्ट में कहा गया है,' सीसीबी के अंतिम किस्त का क्रियान्वयन 31 मार्च, 2020 तक टलने से इन बैंकों को थोड़ी राहत मिल गई। अर्थव्यवस्था की वित्तीय जरूरत के अनुरूप ऋण आवंटन की उनकी क्षमता के लिए उनके पास न्यूनतम नियामकीय शर्तों से अधिक पूंजी होनी चाहिए। इससे इन बैंकों को जोखिम लेने और इससे निपटने का साहस आएगा।'

2.5 प्रतिशत सीसीबी में सामान्य इक्विटी टायर-1 कैपिटल (टायर-1 कैपिटल का हिस्सा) है, जो 9 प्रतिशत के न्यूनम पूंजी पर्याप्त नियम से अधिक है। इस अहम बात पर भी नजरें होंगी कि वित्त वर्ष 2020 में सरकारी बैंक कितना लाभांश देते हैं। बेसल-3 पूंजी दिशानिर्देश से संबंधित आरबीआई के जुलाई 2015 के परिपत्र में कहा गया है, 'सुरक्षित पूंजी में ह्रास की स्थिति में बैंकों को अपने कुछ वैकल्पिक खर्चों में कमी कर इसमें मजबूती लानी चाहिए। इनमें लाभांश भुगतान, शेयर पुनर्खरीद और कर्मचारियों के बोनस में कमी आदि शामिल हैं।'

पूर्व गवर्नर ऊर्जित पटेल की अध्यक्षता में आरबीआई के निदेशक मंडल की बैठक में सीसीबी की समस सीमा टलना कुछ प्रमुख निर्णयों में शामिल था। इस बैठक के बाद केंद्रीय बैंक और वित्त मंत्रालय में मतभेद मुखर हो गए, खासकर 9 प्रतिशत पूंजी पर्याप्त की शर्त सरकार को नागवार गुजरी। दुनिया के अन्य देशों में यह अनुपात 8 प्रतिशत है। केंद्रीय बैंक इस अनुपात में कमी करने पर राजी नहीं हुआ, लेकिन सीसीबी की अंतिम किस्त 0.625 प्रतिशत का क्रियान्वयन टाल दिया। इससे 11 सरकारी बैंक को आरबीआई के त्वरित उपचारात्मक कार्रवाई (पीसीए) से बाहर निकलने में मदद मिली।

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