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नौकरी की शुरुआत में ये नुस्खे बांध लें गांठ तो रहेंगे आपके ठाठ

सर्वजित के सेन /  01 06, 2020

पहली नौकरी का जश्न मनाने की कई वजह होती हैं। लेकिन सबसे बड़ी वजह यह होती है कि रुपये-पैसे के मामले में आप आजाद हो जाते हैं। नए कपड़े खरीदने हों या नया-नवेला गैजेट, आप अपनी मर्जी के मालिक हो जाते हैं। लेकिन कई बार इसकी वजह से आप बेवजह खर्च भी कर जाते हैं। इसीलिए बेहतर है कि माता-पिता पहली नौकरी लगते ही अपने बच्चों को बचत के सबक देना शुरू कर दें।

उनसे पूछें कि वे क्या खरीदना चाहते हैं? नया-नवेला मोबाइल फोन या कार या घर? जो भी खरीदना चाहें, उसके लिए बचत और निवेश शुरू कर दें। सबसे पहले देखें कि उसके लिए कितनी रकम की जरूरत पड़ेगी और उसी हिसाब से बचत शुरू कर दें। लैडर7 फाइनैंशियल एडवाइजर्स के संस्थापक सुरेश सदगोपन कहते हैं, 'अलग-अलग खर्चों या अल्पावधि और दीर्घावधि लक्ष्यों के लिए कितनी रकमी चाहिए। यह देखिए और उसी हिसाब से संपत्ति आवंटन शुरू कर दीजिए।'

सबसे पहले बचत करें और उसके बाद निवेश शुरू करें। टीबीएनजी कैपिटल एडवाजर्स के संस्थापक एवं मुख्य कार्य अधिकारी तरुण बिरानी सलाह देते हैं, 'आप कितना भी कमाते हों, उसका एक हिस्सा जरूर बचाएं।' जब बचत आपकी आदत बन जाती है तो लघु बचत और दूसरी वित्तीय योजनाओं में निवेश शुरू कर दें। प्लान अहेड वेल्थ एडवाइजर्स के मुख्य कार्य अधिकारी विशाल धवन कहते हैं, 'जैसे ही वेतन हाथ आए, 20-30 फीसदी हिस्सा निवेश कर दें। उसके बाद ही खर्च करना शुरू करें।' 

निवेश के इतने ठिकाने मौजूद हैं कि युवाओं के लिए सही ठिकाना चुनना भी कम मुश्किल काम नहीं है। मगर शुरुआत के लिए म्युचुअल फंड का सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) या इक्विटी फंड में एसआईपी बेहतर रहेगा क्योंकि इनसे नियमित निवेश की आदत पड़ती है और अच्छी संपत्ति भी जमा हो जाती है। बिरानी कहते हैं, 'नियमित एसआईपी से आपके भीतर वित्तीय अनुशासन आएगा, जो लंबी अवधि की वित्तीय योजना में सबसे अहम होता है।' 

बजट तैयार करें

बिरानी का मशविरा है, 'बजट बनाए बगैर रकम का पता लगाना बहुत मुश्किल काम है। व्यस्तता भरे जीवन में तो और भी मुश्किल।' जब आप कुछ महीने तक बजट तैयार करते रहेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि आपकी कमाई कितनी है और आप किस तरह खर्च कर रहे हैं। इस तरीके को बारीकी से देखेंगे तो आपको पता चल जाएगा कि आपके कुल खर्च में से गैर जरूरी खर्च कौन से हैं। धवन कहते हैं, 'तयशुदा या जरूरी खर्च और गैर जरूरी खर्च को अलग कर लें। गैर जरूरी खर्चों पर उसी वक्त लगाम लगा लें वरना उन्हें जरूरत में बदलते देर नहीं लगेगी।' 

क्रेडिट कार्ड में सावधानी

क्रेडिट कार्ड भी किसी को आसानी से कर्ज के जाल में फंसा सकते हैं और उन्हें जरूरत पडऩे पर ही इस्तेमाल किया जाना चाहिए। सदगोपन समझाते हैं, 'कुछ भी खरीदना है तो पहले उसके लिए रकम बचाएं और बाद में खरीदें। कर्ज लेकर या क्रेडिट कार्ड की मदद से खरीदने के बजाय यह बेहतर तरीका है। कार्ड का इस्तेमाल अपनी सहूलियत के लिए ही करना चाहिए। इस मामले में डेबिट कार्ड बेहतर होते हैं। पेटीएम, फोन पे जैसे कई वॉलेट भी होते हैं, जिन्हें इस्तेमाल करना आसान है और जिनसे आप पर कर्ज भी नहीं चढ़ता।' 

आपात स्थितियों के लिए रकम

आप कितनी भी बेहतर योजना बना लें, सब कुछ उसी के हिसाब से होना जरूरी नहीं है। कई बार ऐसे अप्रत्याशित खर्च या आपात स्थितियां आ जाती हैं, जिनके बारे में आपने कोई योजना ही नहीं बनाई होती है। बिरानी कहते हैं, 'ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए अलग से रकम रखना ही समझदारी है। इससे अप्रत्याशित वित्तीय परिस्थितियों से निपटने के लिए हम तैयार रहते हैं और आपात स्थिति आने पर दिमागी तनाव से भी बच जाते हैं।' 

स्वास्थ्य बीमा लें

अगर आपके माता-पिता आप पर निर्भर नहीं हैं तो नौकरी के शुरुआती सालों में जीवन बीमा आपके लिए बहुत जरूरी नहीं है, लेकिन स्वास्थ्य बीमा बेहद जरूरी है। जीवन बीमा बाद में ले लीजिए। सदगोपन कहते हैं, 'पहली नौकरी लगते ही सबसे पहले करीब 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा ले लीजिए।' इससे सुनिश्चित होगा कि अचानक अस्पताल में भर्ती होने पर युवा व्यक्ति को अपनी जेब से पैसा खर्च नहीं करना पड़े और उसकी वित्तीय योजना चौपट नहीं हो जाए। हो सकता है कि आपकी कंपनी आपको समूह स्वास्थ्य बीमा दे रही हो। फिर भी अलग से स्वास्थ्य बीमा लीजिए ताकि कंपनी छोडऩे पर आपको कोई परेशानी नहीं हो।
Keyword: job, employment, Share, Mutual fund, Family budget, Car, mobile, house,
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