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पांच वर्षीय विजन में महिला कल्याण पर जोर देगी सरकार

शुभायन चक्रवर्ती / नई दिल्ली January 05, 2020

केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों के दौरान महिलाओं के कल्याण, सतत विकास, और निवेश-केंद्रित आर्थिक वृद्घि के लिए प्रयासों पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। इस सबंध में शनिवार को एक बैठक हुई थी जिसमें मंत्रियों ने क्षेत्र-केंद्रित योजनाएं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के समक्ष सौंपी थीं।शुक्रवार से दो-दिवसीय बैठक में 10 क्षेत्र-केंद्रित मंत्रालय समूहों ने पिछले कार्यकाल के दौर शुरू की गई पहलों और विकास कार्यों के बारे में अपनी योजनाएं प्रधानमंत्री और मंत्री परिषद के समक्ष पेश कीं। 

मौजूदा समय में मंदी से जूझ रही अर्थव्यवस्था में सुधार लाना ज्यादातर मंत्रियों का मुख्य उद्देश्य बना हुआ है, लेकिन साथ ही सरकार इस कार्यकाल में महिलाओं के कल्याण और पर्यावरण संरक्षण पर भी ध्यान केंद्रित किए जाने की संभावना तलाश रही है। 

सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) प्रत्येक क्षेत्रीय वर्ग के साथ विस्तार से चर्चा की है और जल्द ही मंत्रियों के निर्णायक विजन दस्तावेजों पर जानकारी मुहैया कराई जाएगी। एक अधिकारी ने कहा कि संसद में बजट पेश किए जाने से महज कुछ सप्ताह पहले इस तरह के बदलावों के बावजूद बजटीय आवंटन हरेक विभाग के अनुसार किया जाएगा।

प्रत्येक मंत्रालय की जरूरतों को व्यक्तिगत तौर पर सुनने के बजाय (जैसा कि शुरू में मानक रहा है) पीएमओ ने क्षेत्रीय दृष्टिïकोण की भावना पर जोर दिया है, जिसके लिए नीतियों में अधिक बदलाव की जरूरत है। व्यक्तिगत तौर पर सचिवों ने अपने क्षेत्रीय समूहों का नेतृत्व किया। समूह स्तर पर वाणिज्य, वित्त, एमएसएमई, श्रम एवं ग्रामीण विकास शामिल हैं।

वाणिज्य सचिव के नेतृत्व वाले वाणिज्य समूह में वाणिज्य विभाग, भारी उद्योग, वस्त्र और उद्योग एवं आंतरिक व्यापार प्रोत्साहन विभाग (डीपीआईआईटी) शामिल हैं। वाणिज्य विभाग का कहना है कि निर्यातकों और एमएसएमई, खासकर नकदी संकट से जूझ रहे क्षेत्र के लिए कम दर पर ऋण उपलब्ध कराना जरूरी होगा। वैश्विक नियमों के अनुकूल योजनाओं के साथ साथ मजबूत निर्यात प्रोत्साहन व्यवस्था विभाग की योजनाओं में मुख्य रूप से शामिल है।

इसके अलावा निर्यात अवसर तलाशने के लिए प्रमुख भागीदार देशों के साथ द्विपक्षीय चर्चाएं बरकरार रखे जाने का भी सुझाव दिया गया है, जिनमें अमेरिका और यूरोपीय संघ भी शामिल हैं। राजस्व में अहम योगदान देने वाले टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग सामान और रत्न जैसे प्रमुख क्षेत्रों में बड़ी गिरावट का मतलब है कि भारत का निर्यात नवंबर तक लगातार चार महीनों तक कमजोर रहा। साथ ही लगातार 6 महीनों से आयात में भी कमी आई है जो अर्थव्यवस्था में लगातार कमजोरी का संकेतक है।

एक अन्य अधिकारी ने कहा कि डीपीआईआईटी ने स्थानीय स्तर पर व्यवसाय करने की प्रक्रिया को आसान बनाए जाने का भी लक्ष्य रखा है और कहा है कि वह इस संबंध में राज्यों और अन्य सरकारी संस्थाओं के साथ भागीदारी करेगा। निवेशकों के लिए सिंगल विंडो प्लेटफॉर्म बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
Keyword: Central government, women welfare, वाणिज्य, वित्त, एमएसएमई, श्रम एवं ग्रामीण विकास,
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