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बजट में पीएसयू बैंकों में पूंजी लगाने की घोषणा के आसार नहीं

एजेंसियां / नई दिल्ली January 05, 2020

आगामी बजट में सरकार द्वारा सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों (पीएसबी) में पूंजी लगाने की घोषणा किए जाने की संभावना नहीं है। इसके अलावा सरकार द्वारा बैंकों को फंसे कर्ज की वसूली तेज करने और बाजार से कोष जुटाने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है। अधिकारियों का कहना है कि बैंक 2020-21 के दौरान अपनी कोष उगाही कोशिशों के तहत अपने गैर-प्रमुख व्यवसायों की बिक्री कर सकते हैं।  वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण द्वारा मोदी-2 सरकार का दूसरा बजट 1 फरवरी को पेश किए जाने की संभावना है। 

सूत्रों के अनुसार, बैंकों को इस कैलेंडर वर्ष के दौरान एनसीएलटी और गैर-एनसीएलटी मामलों, दोनों के समाधान से मजबूत रकम वसूली की उम्मीद है और साथ ही बाजार से पूंजी जुटाने की भी संभावना बरकरार है। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का प्रावधान कवरेज अनुपात 76.6 प्रतिशत की 7 वर्षीय ऊंचाई पर है।

सूत्रों का कहना है कि कुछ फंसे ऋणों में, बैंकों ने 100 प्रतिशत तक का प्रावधान किया है और इन खातों से वसूली मददगार साबित होगी। अधिकारियों का कहना है कि कुछ बैंकों की शेयर कीमतें मजबूत हो रही हैं जिससे उन्हें सरकारी हिस्सेदारी घटाने का अच्छा अवसर मिला है। 

भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) सहायक इकाइयों एसबीआई कार्ड्स ऐंड पेमेंट सर्विसेज और यूटीआई म्युचुअल फंड में अपनी हिस्सेदारी घटाने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुका है। वह नैशनेल स्टॉक एक्सचेंज (एनएसई) में 50 लाख शेयर (1.01 प्रतिशत हस्सेदारी) बेचने की संभावना तलाश रहा है। पूंजी उगाही की कोशिश में इसी तरह के प्रयास सरकार के स्वामित्व वाले अन्य ऋणदाताओं द्वारा किए जा रहे हैं। 

चार प्रमुख बैंकों में पीएनबी को 16,091 करोड़ रुपये, यूनियन बैंक ऑफ इंडिया को 11,768 करोड़ रुपये, केनरा बैंक को 6,571 करोड़ रुपये और इंडियन बैंक को 2,534 करोड़ रुपये की पूंजी मुहैया कराई गई। विलय से जुड़े बैंकों इलाहाबाद बैंक को 2,153 करोड़ रुपये, यूनाइटेड बैंक ऑफ इंडिया को 1,666 करोड़ रुपये और आंध्रा बैंक को 200 करोड़ रुपये मुहैया कराए गए थे।

जहां सिंडिकेट बैंक का विलय केनरा बैंक में किया जाएगा, वहीं इलाहाबाद बैंक का इंडियन बैंक के साथ विलय होगा। इसी तरह, आंध्रा बैंक और कॉरपोरेशन बैंक को यूनियन बैंक ऑफ इंडिया के साथ समेति किया जाएगा। 

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