बिजनेस स्टैंडर्ड - स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग की सफलता के लिए उपभोक्ताओं में जागरूकता की दरकार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Tuesday, March 31, 2020 04:35 AM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम निवेश खबर

स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग की सफलता के लिए उपभोक्ताओं में जागरूकता की दरकार

राजेश भयानी / मुंबई January 05, 2020

स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग की अधिसूचना एक या दो हफ्ते में जारी की जा सकती है और उसी दिन से नए नियम अपनाने की एक साल की समय सीमा शुरू हो जाएगी। लेकिन सरकारी अधिकारियों और उद्योग विशेषज्ञों के मुताबिक सफलतापूर्वक इसे लागू करने के लिए उपभोक्ताओं में जागरूकता जरूरी है। 

उनका कहना है कि हॉलमार्किंग को लागू करने और उसकी निगरानी करने वाली संस्था भारतीय मानक ब्यूरो (बीआईएस) के पास संसाधन सीमित हैं या दूसरे शब्दों में कहें तो अनिवार्य हॉलमार्किंग की व्यवस्था तभी सफल होगी जब उपभोक्ता इसके लिए दबाव बनाएंगे। सरकार ने नवंबर के अंत में स्वर्ण आभूषणों की अनिवार्य हॉलमार्किंग की घोषणा की थी।

फिलहाल सराफों और हॉलमार्क किए जा रहे आभूषणों की संख्या अलग अलग हैं। लेकिन नीति निर्माताओं और बाजार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सराफों की संख्या अनुमानों से कम रह सकता है। कुछ उद्योग संघों ने कहा है कि पूरे भारत में 3,00,000-4,00,000 सराफे हैं। हालांकि, विशेषज्ञों की राय है कि यह संख्या 1,00,000 के करीब हो सकती है।     

जीएफएमएस में वरिष्ठ विश्लेषक-बहुमूल्य धातु मांग, देवजित साहा ने कहा, 'हमारे अनुमान से देश में करीब 1,20,000-1,50,000 तक सराफे हो सकते हैं।' स्वर्ण उद्योग में पारदर्शिता लाने के लिए काम कर रहे कई अन्य संगठनों ने यह संख्या करीब 80,000 से 1,00,000 तक बताई है। उन्होंने कहा कि कई ऋणदाता और कारीगर खुद की गिनती सराफों में करते हैं लेकिन वास्तव में वे सराफा नहीं हैं।

बीआईएस के पास केवल 26,019 सराफे ही हॉलमार्क वाले गहने बेचने के लिए पंजीकृत हैं। पिछले दो दशक से ऐच्छिक तौर पर ही सही, गहनों की हॉलमार्किंग की व्यवस्था चल रही है। विशेषज्ञ कहते हैं कि हॉलमार्किंग उपभोक्ताओं को खरीदे गए गहनों की शुद्घता को लेकर एक आश्वासन प्रदान करती है लेकिन इस संबंध में उनके बीच जागरूकता की कमी है।

शाहा ने कहा, 'हमने अपने अध्ययन में पाया है कि दरअसल छोटे शहरों और ग्रामीण इलाकों में बिल्कुल भी हॉलमार्क सोने की बिक्री नहीं की जाती है। उपभोक्ता अक्सर हॉलमार्किंग प्रणाली से अनजान होते हैं। हमने यह भी पाया है कि कुछ संदिग्ध आभूषण विक्रेता हॉलमार्क दावे के साथ कम कैरेट वाले गहने बेच रहे हैं।

वे पूरी मूल्य शृंखला में उपभोक्ताओं के साथ धोखा कर रहे हैं। यह काम बड़े पैमाने पर पूर्व, दक्षिण के कुछ हिस्सों और मध्य भारत में हो रहा है।' उन्होंने आगे कहा कि देश भर के अपने क्षेत्रीय अध्ययन में हमने पाया है कि आभूषण विक्रेता उपभोक्ताओं को 916 शुद्घता (22 कैरेट) वाले गहने बेच रहे हैं लेकिन वो गहने अक्सर 80 फीसदी से अधिक शुद्घ नहीं होते। दक्षिण भारत में हॉलमार्किंग को लेकर जागरूकता काफी ज्यादा है और इसीलिए वहां स्थिति बेहतर है। 

उपभोक्ता मामले मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि हमारी समझ से 40 फीसदी गहनों पर हॉलमार्क है हालांकि इस पर कोई आधिकारिक आंकड़ा मौजूद नहीं है। 2018-19 में 4.49 करोड़ आभूषणों पर हॉलमार्क लगाए गए। पिछले दिनों उद्योग से जुड़े लोगों और विश्लेषकों ने कहा था कि औसत आभूषण 10 ग्राम का है। लेकिन उक्त सरकारी अधिकारी का कहना है कि हॉलमार्क वाले गहनों का औसत भार 10 ग्राम से कम हो सकता है।

10 ग्राम का औसत आकार होने की स्थिति में 80 फीसदी स्वर्ण आभूषणों पर हॉलमार्क होने चाहिए जिसे बहुत सारे विशेषज्ञ और सरकारी अधिकारी नकारते हैं। उक्त सरकारी अधिकारी ने कहा कि 40-50 फीसदी ही वास्तविकता के करीब होते हैं। विश्व स्वर्ण परिषद ने 2019 की पहली छमाही में एक सर्वेक्षण किया था। इसमें सराफों पर विश्वास की कमी और गलत या बहुत अधिक अशुद्घ आभूषण भारत और दुनिया भर में उपभोक्ताओं की बड़ी चिंताओं में से एक थी। विशेषज्ञों ने कहा कि भले ही सराफों को अनिवार्य हॉलमार्किंग लागू होने के बाद अपने गैर-हॉलमार्क वाले आभूषणों को बेचने के लिए एक वर्ष का समय दिया गया है, उन्हें अब उत्पादों की शुद्घता को लेकर कहीं अधिक सावधान और स्पष्टवादी रहना होगा। 

Keyword: Gold, Ornament, Hallmarking, BIS, GFMS,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या सरकार को बढ़ाना चाहिए जांच का दायरा?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.