बिजनेस स्टैंडर्ड - दामों में सुधार के बाद धातु क्षेत्र को आस
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दामों में सुधार के बाद धातु क्षेत्र को आस

राजेश भयानी, ईशिता आयान दत्त और टीई नरसिम्हन /  January 05, 2020

एसऐंडपी बीएसई का सूचकांक धातु खंड में सुधार के संकेत दे रहा है। बढ़ते मार्जिन से बेंचमार्क सेंसेक्स बेहतर प्रदर्शन कर रहा है जिससे सूचकांक में पिछले तीन महीनों के दौरान 22.4 प्रतिशत की उछाल आई है। निचले स्तर पर जाने के बाद इस अवधि में इस्पात कंपनियां दाम बढ़ाती रही हैं। मूल धातु की कंपनियों को मांग में सुधार और ऑर्डर बुक में इजाफा होने की भी उम्मीद है। पिछले एक महीने में लंदन मेटल एक्सचेंज (एलएमई) में 4.8 प्रतिशत की तजी आई है, हालांकि लौह अयस्क और इस्पात जैसी अन्य धातुओं के दामों में 3.5 से 5.8 प्रतिशत तक की तेजी है। 

जस्ता : आपूर्ति में कमी की वजह से तेजी

अमेरिका और चीन जैसी प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं में वर्ष 2019 के दौरान जस्ते की मांग में बढ़त नजर आई है। पहले 10 महीने में रिफाइंड जस्ते के उपयोग में हल्की-सी बढ़त हुई और यह 0.3 प्रतिशत बढ़कर 1.133 करोड़ टन हो गया।हिंदुस्तान जिंक के मुख्य कार्याधिकारी सुनील दुग्गल ने कहा कि मांग बढऩे के कारण बाजार में आपूर्ति कम होने वाली है। जस्ते का मौजूदा स्टॉक (वैश्विक) काफी गंभीर स्तर पर होने की वजह से अनिश्चितता की स्थिति है।

उन्होंने कहा कि दामों का स्तर ऐतिहासिक रूप से 3,000 डॉलर प्रति टन के शीर्ष स्तर पर था। अगर दामों का मौजूदा स्तर (प्रति टन 2,300 डॉलर) लंबे समय तक बना रहता है, तो इससे खदान बंद हो सकती है क्योंकि 2,000 डॉलर के आस-पास का स्तर छोटे खनिकों के लिए दबावपूर्ण वाली स्थिति है जिससे आपूर्ति को नुकसान होगा तथा यह बाजार को और मुश्किल में डाल देगा।

फिलहाल एलएमई पर जस्ते का भाव 2,300 डॉलर प्रति टन के स्तर पर चल रहा है। भारत में जैसा कि अपेक्षित बुनियादी ढांचे पर जोर दिए जाने के कारण गैल्वनाइज्ड उत्पादों का उपयोग बढ़ रहा है, इसलिए जस्ते की मांग बढ़ेगी। लगभग 50 फीसदी जस्ते का इस्तेमाल गैल्वनाइजेशन के लिए किया जाता है जिसका उपयोग इस्पात में जंग और क्षरण से निपटने के लिए किया जाता है।

इक्रा के वरिष्ठ उपाध्यक्ष जयंत रॉय ने कहा कि निर्माण में कुछ सकारात्मक परिदृश्य के कारण जस्ते की मांग के लिहाज सेवित्त वर्ष 21 सकारात्मक वृद्धि के साथ समाप्त होने की उम्मीद है। वित्त वर्ष 2019 और वित्त वर्ष 20 की पहली छमाही के दौरान जस्ते की मांग वृद्धि में गिरावट नजर आई थी। 

एल्युमीनियम : दामों में ज्यादा इजाफे की उम्मीद नहीं

इक्रा के अनुसार भारत में प्रमुख रूप से वाहन बिक्री और उत्पादन में मंदी के परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 20 की पहली छमाही के दौरान देश में एल्युमीनियम की मांग वृद्धि में करीब 2.5 प्रतिशत की नरमी रही है। वित्त वर्ष 19 में वृद्धि दर छह प्रतिशत थी। एल्युमीनियम की करीब 30 से 40 प्रतिशत मांग में वितरण और पारेषण का योगदान रहता है तथा शेष भाग में पैकेजिंग, निर्माण और वाहन क्षेत्र का योगदान होता है। बाल्को के चेयरमैन एसके रूंगटा ने कहा कि नवंबर-दिसंबर में दाम प्रति टन 1,700 डॉलर के स्तर पर थे। दाम इससे कम नहीं किए जा सकते। उन्होंने कहा कि इस स्तर पर कुछ स्मेल्टर बंद हो जाएंगे और कुल मिलाकर मांग-आपूर्ति का संतुलन स्थापित हो जाएगा। इससे दाम बढ़ेंगे, हालांकि कोई बहुत ज्यादा इजाफा होने की उम्मीद नहीं है। 

तांबा और सीसा : ऑर्डरों में सुधार का इंतजार

अप्रैल 2019 के बाद एलएमई पर तांबे के दामों में तीव्र गिरावट आई है और नवंबर 2019 के आखिर तक दामों पर दबाव रहा है। हालांकि इसके बाद से दाम उस स्तर से बढ़कर प्रति टन 6,153 डॉलर तक हो गए। हिंदुस्तान कॉपर के अधिकारियों के अनुसार एलएमई पर तांबे के दामों में सुधार का रुख जारी रहेगा। ऐसे कई कारण है जिन्हें इसके लिए जिम्मेदार ठहराया जा सकता है।

एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिका और चीन के बीच व्यापार के आंशिक समाधान के प्रभाव से एलएमई पर तांबे की कीमतों को बढऩे में मदद मिल पाई है। पूरा समाधान होने के मामले में काफी इजाफा होने की उम्मीद है। अधिकारियों ने यह भी कहा कि चीन और भारत में बुनियादी ढांचे के खर्च में बढ़ोतरी के साथ-साथ भंडारण गृह में तांबे के स्टॉक में गिरावट और वर्ष 2020 में कमी के अनुमान से तांबे के दामों में इजाफे का रुख रहने के आसार रहेंगे।

भारत में मूल धातु के उत्पादकों और प्रमुख उपभोक्ताओं का विश्लेषण करने वाली मुंबई स्थित रेगसस कंस्लटिंग के निदेशक संदीप डागा ने कहा कि वैश्विक स्तर पर व्यापक आर्थिक आंकड़े स्थिर हो रहे हैं। कई तिमाहियों की तीव्र औद्योगिक मंदी के बाद ऐसा हो रहा है। हालांकि इस धारणा में तेजी आ सकती है, लेकिन ऑर्डर बुक में अब तक ठोस बदलाव नहीं दिखा है। इनके धातु विश्लेषण द्वारा भारत के सीसा कारोबार के लिए किया गया मासिक विश्लेषण बताता है कि बैटरी क्षेत्र की मांग में कमी रही है। हाल के महीनों में सीसा उत्पादकों को बेहतर ऑर्डर बुक की वजह से फायदा तो मिला है, हालांकि यह फायदा शायद ज्यादा देर तक कायम न रह सके।

इस्पात : बुनियादी ढांचे में तेजी के कारण मजबूती

इस्पात में जस्ते जैसे कारणों से ही सुधार हो रहा है। खुदरा क्षेत्र में मांग वृद्धि और सरकारी परियोजनाएं दामों का संचालन करने वाले प्रमुख कारण हैं। सितंबर में निचले स्तर तक जाने के बाद नवंबर से कंपनियां दाम बढ़ाती जा रही हैं। जेएसडब्ल्यू के संयुक्त प्रबंध निदेशक और समूह के मुख्य वित्त अधिकारी शेषगिरि राव ने कहा कि अंतरराराष्ट्रीय दामों में इजाफा शुरू होने के बाद तुरंत खरीद शुरू हो गई। इस तरह दामों में तेजी को वहन किया गया। उन्होंने कहा कि अगली तिमाही के लिए रफ्तार सकारात्मक है।

इस्पात की मांग में बुनियादी ढांचा, निर्माण और रियल एस्टेट का योगदान करीब 55 से 60 प्रतिशत तक रहता है जिनमें सुधार नजर आ रहा है। शेष करीब 40 प्रतिशत में वाहन, मशीनरी और पूंजीगत उत्पादों का योगदान रहता है। इस क्षेत्र के सुधार में देरी की संभावना जताई जा रही है।

पिछले दो सप्ताह के दौरान आईसीईएक्स जिंस एक्सचेंज पर लंबे इस्पात उत्पादों के लिए बोले गए दामों में (गाजियाबाद को छोड़कर) नौ प्रतिशत का इजाफा हुआ और भाव बढ़कर 32,000 रुपये प्रति टन हो गया है। इक्रा के रॉय के मुताबिक वित्त वर्ष 21 में इस्पात की मांग वृद्धि पांच से छह प्रतिशत रहने के आसार हैं। 

लौह अयस्क : दामों में और इजाफा होने के आसार

लौह अयस्क दिग्गज एनएमडीसी ने लौह अयस्क के दामों में प्रति टन करीब 200 रुपये का इजाफा किया है। सात महीने के बाद यह इसका पहला इजाफा है। लौह अयस्क टुकड़े के दाम फिलहाल 2,800 रुपये प्रति टन हैं, जबकि चूरे के दाम बढ़कर 2,560 रुपये प्रति टन हो चुके हैं। दामों में पिछली बार इजाफा मई 2019 में किया गया था जिसके बाद इसे दामों में कमी करनी पड़ी थी। अब दाम मई 2019 के स्तर पर हैं।

इस्पात की बड़ी कंपनियों ने लौह अयस्क का स्टॉक करना शुरू कर दिया है, जबकि छोटे इस्पात विनिर्माता बाजार में लौह अयस्क की कमी के पूर्वानुमान के कारण डरने लगे हैं। दिसंबर 2019 में एनएमडीसी की बिक्री वृद्धि दर सात प्रतिशत बढ़कर 30.4 लाख टन हो चुकी है। उद्योग के प्रतिनिधियों को उम्मीद है कि अगले तीन महीने में दामों में 10 से 15 प्रतिशत तक का इजाफा होगा क्योंकि आयातित और घरेलू लौह अयस्क के बीच अंतर अब भी ज्यादा है।

Keyword: S&P, BSE, Metal, Benchmark Sensex, Steel Company, Zink, US, China, Stock, LME, ICRA,
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