बिजनेस स्टैंडर्ड - लोगों में खरीदने की ताकत रही तभी बढ़ेगी कार बिक्री : भार्गव
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लोगों में खरीदने की ताकत रही तभी बढ़ेगी कार बिक्री : भार्गव

बीएस बातचीत
अरिंदम मजूमदार /  01 05, 2020

बीएस बातचीत

भारतीय वाहन उद्योग के साथ आर सी भार्गव करीब चार दशक से जुड़े हुए हैं। उनकी नजर में भी साल 2019 भारतीय वाहन उद्योग के लिए सबसे खराब रहा है। भार्गव ने कहा कि बिक्री में गिरावट की मुख्य वजह कार की कीमतों में इजाफे का सरकारी रवैया है। अरिंदम मजूमदार को दिए साक्षात्कार में मारुति के चेयरमैन भार्गव ने कहा कि राजस्व में कमी की भरपाई के लिए कारों पर कर में इजाफे का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और रोजगार सृजन पर पड़ेगा। मुख्य अंश... 

क्या साल 2019 वाहन उद्योग के लिए सबसे खराब वर्ष रहा?

बिजनेस स्टैंडर्ड लोगों में खरीदने की ताकत रही तभी बढ़ेगी कार बिक्री : भार्गवबिक्री में गिरावट के लिहाज से साल 2019 संभवत: सबसे खराब रहा। कई मायनों में यह साल काफी असामान्य था। बीएस-4 से बीएस-6 की ओर जिस तरह से बढ़ा जा रहा है, वह पहले कभी नहीं हुआ। बीएस-4 का पंजीकरण 31 मार्च के बाद नहींं करने की शर्त पहले के किसी भी संक्रमण काल में नहीं रही है। इस समयसीमा ने सभी विनिर्माताओं को मुश्किल में डाल दिया है कि कैसे उत्पादन व बिक्री नियंत्रित की जाए ताकि साल के आखिर में कोई स्टॉक न बचे। इस समयसीमा ने उत्पादन व बिक्री के प्रबंधन के लिहाज से विनिर्माताओं के लिए काफी अनिश्चितताएं पैदा की हैं।

कई ग्राहकों ने यह मानना शुरू कर दिया है कि साल के आखिर में बीएस-4 वाहनों की घबराहट में बिकवाली होगी। मुझे लगता है कि रातोंरात बदलाव के इस तरीके से मुश्किल पैदा होती है। दूसरा, सुरक्षा व उत्सर्जन के उच्च मानकों के कारण वाहन की कीमत भी बढ़ी है। तीसरा, राजस्व में कमी की भरपाई के लिए नौ राज्यों ने कर बढ़ा दिए। सभी नीति निर्माता अभी भी सोचते हैं कि अगर आप कर बढ़ाना चाहते हैं तो शराब, सिगरेट और कार पर कर बढ़ा दीजिए।

इससे वाहन चलाने की लागत बढ़ी है। इसके साथ ही बैंक अपने नुकसान को लेकर चिंतित हैं और उधारी मानक को सख्त बनाया है, जिससे काफी ग्राहक कर्ज नहीं ले पा रहे। आप किसी एक साल हुए काफी बदलाव देखेंगे तो आप आसानी से समझ सकते हैं कि वाहन निर्माताओं के लिए यह साल कैसे मुश्किल भरा रहा। 

ओला व उबर के चलते वाहन खरीदने की महत्वाकांक्षा खत्म नहीं हुई है। भारतीय के पास खरीदने की ताकत नहीं है?

ओला व उबर से युवाओं के बीच बिक्री पर वास्तव में असर पड़ा। इनके जीने का ढंग पिछली पीढ़ी से काफी अलग है। ऐसे लोगों की पहली प्राथमिकता कार खरीदने की नहीं है। वे ज्यादा पार्टी करते हैं, पर्यटन करते हैं और छुट्टियां मनाते हैं। 

क्या यह वर्ग इतना बड़ा है कि बिक्री पर असर डाल सके?

अभी बहुत असर नहीं पड़ा है, लेकिन निश्चित तौर असर दिखना शुरू हो गया है। कंपनियों को उनके मनोविज्ञान को समझना होगा। बड़े शहरों में यह ज्यादा है। दिल्ली व मुंबई अब कंपनियों के लिए बिक्री केंद्र नहीं रह गए हैं। 

अब साल 2020 कैसा रहेगा?

कार की अफोर्डेबिलिटी से बिक्री तय होगी। पिछले दशक में उद्योग की रफ्तार करीब 8 फीसदी थी। लेकिन मौजूदा लागत को देखते हुए मुझे नहीं लगता कि उद्योग की रफ्तार 8 फीसदी भी रहेगी। मैं एंट्री लेवल कार और उसे खरीदने के लिए कर्ज लेने वाले ग्राहक की बात कर रहा हूं। साल 2019 की तरह अगर कार खरीदने की लागत 20 फीसदी बढ़ती है तो उस कार को खरीदने के लिए ग्राहक रकम कहां से लाएंगे। 

वाहन उद्योग में सुस्ती का सीधा असर जीडीपी और 5 लाख करोड़ डॉलर वाली अर्थव्यवस्था की योजना पर पड़ेगा?

देश के कुल विनिर्माण में कार की हिस्सेदारी 16 फीसदी है। इस उद्योग में सुस्ती से विनिर्माण की रफ्तार पर असर होगा। यह अन्य सहयोगी उद्योग को भी झटका देगा। हम इसके संकेत देख रहे हैं। इसलिए सरकार को अहसास होना चाहिए कि कार पर कर बढ़ाने से राजस्व नहीं बढ़ेगा। जीएसटी बढऩे से विनिर्माण और नीचे जाएगा। क्योंकि खरीद की ताकत नहीं बढ़ रही है। हमें देखना होगा कि अप्रैल के बाद हालात कैसे रहते हैं। यह लागत का मामला है। डीजल व पेट्रोल कीमत एक समान होने के कारण डीजल कार इस्तेमाल करने का फायदा कम हो गया है।

इलेक्ट्रिक वाहन पर मारुति की रफ्तार धीमी क्यों है? आपके प्रतिस्पर्धी आगे निकल गए हैं और वाहन पेश किया है?

हमारी एकमात्र चिंता अफोर्डेबिलिटी और तकनीक की उपलब्धता है। बुनियादी ढांचा व बैटरी कहां है? कौन हमारी इलेक्ट्रिक कार खरीदेगा। अगर मैं इसे बनाता हूं तो किसी न किसी को इसे खरीदना होगा। 

आपकी जैसी बड़ी कंपनी बैटरी प्लांट लगा सकती है?

मैं ऐसा नहीं कर सकता। फिर आप हमसे सड़क बनाने को कहेंगे। यह मेरा काम नहीं है।

लेकिन इलेक्ट्रिक वाहन का दौर निश्चित तौर पर आएगा। क्या ऐसा नहीं है?

इसके लिए बैटरी तकनीक व लागत में स्थिरता जरूरी होगी। अगर बैटरी की लागत घटकर 70 डॉलर आती है तो यह पूरे कारोबार को बदल देगी। तब शायद कोई बैटरी प्लांट लगा सकता है। भारत के लिए अभी यह काफी महंगी कार है।

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