बिजनेस स्टैंडर्ड - बासमती चावल निर्यात पर असर
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बासमती चावल निर्यात पर असर

वीरेंद्र सिंह रावत और टी ई नरसिम्हन /  January 05, 2020

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढऩे से भारत के बासमती चावल निर्यात पर असर पड़ सकता है जिससे निर्यातकों की चिंता बढ़ी है। ईरान को होने वाला बासमती निर्यात वर्ष 2018-19 में 33 फीसदी या करीब 1.56 अरब डॉलर रहा। लेकिन बासमती निर्यात को पिछले साल अमेरिका द्वारा ईरान पर प्रतिबंध लगाए जाने के बाद से ही अनिश्चितता का सामना करना पड़ रहा है। मौजूदा घटनाक्रम से हालात बिगड़े और अक्टूबर तक निर्यात 57 करोड़ डॉलर रहा जिसका निर्यात में 26 फीसदी योगदान है।

उद्योग के सूत्रों का कहना है कि ईरान की तरफ से कुल 1200 करोड़ रुपये की देनदारी में से 800 करोड़ रुपये का भुगतान अटका है। ऐसे में निर्यातकों को इस बात का डर है कि ताजा निर्यात से भुगतान में दिक्कत आएगी। अखिल भारतीय चावल निर्यातक संगठन के कार्यकारी निदेशक विनोद कौल कहते हैं, 'अमेरिका-ईरान के बीच तनाव बढऩे से व्यापार पर असर पड़ेगा जिनमें भारत से होने वाला बासमती निर्यात भी शामिल है। अगर हालात बिगड़ते हैं तो सुरक्षा चिंताओं की वजह से माल ढुलाई पर असर पड़ेगा।' पिछले कुछ महीने से ईरान में होने वाले बासमती निर्यात पर असर पड़ा है।

हल्दी निर्यात बाधित 

ईरान के खिलाफ प्रतिबंधों से हल्दी निर्यात पर भी असर पड़ा है। ईरान साबुत हल्दी का सबसे बड़ा खरीदार है। निर्यातकों का कहना है कि मई से ही ईरान में हल्दी का माल नहीं जा रहा है। खाद्य एवं दवा उद्योग के अलावा चमड़ा उद्योग से भी मांग बढऩे से हल्दी निर्यात में तेजी आई है। हल्दी के एक प्रमुख निर्यातक दीपकमल निर्यात के निदेशक दीपक मजूमदार कहते हैं कि अमेरिका ने डॉलर पर प्रतिबंध लगा दिया जिससे ईरान में होने वाले हल्दी निर्यात पर असर पड़ा और आयातकों को केवल चुनिंदा बैंकों की मदद से ही भुगतान करना पड़ रहा है जिससे भुगतान प्रभावित हो रहा है। 
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