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ईरान-अमेरिकी तनाव से चाय निर्यातकों की चिंता

अभिषेक रक्षित /  January 05, 2020

ईरान पर अमेरिकी हवाई हमले के बाद पश्चिम एशिया के घटनाक्रम में अचानक बदलाव दिखने लगा है जिसकी वजह से चाय निर्यातकों और चाय बगान कंपनियों की चिंता बढ़ी है। दरअसल ईरान भारतीय चाय के लिए मुख्य निर्यातक देश हैं जिसने रूस और दूसरे प्रमुख परंपरागत बाजारों को पीछे छोड़ दिया है। अब चिंताजनक बात यह है कि ईरान में तनाव बढऩे की स्थिति में इस देश को ज्यादा व्यापार प्रतिबंधों का सामना करना पड़ेगा जिससे चाय के निर्यात पर भी असर पड़ेगा। ईरान के एक निर्यातक का कहना है, 'व्यापार के लिए स्थिरता बेहद अहम है और अमेरिका बार-बार हवाई हमलों और ईरान बदला लेने की बात कर रहा है ऐसे में यहां चिंताजनक स्थिति है।'

देश के चाय का निर्यात ईरान में होता है और जनवरी-नवंबर 2019 के दौरान साल में पहली बार चाय निर्यात ने 5 करोड़ किलोग्राम का आंकड़ा पार कर किया और इसकी कीमत उच्च स्तर पर कीमत 280 रुपये प्रतिकिलो रही। इसकी वजह से ईरान सबसे बड़ा चाय निर्यातक देश बन गया। कारोबार के लिहाज से भी देखें तो ईरान का निर्यात एक साल पहले की तुलना में दोगुनी होकर 1,415 करोड़ रुपये हो गई है।

ईरान को निर्यात करने वाले एक चाय कारोबारी कहते हैं, 'हालात जटिल है। ईरान देश का प्रमुख परंपरागत चाय आयातक है। अगर ईरान का निर्यात प्रभावित होता है तब चाय बगान कंपनियों के लिए बड़ी मुश्किल होगी।' हालांकि भारतीय चाय बोर्ड आशावादी है। इसके उपाध्यक्ष ए के रे कहते हैं कि अमेरिकी प्रतिबंधों से ईरान का चाबहार बंदरगाह (दोनों सरकार इस पर काम कर रही हैं और समझौते के मुताबिक यह देश के निर्यात मार्गों से जुड़ा होगा) के बाहर रहने और भारत तथा ईरान के बीच रुपया-रियाल समझौते की वजह से अमेरिका-ईरान के बीच बनी तनावपूर्ण स्थिति से भारत के कारोबारी हितों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। 

मिसाल के तौर पर जब अमेरिका ने पिछले साल ईरान पर प्रतिबंध लगाया था तब देश के चाय निर्यात में तेजी आई थी जबकि श्रीलंका की अच्छी-खासी बाजार हिस्सेदारी खत्म हो गई थी। हालांकि एक अन्य निर्यातक कहते हैं कि अगर अमेरिका चाबहार बंदरगाह को प्रतिबंधों के दायरे से बाहर नहीं रखता तब क्या होगा। भारतीय चाय संगठन के अध्यक्ष विवेक गोयनका कहते हैं, 'इस क्षेत्र की स्थिरता किस तरह प्रभावित होगी यह उस बात पर निर्भर करेगा और भारत का इसमें कैसा रूख रहेगा। हालांकि मुझे पूरा यकीन है कि ईरान के साथ कारोबार बरकरार रहेगा।'

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