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कॉरपोरेट डेट, सरकारी बॉन्डों से एनपीएस के प्रतिफल में सुधार

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई January 03, 2020

राष्ट्रीय पेंशन योजना (एनपीएस) की टियर-1 इक्विटी योजनाओं ने पिछले साल के दौरान एक से दो अंक का प्रतिफल दिया और इक्विटी म्युचुअल फंड योजनाओं की कई श्रेणियों को मात दी। सरकारी बॉन्डों और कॉरपोरेट डेट से प्रतिफल भी ऊंचा रहा जिससे निवेशकों के लिए संपूर्ण प्रतिफल में सुधार दिखा। सरकारी बॉन्ड योजनाओं ने औसत तौर पर 13.6 प्रतिशत का प्रतिफल दिया, जो इक्विटी योजनाओं द्वारा दिए गए 10.2 प्रतिशत की तुलना में लगभग 3.4 प्रतिशत अधिक है। कॉरपोरेट डेट योजनाओं ने समान अवधि के दौरान 10.9 प्रतिशत का औसत प्रतिफल दिया।

इक्विटी श्रेणी में कोटक पेंशन फंड सर्वश्रेष्ठï प्रदर्शन वाला फंड रहा और एक साल की अवधि के लिए इसका प्रतिफल 12.2 प्रतिशत रहा, जबकि एलआईसी पेंशन फंड 8.1 प्रतिशत के प्रतिफल के साथ कमजोर रहा। सितंबर में बाजार में शुरू हुई तेजी के बाद 2019 की आखिरी तिमाही में इक्विटी योजनाओं के औसत प्रतिफल में सुधार आया। सक्रिय एनपीएस प्रबंधकों ने मल्टी-कैप रणनीति पर जोर दिया और अपने निवेश को बाजार पूंजीकरण के लिहाज से प्रमुख 150-200 शेयरों तक सीमित रखा। प्रतिफल ने मल्टी-कैप (9.6 प्रतिशत का औसत प्रतिफल), लार्ज एवं मिड-कैप (7.9 प्रतिशत), मिड-कैप (2.9 प्रतिशत) और स्मॉल-कैप (-1.2 प्रतिशत) श्रेणियों समेत कई डाइवर्सिफाइड इक्विटी म्युचुअल फंड योजनाओं को मात दी। 

कई डाइवर्सिफाइड इक्विटी एमएफ योजनाओं ने पिछले दो वर्षों के दौरान अपने बेंचमार्क की तुलना में कमजोर प्रदर्शन किया है। बाजार पर्यवेक्षक इसके लिए सिर्फ कुछ शेयरों तक निवेश सीमित रहने और योजनाओं के वर्गीकरण और सामान्य मूल्य सूचकांक के बदले कुल प्रतिफल सूचकांक की पेशकश जैसे नियामकीय बदलावों के प्रभाव को जिम्मेदार मान रहे हैं। 

निफ्टी और सेंसेक्स के शेयरों में निवेश के साथ एनपीएस के इक्विटी फंड शुरू में सक्रिय रूप से प्रबंधित थे। नियामक द्वारा फंड प्रबंधकों को बीएसई या एनएसई पर सूचीबद्घ कम से कम 5,000 करोड़ रुपये के बाजार पूंजीकरण वाली कंपनियों में निवेश और डेरिवेटिव सेगमेंट में कारोबार की अनुमति दिए जाने से 2015 में इस स्थिति में बदलाव आया। विश्लेषकों के अनुसार, भविष्य में प्रदर्शन में सुधार आएगा, क्योंकि फंड प्रबंधकों ने अपने पोर्टफोलियो में बदलाव किया है।

प्लान रुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अमोल जोशी ने कहा, 'म्युचुअल फंडों और एनपीएस के बीच 75-100 आधार अंक के लागत अंतर से एनपीएस को मदद मिली। म्युचुअल फंडों को पिछले साल शेयरों में सीमित दायरे में कारोबार की वजह से दबाव का सामना करना पड़ा। वहीं, पिछले साल 135 आधार अंक की दर कटौती की वजह से पूंजीगत लाभ से एनपीएस डेट पोर्टफोलियो को मदद मिली।' 

एनपीएस के लिए फंड प्रबंधन शुल्क प्रबंधित परिसंपत्ति का 0.01 प्रतिशत है। वहीं इक्विटी एमएफ खर्च अनुपात के तौर पर 1-2 प्रतिशत का शुल्क वसूलते हैं। पिछले वर्ष में आरबीआई ने रीपो दर पांच बार घटाई और पूरे वर्ष में यह दर कटौती 135 आधार अंक की रही। बॉन्ड कीमतें और ब्याज दरें विपरीत दिशा में बढ़ती हैं। पोर्टफोलियो के लिए औसत प्रतिफल में इक्विटी का 50 प्रतिशत और सरकारी तथा कॉरपोरेट डेट योजनाओं में 25-25 प्रतिशत प्रतिफल शामिल है। 

Keyword: NPS, Equity, Bond, Corporate debt, Fund,
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