बिजनेस स्टैंडर्ड - अतिरिक्त नकदी 4 लाख करोड़ रुपये के पार
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अतिरिक्त नकदी 4 लाख करोड़ रुपये के पार

अनूप रॉय / मुंबई January 03, 2020

बैंकिंग व्यवस्था में अतिरिक्त नकदी गुरुवार को 4 लाख करोड़ रुपये से ऊपर पहुंच गई। शुक्रवार को जारी आंकड़ों से यह जानकारी मिलती है। सरकार ने 2003 में जारी किए गए अपने 61,000 करोड़ रुपये के बॉन्डों को भुनाया है। सरकार सोमवार को नकदी प्रबंधन बिल के जरिये 30,000 करोड़ रुपये की 70 दिन की पूंजी जुटाएगी। आरबीआई ने 4.15 लाख करोड़ रुपये की अतिरिक्त पूंजी खपाने के लिए शुक्रवार को 15,000 करोड़ रुपये की 63-दिन की रिवर्स रीपो नीलामी की।

दिसंबर में व्यवस्था में नकदी 2-2.5 लाख करोड़ रुपये के आसपास थी और 1 जनवरी को यह 3 लाख करोड़ रुपये पर थी। नकदी को लेकर पिछली बार इस तरह की स्थिति 2016 के अंत में नोटबंदी के बाद और 2017 के शुरू में दर्ज की गई थी। 

हालांकि नोटबंदी के समय के विपरीत,इस बार केंद्रीय बैंक अतिरिक्त नकदी को खपाने के लिए पूरी तरह से तैयार है। नोटबंदी के दौरान, केंद्रीय बैंक के पास सिर्फ लगभग 7 लाख करोड़ रुपये की बॉन्ड पूंजी थी। हाल के समय में केंद्रीय बैंक ने अपनी बॉन्ड खरीदारी को मजबूत बनाया है। आरबीआई को बैंकों से ली गई रकम के बदले बॉन्ड देने होते हैं। 

लेकिन बॉन्ड डीलरों को कुछ मामूली चिंताओं को छोड़कर ज्यादा नकदी अधिशेष से व्यवस्था पर दबाव पडऩे की आशंका नहीं दिख रही है। बदरीश कुल्हाली ने कहा, 'मौजूदा मामले में, ऐसा नहीं लग रहा है कि अतिरिक्त नकदी की वजह से मुद्रास्फीति में तेजी आएगी। अर्थव्यवस्था में मांग अभी भी काफी कमजोर है। अतिरिक्त नकदी से दरें रीपों दरों पर या इससे कुछ नीचे बनी रहेंगी।'

यदि व्यवस्था में लंबे समय तक पर्याप्त नकदी बनी रहे तो क्या हो सकता है? इंडिया रेटिंग्स ऐंड रिसर्च के सहायक निदेशक सौम्यजीत नियोगी ने कहा, 'पर्याप्त नकदी पिछले एक साल में व्यवस्थागत जोखिम के समायोजन में मददगार रही है।' नियोगी ने कहा, 'समस्या ऋण के लिए कमजोर मांग की वजह से है। व्यवस्था सरकारी प्रतिभूतियों के बाजार में केंद्रीय बैंक पर अधिक निर्भर हो रही है।' 

आरबीआई बॉन्ड प्रतिफल को बाजार ताकतों पर छोडऩे के बजाय इसे प्रभावित करने की भी कोशिश कर रहा है। इसका कारण ओपन मार्केट ऑपरेशन (ओएमओ) के जरिये अल्पावधि बॉन्डों और लंबी अवधि के प्रतिफल के बीच अंतर को कम करना हो सकता है, लेकिन बाजार का मानना है कि केंद्रीय बैंक कम दर पर अतिरिक्त उधारी के संदर्भ सरकार के लिए आधार तैयार कर रहा है। कुल्हाली ने कहा, 'अतिरिक्त नकदी  जुटाने के लिए आरबीआई द्वारा अल्पावधि में कोई कदम उठाए जाने की संभावना नहीं है। विशेष ओएमओ के अलावा, आरबीआई को शायद उम्मीद है कि अल्पावधि प्रतिफल कम बनाए रखने में अतिरिक्त नकदी मददगार हो सकती है। ज्यादा अधिशेष नकदी संभवत: आरबीआई द्वारा किसी ओएमओ खरीदारी को रोकेगी और यदि आरबीआई दीर्घावधि प्रतिफल में तेजी को सीमित रखना चाहता है तो विशेष ओएमओ को बढ़ावा मिल सकता है।'

Keyword: RBI, Bond, Bond Market, Reserve Bank, Open Market Operation, OMO, Cash, liquidity,
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