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हटेंगी आरओसी के खिलाफ बाध्यताएं

रुचिका चित्रावंशी / नई दिल्ली January 02, 2020

राष्ट्रीय कंपनी विधि अपील पंचाट (एनसीएलएटी) ने गुरुवार को कहा कि वह कंपनी पंजीयक (आरओसी), मुंबई के खिलाफ दिए अपने आदेश से संबंधित बाध्यताएं दूर करने को तैयार है। पंचाट के आदेश में कहा गया था कि टाटा संस को पब्लिक से प्राइवेट कंपनी में तब्दील किया जाना अवैध था और इसमें आरओसी को इसे पलटने का निर्देश दिया गया था। 

एनसीएलएटी ने इस मामले की सुनवाई शुक्रवार, 3 जनवरी तक स्थगित कर दी है और आरओसी से इस संबंध में स्पष्टïीकरण मांगा है कि किस आधार पर निजी कंपनी का गठन किया गया। एनसीएलएटी के चेयरमैन न्यायमूर्ति एस के मुखोपाध्याय की अध्यक्षता वाले दो सदस्यीय पीठ ने पब्लिक से प्राइवेट कंपनी में तब्दील किए जाने की अनुमति के लिए प्रक्रिया पर भी स्पष्टीकरण मांगा है।

आरओसी मुंबई ने सितंबर 2017 में टाटा संस को 'पब्लिक' से 'प्राइवेट' कंपनी में तब्दील किए जाने के संबंध में पंचाट के आदेश में 'अवैध' और 'आरओसी की मदद से' शब्दों को हटाए जाने की मांग की थी। 18 दिसंबर के अपने आदेश में एनसीएलएटी ने आरओसी के खिलाफ गंभीर असहमति जताते हुए कहा कि टाटा संस ने 'आरओसी की मदद से' जल्दबाजी में अपना दर्जा पब्लिक से प्राइवेट कंपनी में बदला, जो अवैध था। 

अपील पंचाट ने आरओसी से प्राइवेट कंपनी के लिए जरूरी चुकता पूंजी के बारे में विवरण मुहैया कराने को कहा है। अपने 18 दिसंबर के निर्णय में, एनसीएलएटी ने कहा था कि कंपनीज ऐक्ट, 2013 की धारा 14 के तहत पंचाट द्वारा जारी किसी आदेश के बगैर ही आरओसी ने प्रमाणपत्र में 'पब्लिक' शब्द हटा दिया और 'टाटा संस लिमिटेड' को 'प्राइवेट' कंपनी के तौर पर दिखाया। अपनी याचिका में, आरओसी ने कहा कि फैसले में कुछ तथ्यात्मक और कानूनी त्रुटियां थीं, और इसलिए अपील पंचाट से आदेश में संशोधन करने का अनुरोध किया गया जिससे कि आरओसी, मुंबई के निर्णय को सही तरीके से पेश किया जा सके। 
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