बिजनेस स्टैंडर्ड - उच्चतम न्यायालय पहुंची टाटा
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उच्चतम न्यायालय पहुंची टाटा

देव चटर्जी / मुंबई 01 02, 2020

याचिका पर अगले सप्ताह सुनवाई संभव

बिजनेस स्टैंडर्ड उच्चतम न्यायालय पहुंची टाटाटाटा समूह की होल्डिंग कंपनी टाटा संस ने पूर्व चेयरमैन साइरस मिस्त्री को बहाल करने के राष्ट्रीय कंपनी कानून अपील पंचाट (एनसीएलएटी) के आदेश के खिलाफ आज उच्चतम न्यायालय में अपील दायर की। पंचाट ने साथ ही समूह के मौजूदा चेयरमैन एन चंद्रशेखरन की नियुक्ति को अवैध करार दिया था। उच्चतम न्यायालय अगले सप्ताह टाटा की याचिका पर सुनवाई कर सकता है। 

टाटा संस ने अपनी याचिका में कहा है कि मिस्त्री की निवेश कंपनियों ने भी चंद्रशेखर को हटाने की मांग नहीं की थी और फिर भी एनसीएलएटी ने उनकी नियुक्त को अवैध करार दिया। इससे समूह का कामकाज प्रभावित हुआ है। एनसीएलएटी के मुताबिक टाटा समूह के संरक्षक रतन टाटा और एन के पूनावाला टाटा संस और समूह की अन्य कंपनियों में बेजा हस्तक्षेप करते थे। इस बारे में टाटा ने अपनी याचिका में कहा है कि उसके न्यासियों की भूमिका के बारे में पंचाट की टिप्पणी बेबुनियाद और तथ्यों से परे है।

अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड ने मिस्त्री को अक्षम करार देते हुए कार्यकारी चेयरमैन के पद से बर्खास्त कर दिया था। मिस्त्री परिवार की निवेश कंपनियों की टाटा संस में 18.5 फीसदी हिस्सेदारी है। उन्होंने इसे राष्ट्रीय कंपनी कानून पंचाट (एनसीएलटी) में चुनौती दी थी लेकिन उन्हें निराशा हाथ लगी थी। इसके बाद उन्होंने एनसीएलएटी का दरवाजा खटखटाया। अपीलीय पंचाट ने 18 दिसंबर के अपने फैसले में टाटा संस को मिस्त्री को कार्यकारी चेयरमैन के पद पर बहाल करने का आदेश दिया। 

टाटा संस ने उच्चतम न्यायालय से उसकी याचिका पर तुरंत सुनवाई का अनुरोध करते हुए कहा कि एनसीएलएटी के आदेश को खारिज करने की जरूरत है क्योंकि टाटा संस के निदेशक के तौर पर मिस्त्री की कारगुजारियों से टाटा संस बोर्ड की निष्ठा और हितों को खतरा पैदा हो गया था। टाटा संस ने कहा कि टाटा समूह से हटाए जाने के बाद मिस्त्री ने कई ऐसे कदम उठाए जिनसे टाटा समूह के हितों को नुकसान पहुंचा।

मिस्त्री द्वारा टाटा संस के निदेशक मंडल को भेजे गए गोपनीय ईमेल को जानबूझकर लीक किया गया और मिस्त्री की पहल पर बोर्ड बैठक के गोपनीय ब्योरे को सार्वजनिक किया गया। साथ ही मिस्त्री ने अवैध तरीके से आय कर अधिकारियों के साथ पत्र व्यवहार किया और टाटा संस के दस्तावेज उन्हें सौंपे। याचिका में कहा गया है कि लीक हुए ईमेल की वजह से स्टॉक एक्सचेंजों और दूसरी नियामकीय संस्थाओं ने भी टाटा की कंपनियों से जानकारी मांगी और टाटा समूह को प्रेस विज्ञप्ति जारी करनी पड़ी। 

याचिका में कहा गया है कि मिस्त्री को हटाए जाने से पहले टाटा संस की नामांकन एवं पारितोषिक समिति (एनआरसी) ने उनके बारे में अच्छी रिपोर्ट दी थी लेकिन उसकी राय पूरे टाटा संस बोर्ड का प्रतिनिधित्व नहीं करती थी। एनआरसी में केवल तीन निदेशक थे। मिस्त्री ने अपनी दलील में कहा था कि एनआरसी की अच्छी रिपोर्ट के बावजूद टाटा संस ने टाटा ट्रस्‍ट्स के न्यासियों के कहने पर उन्हें हटाया था।

टाटा संस में टाटा ट्रस्ट्स की 66 फीसदी हिस्सेदारी है और टाटा संस के बोर्ड में उसके तीन प्रतिनिधि थे जिनके पास वीटो पावर है। मिस्त्री को हटाने में अहम भूमिका निभाने वाले टाटा ट्रस्ट के न्यासियों के बारे में टाटा संस ने कहा कि उनके नामित निदेशक कभी भी टाटा की कंपनियों के प्रभारी नहीं थे। 

टाटा संस का प्रबंधन मिस्त्री के हाथों में था जो टाटा समूह की कंपनियों के चेयरमैन भी थे। ऐसा कोई सबूत नहीं है जिससे साबित हो सके कि मिस्त्री टाटा समूह की कंपनियों का नुकसान कम करना चाहते थे और टाटा ट्रस्ट्स के नामित निदेशकों ने उनकी योजना को बट्टा लगाया। इसके उलट मिस्त्री के कामकाज को लेकर सबसे बड़ा असंतोष यह था कि वह विरासत में मिली समस्याओं को दूर करने और टाटा समूह की कंपनियों में सुधार लाने के लिए कोई उचित कदम उठाने में नाकाम रहे।

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