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साल 2019 में विज्ञापनों ने बदला कलेवर

विवेट सुजन पिंटो /  January 01, 2020

उत्तर प्रदेश के रहने वाले एक बच्चे ने गूगल की वॉइस असिस्टेंट सेवा का उपयोग करके अपने पिता के लिए पटना जाने वाली ट्रेन की समयावधि को आसानी से देख लिया। वह इंटरनेट का उपयोग करने वाले ऐसे अनेक मोबाइल उपयोगकर्ताओं में से एक है जो आसानी से जानकारी तक पहुंच बनाने के लिए तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं। अब उनका पूरा परिवार किसी भी समय गूगल असिस्टेंट का सहारा ले लेता है। इससे संबंधित विज्ञापनों का भी ग्राहकों पर काफी गहरा असर पड़ता है। वर्ष 2019 में पूरे साल डेटा, मोबाइल और तकनीक ने हमारी जिंदगी के साथ साथ विज्ञापन के नजरिये को भी बदल दिया है। 

2019 ऐसा वर्ष रहा जहां ब्रांड ने अपनी आवाज बुलंद की। उन्होंने न सिर्फ अपने उत्पादों में आवाज आधारित सुविधाएं जोड़ीं बल्कि इसे विशिष्ट बिक्री प्रस्ताव (यूएसपी) के तौर पर भी पेश किया। उदाहरण के लिए, एमजी मोटर्स ने साल 2019 में हेक्टर ब्रांड के साथ अपनी बहुप्रतीक्षित कार पेश की। इसमें आवाज की मदद से 90 से अधिक काम किए जा सकते हैं। यह विशेषता कंपनी की कार बिक्री के लिए आकर्षण का केंद्र बनी और अपने विज्ञापनों में एमजी मोटर्स ने अपनी टैगलाइन 'हैलो एमजी' का भरपूर इस्तेमाल किया। तकनीक और इलेक्ट्रॉनिक ब्रांड के लिए आवाज आधारित उपाय डेटा प्रसंस्करण के साथ और अधिक कारगर साबित हुए। उदाहरण के लिए, एमेजॉन ने न सिर्फ भारत में एलेक्सा स्पीकर लॉन्च किए बल्कि कंपनी की मीडिया स्ट्रीमिंग सेवाओं में भी वॉइस असिस्टेंट का इस्तेमाल किया। स्मार्टफोन ब्रांड ऐपल, सैमसंग, श्याओमी, ओप्पो और वीवो सभी में अपने-अपने वॉइस असिस्टेंट मौजूद हैं, जो इस साल कंपनियों के विज्ञापनों में दिखाए जाने वाली अहम विशेषता बनकर उभरे। 

लाइफस्टाइल, ऑटो तथा फास्ट फूड विज्ञापनदाता जैसे डियाजियो, रॉयल एनफील्ड और केएफसी ने विज्ञापनों को अधिक प्रभावी बनाने के लिए उनमें वॉइस रिकॉग्निशन तकनीक का उपयोग किया। हाइपर कलेक्टिव के संस्थापक तथा चीफ क्रियेटिव अधिकारी केवी श्रीधर कहते हैं कि भारत में बहुत से लोग लिखने के बजाय बोलने को वरीयता देते हैं। वह कहते हैं, 'भारत जैसे बहु-भाषीय देश में आवाज आधारित सेवाएं अच्छा काम कर सकती हैं। और अगर इन्हें बेहतर तरीके से समायोजित कर दिया जाए तो ये किसी भी ब्रांड के लिए शानदार उदाहरण पेश कर सकती हैं।' आई प्रॉस्पेक्ट द्वारा जारी एक हालिया रिपोर्ट में बताया गया कि भारत में लगभग 82 प्रतिशत स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं ने किसी न किसी रूप में वॉयस-एक्टिवेटेड तकनीक का इस्तेमाल किया है। इसमें व्हाट्सऐप पर टेक्स्ट टाइप करने के बजाय आसान तरीके से वॉयस मेसेज भेजना शामिल है। रिपोर्ट में कहा गया है कि आवाज आधारित तकनीक की आवश्यकता दूसरे क्षेत्रों में भी बढ़ी है। जैसे कि गूगल पर संबंधित जानकारी खोजना या गूगल मैप का उपयोग करना। 

जिस दौर में आवाज आधारित तकनीक कंपनियों के बीच अंतर करने के लिए अहम मानक बन गया है, वहीं छोटे वीडियो भी काफी लोकप्रिय हो रहे हैं। इसके लिए चीन की कंपनी टिकटॉक को भी सराहा जा सकता है जिसके भारत में 20 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ता हैं। 

व्हाइट रिवर्स मीडिया के सह-संस्थापक और मुख्य कार्याधिकारी श्रीनिक गांधी कहते हैं, 'टिकटॉक ने भारत के छोटे शहरों में रहने वाले लोगों को एक तरह की स्वतंत्रता दे दी है।' वह कहते हैं, 'इसके चलते कंपनी के उपयोगकर्ता तेजी से बढ़ रहे हैं। लेकिन यह केवल एख हिस्सा है, दूसरी ओर मोबाइल का उपयोग करने वाली जनता के लिए बहुतायत में उपलब्ध जानकारी का समुचित उपयोग करना जरूरी है। टिकटॉक ने इस विचार को अच्छी तरह प्रस्तुत किया है और 15 सेकंड का वीडियो कभी भी, कहीं भी देखा जा सकता है। इसके चलते ब्रांड इस फॉर्मेट को अपना रहे हैं।' हाल के महीनों में फ्लिपकार्ट, मिंत्रा और स्नैपडील जैसी ई-कॉमर्स वेबसाइट और पेप्सी, लेज़, क्लीन ऐंड क्लियर आदि ब्रांड अपने ग्राहकों को लाक्षित करने के लिए टिकटॉक का उपयोग कर रहे हैं। 

विशेषज्ञ कहते हैं कि देश में इंटरनेट की पहुंच बढऩे के साथ साथ इन रुझानों में भी इजाफा होगा। हरीश बिजूर कंसल्ट्स के मुख्य कार्याधिकारी हरीश बिजूर कहते हैं, 'कुछ साल पहले लंबी अवधि के वीडियो का चलन था। उस समय इतनी अधिक मात्रा में ऑनलाइन सामग्री उपलब्ध नहीं थी। अब ऑनलाइन सामग्री बहुत अधिक हो गई है और ऐसे में छोटे फॉर्मेट वाली वीडियो कारगर होंगी।'

इस दौर में ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ा है और कुछ विशेषज्ञ इसके लिए अलग रणनीति अपनाने की सलाह देते हैं। कई ऑटो, फैशन और फर्नीचर ब्रांड ने अनुभव केंद्र स्थापित किए हैं जहां उपभोक्ताओं को ऑनलाइन उत्पाद का वास्तविक अनुभव मिलता है। श्रीधर कहते हैं कि ब्रांड बेहतर अनुभव देने के लिए प्रयासरत हैं। वह कहते हैं, 'पहले विज्ञापनों ने ब्रांड के लिए बेहतर छवि निर्माण पर काम किया और अब अच्छा अनुभव देने के लिए काम कर रहे हैं।' उम्मीद है कि वर्ष 2020 में ये सभी एक बिंदु पर आकर समायोजित हो सकें।
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