बिजनेस स्टैंडर्ड - 'अवधि ऋण में हमारा प्रदर्शन अच्छा है'
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'अवधि ऋण में हमारा प्रदर्शन अच्छा है'

बीएस बातचीत
सुब्रत पांडा, अभिजित लेले और देव चटर्जी /  01 01, 2020

बीएस बातचीत

अर्थव्यवस्था की रफ्तार सुस्त पड़ने, क्रेडिट वृद्धि के सपाट रहने और आरबीआई की एनपीए बढ़ने की चेतावनी के बीच भारतीय स्टेट बैंक के चेयरमैन रजनीश कुमार ने सुब्रत पांडा, अभिजित लेले और देव चटर्जी से बातचीत में कहा कि अर्थव्यवस्था का बुरा दौर बीत चुका है और पूंजीगत खर्च के चक्र को बहाल करने की जरूरत है। पेश हैं संपादित अंश: 

आप देश की आर्थिक स्थिति को किस तरह देखते हैं?

बिजनेस स्टैंडर्ड मुझे लगता है कि अर्थव्यवस्था अपने बुरे दौर से बाहर आ चुकी है और अब इसमें सुधार आना चाहिए। वित्त वर्ष 2020 की तीसरी तिमाही अच्छी रही है। दुनिया में उथलपुथल चल रही है और सभी बड़ी अर्थव्यवस्थाएं इससे जूझ रही हैं। इससे हमारा निर्यात भी प्रभावित हो रहा है। लेकिन घरेलू मोर्चे पर निजी क्षेत्र में पूंजीगत खर्च के च्रक्र की बहाली सबसे अहम चीज है। बुनियादी ढांचे के उन्नयन के साथ ऐसा हो सकता है। 

कॉरपोरेट उधारी में आपका प्रदर्शन कैसा है?

कार्यशील पूंजी का उपयोग अभी सुस्त है और मार्च से कम है। दूसरी ओर हमने सावधि ऋण की श्रेणी में अच्छा प्रदर्शन किया है। दिसंबर तक एसबीआई के सावधि ऋणों में पिछले साल के मुकाबले 16 फीसदी की बढ़त हुई है और यह 1.72 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है। पिछले साल हमारे लिए असाधारण परिस्थिति थी क्योंकि हमने दूसरी छमाही में व्यापक पैमाने पर कर्ज का वितरण किया था। इस वर्ष वैसी ही स्थिति है जैसी पहले होती थी। घरेलू बाजार में हमारी उधारी पिछले साल की तुलना में 40,000 करोड़ रुपये कम है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय बैंकिंग ग्रुप में हमारा प्रदर्शन अच्छा रहा है। 

7 जून के परिपत्र के तहत इंटर-क्रेडिटर एग्रीमेंट (आईसीए) ढांचे के बारे में आपका क्या कहना है?

कुल 34 खातों में आईसीए पर हस्ताक्षर किए गए हैं। अगर हम दीवान हाउसिंग फाइनैंस (डीएचएफएल) को छोड़ दें तो हमें उम्मीद है कि जनवरी-मार्च तिमाही में हमें परिसंपत्ति गुणवत्ता के मोर्चे पर कोई चौंकाने वाली बात देखने को मिलेगी। इन 34 खातों में से 21 खाते पहले से ही गैर निष्पादित आस्तियां (एनपीए) हैं और फंसे कर्ज का एक बड़ा हिस्सा हैं। इन खातों में एसबीआई का 57,000 करोड़ रुपये और पूरे बैंकिंग क्षेत्र का करीब 2 लाख करोड़ रुपये का निवेश है। 

क्या आईसीए काम कर रहा है?

इसमें कोई दिक्कत नहीं है। हमें लगता है कि छह-सात महीने में किसी कंपनी का समाधान निकालना मुश्किल है। इसलिए आईसीए को सही ढंग से काम करने के लिए कम से कम नौ-दस महीने का समय दिया जाना चाहिए। लेकिन अगर निर्धारित समय में समाधान नहीं होता है तो हम सभी कंपनियों को एनसीएलटी में नहीं भेज सकते हैं। अब बैंक इस बात पर विचार कर रहे हैं कि अगर किसी कंपनी को एनसीएलटी में भेजा जाता है तो उसकी कितनी वसूली होगी।

क्या आपको लगता है कि आईबीसी सफल रहा है?

एस्सार स्टील के फैसले के बाद मैं आईबीसी को लेकर बेहद संतुष्ट हूं। विदेशी निवेशक भी वापस आएंगे। हमने देखा है कि एस्सार स्टील में आर्सेलर मित्तल की तरफ से 42,000 करोड़ रुपये से अधिक का विदेशी प्रत्यक्ष निवेश आया है। यह अर्थव्यवस्था और बैंकिंग क्षेत्र के लिए सकारात्मक खबर है क्योंकि कंपनी में और निवेश आएगा। रतन इंडिया के मामले में भी विदेशी निवेशकों ने दिलचस्पी दिखाई है। कई कंपनियों का समाधान हो रहा है। दिसंबर में ही चार कंपनियों एस्सार स्टील, रुचि सोया, प्रयागराज पावर और रतन इंडिया का समाधान हुआ है। जेपी इन्फ्राटेक का मामला भी मार्च तक सुलझने की संभावना है। इसके अलावा भूषण पावर ऐंड स्टील, आलोक इंडस्ट्रीज और रिलायंस कम्युनिकेशंस का भी समाधान हो सकता है। आईबीसी के तहत रिकॉर्ड संख्या में मामले दायर किए गए हैं। 

क्या एनबीएफसी की परिसंपत्ति गुणवत्ता की चिंता दूर हो गई हैं?

मुझे लगता है कि यह सही है। मुझे तत्काल किसी चूक या खतरे का अंदेशा नहीं है। यह सही है कि एनबीएफसी का रियल एस्टेट क्षेत्र में अच्छाखासा निवेश है। जो रियल एस्टेट डेवलपर फ्लैटों को रोककर रखे हुए थे, वे अब उन्हें बेचने की कोशिश कर रहे हैं। इससे सभी जगह रियल एस्टेट की कीमतों में कमी आई है। राष्टीय राजधानी क्षेत्र में कई समस्याएं हैं लेकिन बेंगलूरु, हैदराबाद और चेन्नई में ऐसा नहीं है।  इसलिए यह सही है कि बड़ी संख्या में फ्लैट बिके नहीं हैं लेकिन यह समस्या नई नहीं है। अब नई रियल एस्टेट परियोजनाओं की संख्या कम हो गई है और कुछ तैयार फ्लैट भी बिक रहे हैं। इससे मांग और आपूर्ति की समस्या में ठहराव आएगा। इस क्षेत्र पर नजर रखने की जरूरत है। साथ ही कई ऐसी परियोजनाएं हैं जो पूरी होने के करीब हैं जिनके लिए सरकार ने रियल्टी फंड मुहैया कराया है।  

क्या आप मुद्रा ऋण पोर्टफोलियो से चिंतित हैं?

मुद्रा ऋण पोर्टफोलियो हमारे लोन बुक का 1.1 फीसदी है। इस तरह अगर इस श्रेणी में 10 फीसदी एनपीए भी होगा तो इससे हम पर बहुत फर्क नहीं पड़ेगा। डीएचएफएल जैसे खातों से हम पर असर पड़ेगा क्योंकि अचानक 10,000 करोड़ रुपये का ऋण एनपीए बन जाएगा।
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