बिजनेस स्टैंडर्ड - सौर ऊर्जा पंप से बदली किसानों की जिंदगी
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सौर ऊर्जा पंप से बदली किसानों की जिंदगी

ज्योति मुकुल /  12 31, 2019

जगदीश प्रसाद यादव के लिए सूरज कभी अस्त नहीं होता। वह तीन भाइयों में अकेले ऐसे शख्स हैं जो खेती से जुड़े हैं और अपनी 4.5 हेक्टेयर जमीन पर साल भर कड़ी मेहनत करते हैं। खेती के नए तरीके  के बारे में जानने और सीखने को लेकर उनमें काफी दिलचस्पी है। वह किसानों की बैठक में नियमित तौर पर हिस्सा लेते हैं।

बेहद उत्साह के साथ वह कहते हैं, 'मैं हम सबकी सेल्फी लेता हूं। इस फोटो को मैं अपने किसानों के व्हाट्सऐप ग्रुप में डालूंगा और आपके यहां आने के बारे में सबको बताऊंगा।' वह अपने पॉलिहाउस से बाहर निकलते हैं जहां वह संकर खीरा उगाते हैं। इस संकर खीरे को शहर के वेंडर 'चाइनीज खीरा' कहते हैं। पॉलिहाउस पॉलिथीन से बना एक घर होता है जिसका इस्तेमाल खास किस्म के कृषि उत्पादों की खेती के लिए किया जाता है। 0.4 हेक्टेयर के इस पॉलिहाउस में सलाद की दो सब्जियों की खेती से उन्हें 16 लाख रुपये मिले हैं। 

राजस्थान में पॉलिहाउस बनाने के लिए 70 फीसदी सब्सिडी दी जाती है लेकिन इसकी शर्त यह है कि इसके लिए किसानों को अपने खेत में छोटे पैमाने वाली सिंचाई का तरीका अपनाना होगा। अगर खेती की जमीन 0.5 हेक्टेयर से अधिक है तब तालाब तैयार कर बारिश का पानी संग्रह कर सिंचाई करने के लिए अलग से सब्सिडी दी जाती है और यह फव्वारा, छिड़काव वाली सिंचाई और पलवार (सूखी जमीन को नम बनाना) से अलग होती है।

सब्सिडी का फायदा पाने के लिए किसानों को सूक्ष्म स्तर की सिंचाई करना जरूरी है। जयपुर जिले की चौमू तहसील के इटावा भोपजी गांव के यादव एक मॉडल किसान हैं और उन्होंने इस साल खेती की पैदावार बढ़ाने के लिए ऐसी योजनाओं का लाभ लिया है। उनका एक सुझाव भी है, 'सरकार को यह अनुमति देनी चाहिए कि सौर जल सिंचाई पंप से मिलने वाले थ्री फेज बिजली कनेक्शन को सिंगल फेज में बदला जाए ताकि घर के लिए भी बिजली मिल सके। इससे मेरे घर के बिजली बिल में भी कमी आएगी।'

राजस्थान में सौर ऊर्जा से संचालित होने वाले 44,242 सिंचाई पंप हैं जबकि हरियाणा में ऐसे 3,542 पंप हैं। दोनों ही राज्यों में सूर्य का प्रकाश ज्यादा मिलता है और इन राज्यों में ऐसे पंप के लिए सब्सिडी दी जा रही है। लेकिन इस सब्सिडी का लाभ पाने के लिए सिंचाई के लिए इन किसानों के पास ग्रिड कनेक्शन नहीं होना चाहिए। हालांकि किसान अपने रिश्तेदारों के नाम पर भी इस तरह के सोलर कनेक्शन ले लेते हैं।

हरियाणा का महेंद्रगढ़ जिला राजस्थान के झुंझुनूं की सीमा से लगता है और यहां के एक गांव देरोली अहीर के 81 वर्षीय राम प्रसाद के सामने कुछ बुनियादी चुनौतियां हैं। उन्हें अपने खेत में लगे सोलर प्लेट के नीचे ही सोना होता है क्योंकि यहां चोरी की समस्या ज्यादा है। वहीं दूसरी तरफ राजस्थान के ज्यादातर किसानों के घर खेत में हैं और वहीं सौर पंप भी लगा है जबकि महेंद्रगढ़ में खेत घरों से दूर हैं। ठंड की वजह से कांपती आवाज में प्रसाद कहते हैं, 'क्या आप बिजली विभाग से कह सकती हैं कि हमें इन सोलर प्लेट को छत पर लगाने की अनुमति मिले।

इससे हमें आवारा पशुओं और चोरों की चिंता से राहत मिलेगी।' हरियाणा सरकार के दिशानिर्देश के तहत ऑफ ग्रिड सोलर वॉटर पंपिंग सिस्टम, किसानों, गौशाला, पानी का इस्तेमाल करने वाले संगठनों और समुदाय या क्लस्टर आधारित सिंचाई व्यवस्था के लिए 75 फीसदी सब्सिडी (राज्य और केंद्रीय आवंटन) के साथ मिलती है। 

कैसी है योजना 

केंद्र जल्द ही प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान (पीएम कुसुम) शुरू करेगा जिसके तहत उन क्षेत्रों में सौर ऊर्जा संचालित सिंचाई व्यवस्था पर जोर दिया जाएगा। हालांकि राजस्थान और हरियाणा में ज्यादातर वितरण कंपनियां ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली इस्तेमाल में थ्री फेज और सिंगल फेज कनेक्शन में अंतर करती हैं। राजस्थान सरकार में प्रधान सचिव (बिजली) कुंजी लाल मीणा कहते हैं, 'थ्री फेज कनेक्शन के लिए हम एक दिन में छह या नौ घंटे तक की बिजली देते हैं। सिंगल फेज के लिए हम पूरे दिन बिजली देने की कोशिश करते हैं। इससे फीडर को अलग करने की लागत बचती है।' राज्य में उदय योजना के तहत 1,300 फीडर का लक्ष्य है। इस योजना का करीब 90 फीसदी लक्ष्य हासिल कर लिया गया है।  

कुसुम योजना में तीन अहम बिंदु हैं, पहला, विकेंद्रीकृत अक्षय ऊर्जा संयंत्र, दूसरा, सौर कृषि पानी पंप और तीसरा, ग्रिड से जुड़े खेती वाले पंपों को सौर ऊर्जा से जोडऩा। पहली योजना के मुताबिक 10,000 मेगावॉट ग्रिड कनेक्टेड सोलर या अक्षय ऊर्जा आधारित बिजली संयंत्र स्थापित करना, दूसरी योजना के मुताबिक 17.5 लाख सौर कृषि पंप और तीसरी के मुताबिक 10 लाख ग्रिड कनेक्टेड कृषि पंपों को सौर ऊर्जा से जोडऩा। दूसरी योजना पर पूरा अमल किया जाएगा और इसके लिए केंद्र 19,036 करोड़ रुपये का सहयोग दे रही है जबकि पहली और तीसरी योजना को पहले प्रायोगिक आधार पर चलाया जाएगा जिसके बाद केंद्र का कुल सहयोग 15,385.5 करोड़ रुपये तक का होगा। इन तीनों योजनाओं के जरिये वर्ष 2022 तक 25,750 मेगावॉट का लक्ष्य रखा गया है। 

राज्यों का स्थिति 

पंजाब, उत्तर प्रदेश, मध्यप्रदेश, राजस्थान और महाराष्ट्र ने पहली योजना के लिए डेवलपरों से मांग का आवेदन करना शुरू किया है। राजस्थान 3.14 रुपये प्रति यूनिट (किलोवॉट/घंटा) की दर को अंतिम स्वरूप दे रही है जिस दर पर राज्य की वितरण कंपनियां (डिस्कॉम) विकेंद्रीकृत इकाइयों की तरफ से बिजली खरीदेंगी जबकि तीसरी योजना के तहत दर 3.44 रुपये हो सकती है जिसके सौर पंप से अतिरिक्त बिजली वितरण कंपनियां खरीदेंगी। हरियाणा एक अलग व्यवस्था के तहत काम कर रहा है। यमुनानगर और करनाल जिले में दो पावर फीडर लगाए गए हैं। 

राज्य ने सौर संचालित पंप लगाने के लिए 225 करोड़ रुपये का निवेश किया है जिसका मालिकाना हक शुरुआती पांच सालों के लिए हरियाणा अक्षय ऊर्जा विकास प्राधिकरण या राज्य की वितरण कंपनियों के पास रहेगा। हालांकि केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2019 में मंजूरी दे दी थी लेकिन इसके बावजूद कुसुम की शुरुआत में देरी हुई। एनर्जी इफिशिएंसी सर्विसेज लिमिटेड ने एक बड़ी निविदा के जरिये हाल में पांच राष्ट्रीय जोन के लिए पंपसेट आपूर्तिकर्ताओं की एक सूची को अंतिम रूप दिया है। एक पखवाड़े के भीतर हरियाणा से इस योजना की औपचारिक शुरुआत होने की संभावना है। ऐसे में यादव और प्रसाद जैसे किसान जो बेहतर पैदावार के लिए अक्षय ऊर्जा का इस्तेमाल करना चाहते हैं उनके लिए बेहतर संभावनाएं बनेंगी।

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