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सड़क-ऊर्जा क्षेत्र को मिली सरकार से सौगात

मेघा मनचंदा और शाइन जैकब / नई दिल्ली December 31, 2019

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मंगलवार सड़क क्षेत्र को वर्ष 2019 के आखिरी दिन अच्छी सौगात दी। उन्होंने 19.63 लाख करोड़ रुपये की सड़क परियोजनाओं की घोषणा की। इन परियोजनाओं में केंद्र एवं राज्यों की 39-39 फीसदी और निजी क्षेत्र की 22 फीसदी परियोजनाएं शामिल हैं। फीडबैक इन्फ्रा के चेयरमैन विनायक चटर्जी ने कहा, 'यह अच्छा है कि सरकार अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए बुनियादी ढांचे पर जोर दे रही है।' सरकार ने बुनियादी ढांचा विजन 2025 में सुदूरवर्ती इलाकों को सड़क मार्ग से जोडऩा एवं एक्सप्रेसवे के जरिये ट्रंक कनेक्टिविटी, प्रमुख आर्थिक गलियारे, रणनीतिक क्षेत्र और पर्यटन स्थल आदि शामिल हैं। 

रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अपने बयान में कहा, 'भारत के बुनियादी ढांचे में निवेश अत्यधिक बढऩे के आसार हैं क्योंकि अगले पांच वर्षों (वित्त वर्ष 2020 से वित्त वर्ष 2025) के दौरान 105 लाख करोड़ रुपये खर्च करने का लक्ष्य रखा गया है।' ऐसे समय जब आर्थिक वृद्धि घट रही है, तब बुनियादी ढांचे में निवेश बढ़ाने से वृद्धि में तेजी आ सकती है। भारतमाला परियोजना के तहत राष्ट्रीय राजमार्गों के लिए पहले से ही एक पड़ी विकास योजना पर काम चल रहा है। वहीं बहुत से राज्य भी बड़ी सड़क विकास परियोजनाओं पर काम कर रहे हैं। इसी रेलवे में रेलवे लाइनों के अपग्रेडेशन पर नियमित पूंजीगत व्यय के अलावा रेल स्टेशनों के आधुनिकीकरण और बुलेट ट्रेन परियोजना के चलते अगले पांच वर्षों में बड़ी पूंजीगत खर्च होने का अनुमान है। 

वित्त वर्ष 2025 तक रेलवे क्षेत्र में 13.7 लाख करोड़ रुपये का निवेश होने की संभावना है, जिसमें केंद्र सरकार के 87 फीसदी योगदान देने के आसार हैं। इसमें निजी क्षेत्र की हिस्सेदारी 12 फीसदी और राज्यों की महज एक फीसदी है। मौजूदा रफ्तार से भारतीय रेलवे 2030 तक 50 लाख करोड़ रुपये का निवेश लाने के महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य को हासिल करने से चूक सकता है क्योंकि वर्ष 2025 तक आधे लक्ष्य को भी हासिल करना संभव नहीं होगा। भारतीय रेलवे के पूर्व वित्त आयुक्त आर शिवदसन ने कहा, 'रेलवे उन क्षेत्रों में से एक होगा, जहां निजी निवेश सबसे कम होगा।'
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