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दबाव वाली संपत्तियों के लिए एसबीआई का फंड

सुब्रत पांडा और अभिजित लेले / मुंबई December 31, 2019

देश के सबसे बड़े बैंक भारतीय स्टेट बैंक की योजना नए साल में दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए फंड पेश करने की है और बैंक संस्थागत निवेशकों से रकम जुटाने के लिए वैश्विक साझेदार को जोड़ेगा। एसबीआई के चेयरमैन रजनीश कुमार ने बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, हम अपने फंड प्रबंधन कारोबार का विस्तार कर रहे हैं। अभी समूह की फंड प्रबंधन इकाई एसबीआईकैप वेंचर्स एक रियल्टी फर्म का प्रबंधन कर रही है। वह दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए फंड लाने पर भी विचार कर रही है।

उन्होंने कहा, फंडों के प्रबंधन के लिए एसबीआईकैप वेंचर्स क्षमता सृजित कर रही है। दबाव वाली परिसंपत्तियों के फंड का आकार दबाव वाली हाउसिंग प्रोजेक्ट के लिए सरकार समर्थित ऑल्टरनेट इन्वेस्टमेंट फंड (एआईएफ) जैसा होने की संभावना है। इस फंड का आकार सांकेतिक तौर पर करीब 2 अरब डॉलर का हो सकता है।

एसबीआई कैप वेंचर्स दबाव वाली परिसंपत्तियों के लिए तभी फंड पेश कर सकती है जब उसे मजबूत अंतरराष्ट्रीय साझेदार की प्रतिबद्धता मिल जाए। इस पर बातचीत चल रही है। कुमार ने कहा, रियल्टी फंड ने हमें काफी आत्मविश्वास से भर दिया है। नवंबर 2019 में घोषित रियल्टी एआईएफ का इरादा दबाव वाली हाउसिंग परियोजनाओं के लिए आखिरी समय में जरूरी पूंजी मुहैया कराने का है। फंड पहले ही 10,530 करोड़ रुपये जुटा चुका है। भारतीय जीवन बीमा निगम और एसबीआई ने इसमें 10-10 फीसदी का योगदान किया है। चार परियोजनाओं की पहचान हो गई है और जांच परख के बाद फंड जारी किए जाएंगे।

साल 2016 में एसबीआई ने दबाव वाली परिसंपत्तियों में निवेश के लिए 1 अरब डॉलर की शुरुआती प्रतिबद्धता के साथ कनाडा की ब्रुकफील्ड ऐसेट मैनेजमेंट के साथ संयुक्त उद्यम बनाने के लिए गठजोड़ का ऐलान किया था। लेकिन यह गठजोड़ नहीं हो पाया। कुमार ने कहा, भारतीय दबाव वाली परिसंपत्तियों के बाजार और दबाव वाली परिसंपत्तियों की आपूर्ति, नियामकीय पारदर्शिता और मजबूती, अन्य वैश्विक परिसंपत्तियों में निवेश के मुकाबले ज्यादा रिटर्न की क्षमता, विदेशी पूंजी की दिलचस्पी बढ़ाने वाले कारक हैं। कुमार ने कहा, दिवालिया संहिता काफी कामयाब रही है और सर्वोच्च न्यायालय ने हर मसले को स्पष्ट किया  है। रुचि सोया और रतन इंडिया पावर का समाधान दिसंबर तिमाही में हो गया। रिलायंस कम्युनिकेशंस और आलोक इंडस्ट्रीज जैसे मामलों का समधान हो रहा है और यह मार्च-जून 2019 में पूरा हो सकता है।

भारत में लंबी आर्थिक सुस्ती परिसंपत्ति गुणवत्ता में सुधार टाल सकता है और बैंकों का एनपीए सितंबर 2019 के 9.3 फीसदी के मुकाबले सितंबर 2020 में बढ़कर 9.9 फीसदी पर पहुंच सकता है। यह जानकारी भारतीय रिजर्व बैंक की वित्तीय स्थायित्व रिपोर्ट से मिली। अन्स्र्ट ऐंड यंग के अध्ययन में अनुमान लगाया गया है कि दबाव वाली परिसंपत्ति का बाजार 150 अरब डॉलर से ज्यादा का है, जो निवेश का भारी संभावना का संकेत दे रहा है। यह विदेशी पूंजी के लिए बड़े मौके सामने रखता है, जो या तो आईबीसी के जरिये या फिर अदालत के बाहर वैकल्पिक निपटान आदि के जरिए इसमें भागीदारी कर सकते हैं। sइसके अतिरिक्त 7 जून 2019 को जारी दबाव वाली परिसंपत्तियों पर आरबीआई के संशोधित ढांचे में इससे जुड़ी कई चिंताओं का समाधान कर दिया गया है।
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