बिजनेस स्टैंडर्ड - नए साल में सुधार के कम आसार
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नए साल में सुधार के कम आसार

बीएस संवाददाता / नई दिल्ली December 31, 2019

भारतीय कंपनियों के ज्यादातर मुख्य कार्याधिकारियों (सीईओ) को नए साल में अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीद नहीं हैं। उन्हें लगता है कि 2019 में हिचकोले खाने के बाद नए साल में भी अर्थव्यवस्था की हालत खस्ता रहेगी। सीईओ के अनुसार दुनिया की शीर्ष अर्थव्यवस्थाओं में व्यापार के मोर्चे पर तनातनी से हालात और खराब रह सकते हैं और इससे भारत में मांग कमजोर रह सकती है। 

बिजनेस स्टैंडर्ड ने देश भर में दिसंबर में 50 सीईओ से बात की। इस सर्वेक्षण में 52 प्रतिशत सीईओ ने नए साल में अर्थव्यवस्था और फिसलने की आशंका जताई है। 6 प्रतिशत लोग कुछ कहने की स्थिति में नहीं थे, जबकि शेष 42 प्रतिशत लोगों का मानना था कि बुरे हालात अब बीते दिनों की बात हो चुकी है।

आरपीजी एंटरप्राइजेज के चेयरमैन हर्ष गोयनका ने कहा, 'वैश्विक स्तर पर जो हालात दिख रहे हैं उनसे तो यही लगता है कि सुधार आने में थोड़ा और समय लग सकता है। त्योहारी मौसम के कारण इस तिमाही से खासी उम्मीदें थीं, लेकिन किसी निष्कर्ष पर पहुंचने से पहले हालात में निरंतर सुधार की जरूरत है।' 

तीसरी तिमाही में भारत के सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर कम होकर मात्र 4.5 प्रतिशत रह गई। दिसंबर तिमाही में सीईओ ने जीडीपी दर कम होकर 4 प्रतिशत से नीचे रहने की आशंका जताई है। करीब 56 प्रतिशत सीईओ का मानना है कि अर्थव्यवस्था में शिथिलता चिंता का मुख्य कारण है।

सीईओ ने कहा कि खुदरा उपभोक्ता ने खर्च करना बंद कर दिया है और इससे अर्थव्यवस्था की गति प्रभावित हो रही है। उनके अनुसार वाहन एवं उपभोक्ता उत्पादों की बिक्री के कमजोर आंकड़े इस बात केपुख्ता सबूत हैं। एक बड़ी उपभोक्ता के सीईओ ने कहा, 'छोटे शहरों एवं ग्रामीण क्षेत्रों में मांग बहुत अधिक नहीं देखी जा रही है। बड़े शहरों में जरूर गतिविधियां दिखी हैं, लेकिन ये मोटे तौर पर त्योहारी मौसम तक ही सिमट कर रह गई हैं।' 

हालांकि 62 प्रतिशत सीईओ को लगता है कि 2020 में मांग में मौजूदा स्तर से तेजी आएगी। उनके अनुसार अगर आयकर दर में कमी की गई तो इससे देश में मांग बढ़ाने में मदद मिलेगी। सीईओ के अनुसार आगामी 1 फरवरी को पेश होने वाले बजट की घोषणाएं स्थिति में सुधार ला सकती हैं। एक बड़ी वित्तीय सेवा कंपनी के सीईओ ने कहा, 'व्यक्तिगत करदाताओं के लिए कर दर तर्कसंगत बनाने और कंपनियों में कर अधिकारियों का खौफ कम करने जैसे उपाय प्रावधान बजट में होने चाहिए। बजट में निवेश में दोबारा तेजी लाने के उपायों का भी जिक्र होना चाहिए। 

सीईओ ने कहा कि हाल के महीनों में कर अधिकारियों ने दिसंबर तिमाही में कई बार कर की मांग की है और कुल मांग का 20 प्रतिशत हिस्से का भुगतान उन्हें तत्काल करने के लिए कह रहे हैं। एक सीईओ ने कहा, 'कर विभाग को लगता है कि 20 प्रतिशत भुगतान मिलने से उसे अपने लक्ष्य पूरे करने में मदद मिलेगी।'

अर्थव्यवस्था को गति देने के सरकार के उपायों के बारे में पूछे जाने पर करीब 58 प्रतिशत सीईओ ने कहा कि वे इन कदमों से खुश जरूर हैं, लेकिन अतिरिक्त पहल किए जाने की दरकार है। गोयनका ने कहा, 'वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) लागू करना, रेलवे सहित बुनियादी क्षेत्र की मजबूती पर जोर, कंपनियों के लिए करों में कमी और ब्याज दरों में कमी आदि कदम अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए उठाए गए हैं।' हालांकि 40 प्रतिशत सीईओ सरकार के कदम से नाखुश हैं।

सीईओ ने कहा, 'सरकार द्वारा किए गए उपाय पर्याप्त नहीं दिख रहे हैं। देश में कारोबारी माहौल बेहतर करने की तत्काल जरूरत है, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। जीएसटी में कुछ त्रुटियां थीं, जिस वजह से उद्योग जगत के लिए हालात और बिगड़ते चले गए।'

करीब 38 प्रतिशत सीईओ को लग रहा है कि बंबई स्टॉक एक्सचेंज (बीएसई) का संवेदी सूचकांक सेंसेक्स 2020 तक 46,000 का आंकड़ा पार नहीं करेगा। केवल 16 प्रतिशत सीईओ को ही सेंसेक्स 46,000 पार करता दिखाई दे रहा है। प्रतिकूल आर्थिक हालात के बावजूद ज्यादातर सीईओ ने कहा कि वे नए साल में अधिक नियुक्तियां करने पर विचार कर रहे हैं। करीब 66 प्रतिशत ने कहा कि वे नए साल में अधिक निवेश करेंगे। करीब तीन चौथाई सीईओ ने कहा कि नए साल में भारतीय रिजर्व बैंक  बढ़ती महंगाई के मद्देनजर दरों में कटौती से परहेज करेगा। 
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