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इंटरनेट राजनीति का डिजिटल अर्थव्यवस्था पर असर

पीरजादा अबरार और रोमिता मजूमदार /  December 30, 2019

देश में समय-समय पर इंटरनेट पर रोक के कारण एमेजॉन और वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली फ्लिपकार्ट जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के भारत के कुल कारोबार में कम से कम 18 से 20 फीसदी गिरावट आई है। उद्योग के सूत्रों ने यह जानकारी दी। आम तौर पर ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए दिसंबर व्यस्तता का महीना होता है। इस समय उनके पास बड़ी तादाद में ऑर्डर आते हैं और एक दिन इंटरनेट बंद होने का बिक्री पर भारी असर पड़ता है। 

नए नागरिकता कानून के खिलाफ देशव्यापी विरोध-प्रदर्शनों के कारण देश के कई हिस्सों में मोबाइल डेटा सेवाएं स्थगित कर दी गईं औरर प्रमुख शहरों में सुरक्षा बढ़ा दी गई। इसका ई-कॉमर्स कंपनियों के कारोबार पर ऐसे समय असर पड़ा है, जब ज्यादातर ई-कॉमर्स कंपनियों की देश भर में साल के अंत की त्योहारी सेल चल रही है। ई-कॉमर्स कंपनियों ने देश के सबसे अधिक आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश, कर्नाटक के उत्तर-पूर्वी हिस्सों और दिल्ली में बिक्री में गिरावट दर्ज की है, जहां हाल में अधिकारियों ने मोबाइल इंटरनेट सेवाओं पर रोक लगा दी थी। उद्योग के एक स्रोत ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए कहा, 'यह असर बड़ा है क्योंकि ई-कॉमर्स कंपनियों (एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी) ने कारोबार में कम से कम 20 फीसदी गिरावट दर्ज की है। यह गिरावट ऐसे समय आई है, जब इन कंपनियों की त्योहारी सेल चल रही है और वे मझोले और छोटे शहरों और कस्बों में तगड़ी बिक्री की उम्मीद कर रही हैं।'  

उन्होंने कहा, 'डिजिटल भुगतान कंपनियों और बैंकों पर भी बड़ा असर पड़ा है क्योंकि उनमें भी हरेक काम के लिए इंटरनेट कनेक्टिविटी बहुत अहम है।' उद्योग के एक अन्य सूत्र ने कहा कि एमेजॉन और फ्लिपकार्ट जैसी बहुत सी ई-कॉमर्स कंपनियों ने सरकार को बताया है कि बार-बार इंटरनेट पर रोक के कारण उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। उद्योग के एक सूत्र ने नाम न प्रकाशित करने का आग्रह करते हुए कहा, 'हमें नहीं पता कि ये विरोध-प्रदर्शन कब बंद होंगे। वहीं कुछ अन्य मुद्दे भी सामने आ सकते हैं। लेकिन इंटरनेट पर रोक लगाना सबसे बेहतर समाधान नहीं है। अधिकारी इसका इस्तेमाल धारा  144 की तरह बार-बार कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'उन्हें सुरक्षा के लिए अन्य तरीके खोजने चाहिए, यह लंबे समय इस्तेमाल किया जा सकने वाला मॉडल नहीं है।'

हालांकि इन समस्याओं को अधिकारी देश में कानून व्यवस्था बनाए रखने के लिए स्वीकृत कोलेटरल डेमेज मानते हैं। दूरसंचार कंपनियां अपने लाइसेंस के नियमों के तहत इंटरनेट सेवाएं रोकने के सरकारी आदेशों का पालन करने के लिए 

बाध्य हैं। 

पिछले साल इंडियन काउंसिल फॉर रिसर्च ऑन इंटरनैशनल इकनॉमिक रिलेशंस की रिपोर्ट में अनुमान लगाया गया कि भारत में वर्ष 2012 से 2017 के बीच विभिन्न मौकों पर इंटरनेट पर रोक लगने के कारण औसतन हर घंटे 1,86,332 डॉलर का नुकसान हुआ। इसी रिपोर्ट में अनुमान जताया गया कि भारत में 16,315 घंटे इंटरनेट पर रोक के कारण अर्थव्यवस्था को आलोच्य अवधि में 3.04 अरब डॉलर का नुकसान हुआ। 

ईवाई इंडिया में पार्टनर और नैशनल लीडर (ई-कॉमर्स और कंज्यूमर इंटरनेट) अंकुर पाहवा ने कहा, 'इस डिजिटल और कनेक्टेड दुनिया में इंटरनेट लगभग एक जरूरी वस्तु बन चुका है। सेवा में अवरोध से न केवल उपभोक्ता इंटरनेट कंपनियों पर फिनटेक कंपनियों के कारोबार पर भी असर पड़ता है। इसका असर ऑफलाइन विक्रेताओं पर भी पड़ता है।'

फॉरेस्टर रिसर्च में वरिष्ठ पूर्वानुमान विश्लेषक सतीश मीना ने कहा कि इंटरनेट ने ई-कॉमर्स और डिजिटल भुगतान कंपनियों को प्रभावित किया है। मीना ने कहा, 'इसका डिजिटल अर्थव्यवस्था पर सीधा असर पड़ता है, जो यूजर्स के लिए अच्छा नहीं है। इसकी वजह यह है कि ऐसा बार-बार होता है तो यूजर इन कंपनियों (फ्लिपकार्ट और एमेजॉन) पर निर्भर रहने के बजाय अन्य विकल्प तलाशेंगे।'

देश में फ्लिपकार्ट, एमेजॉन और पेटीएम जैसी ई-कॉमर्स कंपनियों के लिए कारोबार में चुनौतियां बनी हुई हैं। भारत के ऑनलाइन खुदरा बाजार में दबदबे के लिए वॉलमार्ट अमेरिकी दिग्गज एमेजॉन को फ्लिपकार्ट के जरिये चुनौती दे रही है। वॉलमार्ट ने पिछले साल मई में 16 अरब डॉलर में फ्लिपकार्ट का अधिग्रहण किया था। जेफ बेजोस की अगुआई वाली एमेजॉन ने 2016 में भारत में पांच अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था। यह देश में अपने कारोबार का तेजी से विस्तार कर रही है। भारत में ई-कॉमर्स बाजार 2028 तक 200 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा, जो पिछले साल करीब 30 अरब डॉलर था। इंटरनेट पर रोक लगने का असर छोटे कारोबारों पर भी पड़ रहा है। 
Keyword: Flipkart, Amazon, E-Commerce, Warehouse, Logistics, internet,
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