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मजबूत रहा वाणिज्यिक रियल एस्टेट, हाउसिंग बाजार नीचे

राघवेंद्र कामत / मुंबई December 30, 2019

आवासीय रियल एस्सेट के लिए 2019 कठिन वर्षों में से एक रहा है। लंबी चली मंदी, लगातार नकदी संकट, दिवाला मामले आदि जैसी समस्याएं बनी रहीं। इसकी तुलना में वाणिज्यिक रियल एस्टेट की स्थिति अच्छी रही और कुल कारोबार व किराये में बढ़ोतरी देखी गई। 

सलाहकारों व डेवलपरों का कहना है कि अगला साल भी होम डेवलपरों के लिए खराब साबित होने की संभावना है। उनके मुताबिक कीमतें स्थिर रहेंगी और बिक्री में बहुत धीमी बढ़ोतरी होगी। बहरहाल इस दौरान ब्रांडेड डेवलपरों का प्रदर्शन बेहतर रहा है। उन्होंने बेहतीन ब्रांड, सही मूल्य और बेहतर जगहों पर परियोजनाएं पेश कीं। उन्हें उम्मीद है कि नया साल भी बेहतर रहेगा। 

2019 में लोखंडवाला इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपर्स दिवालिया हो गई। एचडीआईएल के प्रवर्तक सारंग और राकेश वधावन पीएमसी बैंक घोटाले में गिरफ्तार किए गए। विशेषज्ञों का अनुमान है कि आने वाले साल में और डेवलपर दीवालिया होंगे।

तमाम हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों (एचएफसी) ने कर्ज देना बंद कर दिया है, डीएचएफएस उनमें से एक है। तमाम और ने भी उधारी लेने वालों का भुगतान रोक दिया है, जिसकी वजह से इस क्षेत्र में संकट आ गया। भारतीय रिजर्व बैंक ने अपनी हाल की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट में रियल एस्टेट क्षेत्र में दबाव का उल्लेख किया है। इसमें कर्जदाताओं को होने वाले नुकसान का जिक्र किया गया है। एचएफसी, सार्वजनिक व निजी बैंकों क्रेडिट नुकसान जून 2019 मेंं बढ़कर 7.3 प्रतिशत हो गया, जो जून 2018 में 5.7 प्रतिशत था।  

आवास 

एनरॉक प्रॉपर्टी कंसल्टेंट के मुताबिक आवासीय रिलय एस्टेट में 2019 में 4 से 5 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज हुई और साल में करीब 2,58,000 मकान बेचे गए। इसमें कहा गया है कि 2019-20 में नई पेशकश में सालाना 18 से 20 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज हुई है, जो 2,30,000 यूनिट से थोड़ी ज्यादा है। सस्ते आवास क्षेत्र में करीब 22 प्रतिशत आपूर्ति हुई है। प्रमुख 7 शहरों में कुल 2,61,000 यूनिट की बिक्री हुई है, जो कुल बिक्री का 38 प्रतिशत है। 

जेएलएल में मुख्य अर्थशास्त्री सामंतक दास ने कहा, 'हमें नहीं लगता कि प्राथमिक आवासीय बाजार पर कोई दबाव होगा और अभी इस क्षेत्र में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज होने में एक साल और लगेंगे। तब तक वृद्धि दर में मामूली बढ़ोतरी होगी या हो सकता है कि 2018 जैसी स्थिति ही रहे।'

इस क्षेत्र में तेजी के लिए केंद्र सरकार ने कई कदमों की घोषणा की है, खासकर सस्ते आवास क्षेत्र के लिए। विशेषज्ञों का कहना है कि कुल मिलाकर बिक्री में तेजी नहीं आ रही है। 2019-20 के केंद्रीय बजट में सरकार ने कर्ज लेने वालों को ब्याज पर 1,50,000 रुपये छूट देने की घोषणआ की, जो 31 मार्च 2020 तक मिलेगी। यह 45 लाख रुपये तक का मकान खरीदने वालों को मिलनी है। इसके अलावा सस्ते आवास पर वस्तु एवं सेवा कर घटाकर 1 प्रतिशत करने व अन्य श्रेणियों पर 5 प्रतिशत कर करने की घोषणा की गई। सरकार ने रुकी हुई परियोजनाओं के लिए 25,000 करोड़ रुपये का वैकल्पिक निवेश कोष भी बनाया है।  

कार्यालय बाजार 

सीबीआरई की एक रिपोर्ट के मुताबिक ऑफिस लीजिंग 30 प्रतिशत से ज्यादा बढ़कर पहली तीन तिमाही में 4.7 करोड़ वर्गफुट हो गई, जो 2018 के शीर्ष स्तर से ज्यादा है। जेएलएल के दास ने कहा, 'को-वर्किंग सेग्मेंट ने वैश्विक रूप से कुछ व्यवधान पैदा किया है। लेकिन आपूर्ति के हिसाब से कुछ छोटे शहरों का प्रदर्शन बेहतर रहा है।' 

हैदराबाद एक उदारहण है, जहां जेएलएल के मुताबिक बेंगलूरु की तुलना में बराबर आपूर्ति रही है, जबकि बेंगलूरू देश का सबसे बढ़ा बाजार है। उन्होंने कहा कि ऐसे में बहुत कम अवधि के दौरान हम हैदराबाद जैसे शहरों में रिक्तियों में कुछ बढ़ोतरी देख सकते हैं, जहां आपूर्ति बड़ी मात्रा में होने जा रही है। 

एनरॉक के मुताबिक 2019 की पहली तीन तिमाही में सभी श्रेणी के रियल एस्टेट में वाणिज्यिक जगहों ने सबसे ज्यादा निजी इक्विटी निवेश आकर्षित किया है। यह 3 अरब डॉलर (21,400 करोड़ रुपये) रहा। 2018 में इसी अवधि के दौरान इस क्षेत्र में कुल प्रवाह करीब 2.1 अरब डॉलर था और इस तरह से इसमें 43 प्रतिशत बढ़ोतरी दर्ज की गई है। 

ब्रिटेन की सलाहकार संस्था नाइट फ्रैंक ने हाल ही में कहा कि बेंगलूरु और मुंबई सेंट्रल बिजनेस डिस्ट्रिक्ट (सीबीडी) में 2020 के दौरान कार्यालय का किराया बढऩे की उम्मीद है, जिसमें सूचना तकनीक क्षेत्र की भूमिका अहम रहेगी। तीसरी तिमाही के दौरान बेंगलूरु का सीबीडी एशिया प्रशांत के बाजारों में सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाला रहा, जहां नाइट फ्रैंक एशिया पैसिफिक प्राइम ऑफिस रेंटल इंडेक्स के मुताबिक किराये में 17.6 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दिल्ली के कनॉट प्लेस और मुंबई के बीकेसी एशिया प्रशांत के तेजी से बढ़ते प्रमुख कार्यालय बाजारों में क्रमश: 7वें और 11वें स्थान पर रहे।

ब्लैकस्टोन और उसके साझेदार एंबेसी ने इतिहास बनाया, जब उन्होंने देश के पहले रियल एस्टेट इन्वेस्टमेंट ट्रस्ट (आरईआईटी) को सूचीबद्ध कराया। एनरॉक के चेयरमैन अनुज पुरी ने कहा, '2020 में और ज्यादा वाणिज्यिक डेवलपर आरईआईटी को सूचीबद्ध कराएंगे और पूंजी जुटाने के लिए अपनी संपत्ति का मूल्यांकन कराएंगे।'  

खुदरा

हालांकि खुदरा संपत्तियों के पट्टे पर आर्थिक मंदी का असर पड़ा है, वहीं मॉल डेवलपर प्रेस्टिज इस्टेट, वर्चुअस रिटेल साउथ एशिया और इनऑर्बिट को उम्मीद है कि अगले एक या दो साल में संगठित खुदरा की हिस्सेदारी बढ़ेगी। कुल मिलाकर खुदरा लीजिंग गतिविधियां प्रमुख 7 शहरों में 35 प्रतिशत कम हुई हैं और 2018 के 55 लाख वर्गफुट की तुलना में 2019 में यह 36 लाख वर्गफुट रह गया है। एनरॉक के अनुज पुरी ने कहा, 'संगठित खुदरा की हिस्सेदारी 2019 में बढ़ी है। हालांकि कुल भारतीय खुदरा बाजार में इसकी हिस्सेदारी सिर्फ 8 प्रतिशत है, जो सरकार के हस्तक्षेपों के बाद 2020 के अंत तक 13 प्रतिशत होने की संभावना है।' 
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