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इस साल सुस्त ग्रामीण बिक्री से एफएमसीजी पर रहा दबाव

अर्णव दत्ता / नई दिल्ली December 30, 2019

नोटबंदी और जीएसटी क्रियान्वयन के लगभग दो वर्ष बाद देश के उपभोक्ता वस्तु क्षेत्र को 2019 से काफी उम्मीदें थीं। लेकिन यदि पिछले 12 महीनों के उपभोक्ता बाजार पर नजर डालें तो नकारात्मक तस्वीर सामने आती है। जहां स्मार्टफोन और एयर कंडीशनर जैसे खास सेगमेंट को कुछ राहत मिली, वहीं एफएमसीजी को 2019 में भारी दबाव से जूझना पड़ा।

 

देश के 4 लाख करोड़ रुपये के एफएमसीजी बाजार (दुनिया में चौथा सबसे बड़े) को ग्रामीण इलाकों में समस्याओं के बीच सितंबर तिमाही में बिक्री घटकर सात वर्ष के निचले स्तर पर रह जाने से कड़ी चुनौतियों से जूझना पड़ा। बाजार विश्लेषक फर्म नीलसेन से प्राप्त आंकड़ों से पता चलता है कि ग्रामीण बाजार में बिक्री वृद्घि तिमाही के दौरान घटकर महज 2 प्रतिशत रह गई, जो एक साल पहले 16 प्रतिशत थी। सात वर्षों में यह पहली बार था जब ग्रामीण बाजार में वृद्घि शहरी की तुलना में नीचे आ गई। 

जाड़े के महीनों की मंदी के बाद पारंपरिक तौर पर मजबूत अवधि समझी जाने वाली अप्रैल-जून तिमाही में ग्रामीण बाजारों में वृद्घि 2018 की शुरुआत के बाद से सबसे कमजोर रही। नीलसेन के अनुसार, फूड और पर्सनल केयर श्रेणियां मंदी की वजह से सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं। एजेंसी के अनुसार जहां कैलेंडर वर्ष 2018 में फूड एवं पर्सनल केयर की वैल्यू वृद्घि 15 और 12 प्रतिशत रही, वहीं 2019 में यह घटकर 12 प्रतिशत और 11 प्रतिशत रह गई। 

कई एफएमसीजी कंपनियों के लिए 2018 के मध्य तक ग्रामीण इलाकों में बिक्री वृद्घि शहरी बिक्री वृद्घि की तुलना में कम से कम 4 से 7 प्रतिशत तक ज्यादा थी। 2019 में भारत की कुल आर्थिक वृद्घि धीमी रही और शहरी बाजार में भी इसी तरह का रुझान देखा गया जिससे एफएमसीजी निर्माताओं की चिंता बढ़ गई। शहरी इलाकों में बिक्री वृद्घि सितंबर में घटकर 5 प्रतिशत रह गई जो 2018 की समान अवधि में 11 प्रतिशत थी।

इस बीच, भारत की जीडीपी में वृद्घि एक साल पहले के 7 प्रतिशत और जुलाई-सितंबर 2016 के 8.9 प्रतिशत से घटकर जुलाई-सितंबर 2019 में 4.5 प्रतिशत रह गई। नेस्ले से लेकर एचयूएल जैसी बड़ी एफएमसीजी कंपनियों को दबाव का सामना करना पड़ा क्योंकि उपभोक्ताओं ने खरीदारी करने से काफी हद तक परहेज किया। देश की सबसे बड़ी नॉन-सिगरेट एफएमसीजी कंपनी एचयूएल के मुख्य कार्याधिकारी संजीव मेहता ने कहा कि बड़ी गिरावट ग्रामीण इलाकों में मंदी की वजह से आई।

एडलवाइस सिक्योरिटीज के शोध के अनुसार, दो प्रमुख कारकों का 2019 में एफएमसीजी कंपनियों पर प्रभाव पड़ा। पहला, वृहद आर्थिक समस्याओं से खासकर ग्रामीण इलाकों में उपभोक्ता धारणा प्रभावित हुआ। दूसरा, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों से जुड़ा नकदी संकट बरकरार रहने से थोक और खुदरा स्तरों पर मांग प्रभावित हुई। 

इसके अलावा वर्ष की दूसरी छमाही के दौरान दूध, गेहूं और चीनी जैसी कृषि-आधारित जिंसों के महंगा होने से एफएमसीजी कंपनियों का मार्जिन प्रभावित हुआ। एडलवाइस की रिपोर्ट में कहा गया है, 'इससे नेस्ले का सकल मार्जिन सालाना आधार पर 216 आधार अंक तक घटा और ब्रिटानिया का सकल मार्जिन सपाट बना रहा।' हालांकि स्मार्टफोन और खास ड्यूरेबल श्रेणियों जैसे उपभोक्ता वस्तु खंडों ने बेहतर प्रदर्शन किया। उदाहरण के लिए, 2019 में एयर कंडीशनर की बिक्री में सुधार देखा गया। 2017 और 2018 में ऊंचे करों, रुपये में कमजोरी और जिंस कीमतों में तेजी की वजह से एयर कंडीशनर की बिक्री में कमी आई थी। 

आईडीसी इंडिया और काउंटरपॉइंट रिसर्च जैसी विश्लेषक कंपनियों के आंकड़ों से पता चलता है कि ऑनलाइन चैनल के  जरिये खेपों में सितंबर तिमाही में सालाना आधार पर 28.3 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ। कुल बिक्री में ऑनलाइन चैनल का योगदान 45.5 प्रतिशत के साथ सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर रहा। पूर्ववर्ती वर्ष में ऑनलाइन के जरिये खेपों में सालाना आधार पर 26 प्रतिशत का इजाफा हुआ था।
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