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म्युचुअल फंडों के एनएफओ पर कमीशन का असर

ऐश्ली कुटिन्हो / मुंबई December 30, 2019

इक्विटी और डेट फंड की नई पेशकश से संग्रह इस साल काफी ज्यादा घटा है क्योंकि अग्रिम कमीशन पर पाबंदी, इक्विटी बाजार की अनिश्चितता आदि के कारण नई पेशकश सीमित रही और इस कारण निवेश भी सीमित रहा।

मुख्य सूचकांक इस साल अब तक करीब 15 फीसदी चढ़े हैं, जिसकी अगुआई चुनिंदा शेयरों में बढ़त ने की। ध्रुवीकरण और मिडकैप व स्मॉलकैप शेयरों के कमजोर प्रदर्शन के कारण डायवर्सिफाइड इक्विटी योजनाओं ने खास तौर से बेहतर नहीं किया है। प्लान रुपी इन्वेस्टमेंट सर्विसेज के संस्थापक अमोल जोशी ने कहा, बाजार सहायक नहीं रहा है और कुछ चुनिंदा शेयर की चढ़े हैं। इसके परिणामस्वरूप एक साल और दो साल के एसआईपी अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रहे। अगर मौजूदा पोर्टफोलियो लाल निशान में रहता है तो निवेशक नई रकम लगाने से पहले देखो व इंतजार करो की रणनीति अपना सकते हैं।

ट्रैक रिकॉर्ड के अभाव ने नई पेशकश में कुछ को बिक्री में मदद की है, जो कई मौजूदा योजनाओं के कमजोर प्रदर्शन की पृष्ठभूमि में हुआ है। बाजार नियामक ने अग्रिम कमीशन पर पाबंदी लगाई है और प्रत्यक्ष या नकद या किसी वस्तु या किसी अन्य जरिये से निवेश के हिसाब से अग्रिम कमीशन पर रोक लगाई है। इस आदेश ने नई पेशकश पर असर डाला है, खास तौर से क्लोज ऐंडेड योजनाओं पर, जहां दिया जाने वाला कमीशन मोटे तौर पहले 5-6 फीसदी होता था।

विशेषज्ञों के मुताबिक, ज्यादातर फंड हाउस अपनी योजनाओं के पोर्टफोलियो की खाई पाटने के लिए एनएफओ की पेशकश कर रहे हैं, न कि राजस्व अर्जित करने के लिए। वितरक को जहां निवेश के हिसाब से ज्यादा कमीशन के जरिए फायदा हो रहा है, वहीं प्रोत्साहन कम है क्योंकि कोई अग्रिम कमीशन नहीं दिया जा रहा।

मॉर्निंगस्टार इन्वेस्टमेंट एडवाइजर्स इंडिया के पोर्टफोलियो विशेषज्ञ धवल कापडिय़ा ने कहा, निवेश के हिसाब से कमीशन भुगतान का मॉडल अपनाने से फंड हाउस की तरफ से रकम जुटाने पर असर पड़ा होगा। साथ ही क्लोज ऐंडेड फंड पारंपरिक रूप से मिडकैप व स्मॉलकैप क्षेत्र में पेश किए गए। मिडकैप व स्मॉलकैप में इस साल गिरावट आई है, जिससे ऐसी पेशकश के सेंटिमेंट पर असर पड़ा है।

नई इक्विटी पेशकश पर सेबी के एक योजना प्रति श्रेणी के आदेश का असर पड़ा है, जो पिछले साल लागू हुआ। खास तौर से छोटे व मझोले फंड हाउस पिछले साल से अपना प्रॉडक्ट पोर्टफोलियो पूरा करने के लिए योजनाएं पेश कर रहे हैं। सेबी ने मोटे तौर पर सभी इक्विटी योजनाओं को 10 श्रेणी में वर्गीकृत किया है। इंडेक्स फंड, एक्सचेंज ट्रेडेड फंड, फंड ऑफ फंड्स, सेक्टर/थिमेटिक फंडों की संख्या पर किसी तरह की पाबंदी नहीं है, जिसे पेश किया जा सकता है। कापडिय़ा ने कहा, ज्यादातर एएमसी के पास अब विभिन्न श्रेणियों के फंड हैं। जब प्रॉडक्ट बास्केट भर जाता है तो आप नियामक की तरफ से वर्गीकृत किसी प्रमुख श्रेणियों में कोई और फंड पेश नहीं कर सकते।

डेट की तरफ प्रॉडक्ट की पेशकश पर जोखिम का असर पड़ा है, जो आईएलऐंडएफएस घटनाक्रम के चलते है। उदाहरण के लिए फिक्स्ड मैच्योरिटी प्लान की पेशकश पर इसलिए पड़ा क्योंकि निवेशक लंबी अवधि तक अपनी रकम फंसाए नहीं रखना चाहते और वे रिटर्न के मुकाबले सुरक्षा पर ज्यादा जोर दे रहे हैं। जोशी ने कहा, कुछ एफएमपी ने समय पर रकम वापस नहीं की या कुछ घटनाक्रम के कारण उम्मीद के मुताबिक रिटर्न नहीं दिया। इससे उसका आकर्षण घटा है।

इस साल एनएफओ संग्रह में मजबूती भारत 22 ईटीएफ की दो चरणों में पेशकश और हाल में संपन्न भारत बॉन्ड ईटीएफ, देश के पहले कॉरपोरेट बॉन्ड ईटीएफ से मिली।  सामान्य तौर पर वित्तीय सलाहकार एनएफओ में निवेश की वकालत नहीं करते क्योंकि ये ट्रैक रिकॉर्ड के साथ नहीं आते। एनएफओ में निवेश तब करना ठीक होता है जब तक विशाखित पेशकश हो और फंड मैनेजर का ट्रैक रिकॉर्ड अच्छा हो।

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