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आईएलऐंडएफएस फाइ. का घाटा 13,272 करोड़ रुपये

सुब्रत पांडा / मुंबई December 30, 2019

इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैशियल सर्विसेज की वित्तीय सेवा इकाई आईएलऐंडएफएस फाइनैंशियल सर्विसेज (आईफिन) का शुद्ध नुकसान वित्त वर्ष 2019 में 13,272 करोड़ रुपये रहा जबकि इससे एक साल पहले कंपनी ने 9.5 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया था। कंपनी की सालाना रिपोर्ट से यह जानकारी मिली।

कंपनी का शुद्ध राजस्व भी वित्त वर्ष 2019 में 87.22 फीसदी घटकर 288.88 करोड़ रुपये रह गया, जो वित्त वर्ष 2018 में 2,261.93 करोड़ रुपये रहा था। इसके अलावा कंपनी ने जो कर्ज दिया था उनमें 12,429 करोड़ रुपये गैर-निष्पादित आस्तियां हो गईं और इसके लिए कंपनी ने 11,697 करोड़ ररुपये का प्रावधान किया है। मार्च 2019 में आईफिन की लोनबुक 12,945 करोड़ रुपये की थी, जिसमें से 96 फीसदी कर्ज गैर-निष्पादित आस्तियां हैं। अंडर-परफॉर्र्मिंग लोन 35.12 करोड़ रुपये का रहा जबकि मानक कर्ज 480.44 करोड़ रुपये का। मार्च 2019 के आखिर में कंपनी की देनदारी 16,635.72 करोड़ रुपये रही। आईफिन को आईएलऐंडएफएस के निदेशक मंडल ने रेड कंपनी के तौर पर वर्गीकृत किया है, जहां वह अपनी कर्ज देनदारी को पूरा करने में सक्षम नहीं है, न तो सुरक्षित कर्ज बल्कि असुरक्षित कर्ज के लिए भी। कंपनी की कुल उधारी मार्च 2019 के आखिर में विभिन्न जरिये मसलन कर्ज वाली प्रतिभूतियां, बैंक कर्ज, वाणिज्यिक प्रतिभूतियों और अंतर-कंपनी जमाओं से 14,916 करोड़ रुपये थी।

वित्त वर्ष 2019 के लिए आईफिन के बोर्ड ने बैलेंस शीट के कर्ज, प्राप्तियों, निवेश और अन्य वित्तीय परिसंपत्तियों के नुकसान को समाहित किया है, जो क्रमश: 4,798 करोड़ रुपये, 252 करोड़ रुपये और 405.1 करोड़ रुपये थे। आईफिन के सांविधिक अंकेक्षकों मुकुंद एम चैतल ऐंड कंपनी की रिपोर्ट में कहा गया है कि भारी नुकसान व देनदारी के अलावा रेटिंग में गिरावट के साथ कंपनी की रकम जुटाने की क्षमता काफी हद तक कम हुई है और सामान्य कारोबारी परिचालन काफी ज्यादा घटा है।

साथ ही कंपनी ने एनबीएफसी के तौर पर पंजीकरण का प्रमाणपत्र रखने की शर्तों का उल्लंघन किया है, जिसे आरबीआई ने जारी किया था। आईफिन ने टियर-1 व टियर-2 पूंजी के न्यूनतम अनुपात का उल्लंघन किया है। कंपनी का पूंजी पर्याप्तता अनुपात -520.29 फीसदी है। एनबीएफसी के लिए आरबीआई के नियम के मुताबिक, कंपनी को न्यूनतम 15 फीसदी पूंजी पर्याप्तता अनुपात का पालन करना जरूरी होता है।
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