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असम की अशांति को देखते हुए एमएफआईएन ने मांगी राहत

नम्रता आचार्य / कोलकाता December 29, 2019

असम और आसपास के इलाकों में भुगतान में हो रही देरी को देखते हुए माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशंस के प्रतिनिधि निकाय माइक्रोफाइनैंस इंस्टीट्यूशंस नेटवर्क (एमएफआईएन) ने भारतीय रिजर्व बैंक से भुगतान में देरी के लिए राहत की मांग की है। इसके अलावा नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) के खिलाफ चल रहे विरोध प्रदर्शन के कारण पूरे पूर्वोत्तर इलाके, उत्तर प्रदेश और पश्चिम बंगाल के कुछ इलाकोंं मेंं पुनर्भुगतान में देरी हो रही है। बहरहाल इस देरी की वजह से चूक नहीं हो रही है और एमएफआई को स्थिति सुधरने के बाद रिकवरी की उम्मीद है। 

एमएफआई ने पहले ही असम में चूक के कारण चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही में ज्यादा एनपीए की सूचना दी है। एमएफआईएन के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'हमने रिजर्व बैंक से फॉरबियरेंस के लिए कहा है क्योंकि असम के कुछ जिलों में भुगतान प्रभावित हुआ है। कुछ मामलों में जनवरी तक चूक 90 दिन की हो जाएगी।' 

असम में माइक्रोफाइनैंस का कुल पोर्टफोलियो 12,000 करोड़ रुपये के करीब का है। इसमें से करीब 40 प्रतिशत पोर्टफोलियो जानी 4,800 करोड़ रुपये ऊपरी असम में केंद्रित है, जिस इलाके में माइक्रोफाइनैंस के खिलाफ विरोध प्रदर्शन चल रहे हैं। एमएफआईएन के आंकड़ों के मुताबिक असम में एनबीएफसी एमएफआई का सकल कर्ज पोर्टफोलियो करीब 2,500 करोड़ रुपये का है। 

विलेज फाइनैंशियल सर्विसेज के एमडी और सीईओ कुलदीप मैती ने कहा, 'कुछ इलाकों में पुनर्भुगतान में देरी हो रही है, लेकिन इस देरी की वजह से पीएआर 30 (पोर्टफोलियो ऐट रिस्क बियॉन्ड 30 डेज) पर असर नहीं होगा।' सीआरआईएफ हाई मार्क की हाल की एक रिपोर्ट के मुताबिक माइक्रोफाइनैंस क्षेत्र के लिए क्रेडिट ब्यूरो वित्त वर्ष 2019-20 की दूसरी तिमाही में विलंब का स्तर पहली तिमाही के स्तर से ज्यादा रहा।  पीएआर 1-30 (कर्ज के भुगतान में 1 से 30 दिन की देरी) जून 2019 को समाप्त तिमाही में 1 प्रतिशत रहा, जबकि सितंबर 2018 के अंत में समाप्त तिमाही के दौरान यह बढ़कर 2.9 प्रतिशत पर पहुंच गया था। बहरहाल यह एक बार फिर एक प्रतिशत के स्तर से ज्यादा हो गया है और इस वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही के अंत में यह 1.3 प्रतिशत रहा। ज्यादा चिंता की बात यह है कि पीएआर 180 प्लस (जिसमें बकाया 180 दिन से ज्यादा हो गया है) 4.5 प्रतिशत के उच्च स्तर पर बना हुआ है। यह इसके पहले की तिमाही से 0.2 प्रतिशत ज्यादा है। पिछले साल की समान अवधि के दौरान यह 1 प्रतिशत से नीचे था। 

प्राकृतिक आपदा और कर्ज ज्यादा लेने जैसी वजहों से देरी हो रही है। असम में माइक्रोफाइनैंस संगठनों के खिलाफ विरोध का नेतृत्व जगराता महिला सुरक्षा समाज कर रहा है, जिसका दावा है कि राज्य में आत्महत्या के लिए माइक्रोफाइनैंस का कर्ज जिम्मेदार है। ध्यान देने की बात है कि एमएफआई सेग्मेंट मेंं इस समय बैंकों की भूमिका प्रमुख हैं। 
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