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समय बचने के साथ फास्टैग से बढ़ रहा है टोल भी

अमृता पिल्लई / मुंबई December 29, 2019

केंद्रीय सड़क मंत्रालय की ओर से लाए गए फास्टैग की मदद से राष्ट्रीय राजमार्गों पर यातायात संचालन न केवल बेहतर होने की उम्मीद है बल्कि टोल संग्रह में भी इजाफा होने की उम्मीद है। उद्योग के अधिकारी और विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि डिजिटल व्यवस्था से नहीं चुकाए जाने वाले टोल भुगतान की संख्या भी कम करने में मदद मिलेगी। 

इस कदम से न केवल और अधिक पारदर्शिता आएगी बल्कि राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण द्वारा परिचालित राजमार्गों पर काम कर रहे ठेकेदारों के साथ साथ निजी कंपनियों द्वारा टोल संग्रह छिपाने जैसी स्थिति भी समाप्त होने की उम्मीद है।डेलॉयट में पार्टनर कुशल सिंह ने कहा, 'जब आप हर चरण पर जांच करेंगे तो उससे व्यवस्था में कुछ शुद्घता आएगी। इस समय फास्टैग की पहुंच 30 फीसदी से बढ़कर 55 फीसदी हो चुकी है और एनएचएआई का कुल राजस्व 10 फीसदी ऊपर जा चुका है। इसकी एकमात्र वजह यह है कि राजस्व के इस हिस्से को बताया नहीं जा रहा था। टोल प्लाजा पर कोई वाहन बिना भुगतान के गुजर गया हो अमूमन ऐसा सुनने में नहीं आता है। इसका मतलब है कि यदि टोल नहीं मिलने की कोई बात थी तो वह जानबूझ कर की जाती थी।'

नवंबर में सड़क मंत्रालय ने कहा था कि 1 दिसंबर, 2019 से टोल प्लाजा में सड़क के दोनों तरफ एक लेन को छोड़कर सभी लेनों को टोल की फास्टैग लेन घोषित किया जाएगा। लेकिन इस समय सीमा को 15 दिसंबर किया गया। मंत्रालय का कहना है कि फास्टैग लागू करने से समय की बचत और प्रदूषण में कमी के साथ ही ट्रैफिक की आवाजाही बगैर किसी बाधा के होगी। हालांकि, एनएचएआई को तुरंत मिलने वाला लाभ केवल पैसे भर का नहीं है। 

एलऐंडटी इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट प्रोजेक्ट्स (आईडीपीएल) के लिए मुख्य कार्याधिकारी शैलेश पाठक ने कहा, 'एनएचएआई के लिए फास्टैग पहले ही ज्यादा राजस्व देने वाला साबित हो चुका है। ऐसा शायद रिसाव या टोल संग्रह की जानकारी छिपाने के मामले घटने से हुआ है।' उद्योग के सूत्रों ने कहा कि अब तक टोल की जानकारी नहीं देने की घटनाएं वाहनों को अकारण छूट देने और कुछ मामलों में कुछ लेनों पर इलेक्ट्रॉनिक निगरानी प्रणाली बंद रखने से चल रही थी।

पाठक ने कहा फास्टैग की व्यवस्था अपनाने से नकद लेनदेन पर लगने वाले शुल्क से मुक्ति मिलेगी। उन्होंने कहा, 'हमारी जैसी कंपनियों ने उपयोगकर्ता के अनुभव को बेहतर बनाया है और नकद लेनदेन में दो तिहाई की कमी की है। इस व्यवस्था से संभावित हेरफेर, नकद लेनदेन पर लगने वाले शुल्क और बीमा से छुटकारा मिलेगा।' उन्होंने कहा कि इस सुविधा के सबसे बड़े लाभार्थी आम उपयोगकर्ता हैं जो टोल प्लाजा पर बिना किसी जाम के गुजर रहे हैं। इससे उनके समय और ईंधन दोनों की बचत हो रही है। 

फिलहाल यह नहीं कहा जा सकता कि कैशलेस व्यवस्था लागू होने से न बताए जाने वाले टोल की घटनाओं की जांच की कोई गुंजाइश बन सकती है या नहीं। डेलॉयट के सिंह ने कहा, 'इस बात की जांच कौन करेगा और कैसे साबित करेगा कि अब जिन 10 अतिरिक्त वाहनों से टोल मिल रहा है, वे ही वाहन फास्टैग की सुविधा शुरू होने से पहले भी गुजर रहे थे।' 

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