बिजनेस स्टैंडर्ड - कम मांग से एनबीएफसी में सुस्ती
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कम मांग से एनबीएफसी में सुस्ती

सोमेश झा / नई दिल्ली December 29, 2019

गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों में सुस्ती की मुख्य वजह अर्थव्यवस्था में घटती मांग और बाजार की फंडिंग की अनुपलब्धता रही है। यह जानकारी आईएलऐंडएफएस संकट के बाद भारतीय रिजर्व बैंक की तरफ से हुए हालिया विश्लेषण से मिली।

आरबीआई के निगरानी विभाग की तरफ से किए गए आंतरिक विश्लेषण से पता चलता है कि बाजार और बैंकों की तरफ से एनबीएफसी को फंडों की अनुलपब्धता हर किसी के लिए नहीं थी और बाजार अच्छी व खराब इकाइयों के बीच विभेद कर रहा है।

एनबीएफसी पर मुख्य रूप से दो वजहों से दबाव है : रियल एस्टेट क्षेत्र में संकट और परिसंपत्ति-देनदारी का बेमेल।

वित्त मंत्रालय ने शनिवार को अलग से आधिकारिक आंकड़ा पेश किया है, जो इस पर जोर देने के लिए है कि एनबीएफसी और हाउसिंग फाइनैंस कंपनियों के बीच सुधार हो रहा है और अब ये स्थिर हो रही हैं। सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के प्रमुखों के साथ वित्त मंत्री निर्मला सीतारमन की अध्यक्षता में हुई बैठक में शामिल होने के बाद वित्त सचिव राजीव कुमार ने शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, बाजार बेहतर प्रबंधित और थोड़ी कम बेहतर प्रबंधित कंपनियों के बीच स्पष्ट रूप से विभेद कर रहा है। हर कोई अब सामान्यता की ओर बढ़ रहा है।

मजबूत एनबीएफसी के बीच नकदी संकट मुख्य रूप से बाजार की प्रतिभूतियों से वित्तीय सहारा न मिलने के कारण है, न कि लेनदारों की तरफ से। नियामकीय आंकड़े बताते हैं कि एनबीएफसी को बैंकों की उधारी सितंबर 2018 और सितंबर 2019 के बीच 17.5 फीसदी बढ़ी है। इनमें से 107 बड़ी एनबीएफसी को (जिनकी बाजार हिस्सेदारी करीब 67 फीसदी है) उधारी 31 फीसदी बढ़ी है। हालांकि एनबीएफसी को बाजार से मिलने वाला वित्त इस अवधि में 4.2 फीसदी बढ़ा है, जो पिछले साल की समान अवधि में करीब 30 फीसदी की रफ्तार से बढ़ा था। इस विश्लेषण से पता चलता है कि अच्छी एनबीएफसी या एचएफसी बाजार से आईएलऐंडएफस अवधि (अगस्त 2018) से पहले की उधारी दर पर रकम जुटाने में सक्षम हैं।

वित्त मंत्रालय ने शनिवार को प्रेस को दिए बयान में कहा था, आईएलऐंडएफएस के डिफॉल्ट के बाद एनबीएफसी की परिसंपत्तियां 12.8 फीसदी बढ़कर 28.3 लाख करोड़ रुपये से 31.9 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई, जिससे सरकाकर से काफी सहारा मिला। 81 फीसदी बाजार हिस्सेदारी वाली 211 बड़ी एनबीएफसी की परिसंपत्तियां 19.7 फीसदी की रफ्तार से बढ़ी है।

एचएफसी की बात करें तो विश्लेषण बताता है कि कुछ फर्मों से दबाव दूर रहा। मंत्रालय के बयान में कहा गया है कि अगस्त 2018 में आईएलऐंडएफएस संकट सामने आने के बाद 82 फीसदी बाजार हिस्सेदारी वाली 101 एचएफसी में से 76 ने परिसंपत्ति में 18 फीसदी की सकारात्मक बढ़ोतरी दर्ज की और यह सितंबर 2018 के 8.45 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर नवंबर 2019 में 10 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गई।

एचएफसी पर हालांकि कुछ असर मुख्य रूप से नौ बड़ी एचएफसी से पड़ा, जिनकी परिसंपत्ति का आकार सितंबर 2018 के 2.94 लाख करोड़ रुपये के मुकाबले 26 फीसदी घटकर नवंबर 2019 में 2.17 लाख करोड़ रुपये रह गई। भारत में कुल 101 एचएफसी हैं, जिसमें से सात ने परिचालन का लाइसेंस मिलने के बाद कारोबार शुरू नहीं किया है। परिचालन वाली 94 एचएफसी में से 76 को बैंकों, एनएचबी और बाजार से ज्यादा वित्तीय सहारा मिला है, वहीं 18 अग्रणी एचएफसी को उधारी सितंबर 2018 से नवंबर 2019 के बीच 65,595 करोड़ रुपये घटी है।
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