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बैंक समर्थित ब्रोकरों को नए क्लाइंट मिलने की आस

सुंदर सेतुरामन और जश कृपलानी / मुंबई December 27, 2019

बैंक समर्थित ब्रोकिंग हाउस को बाजार हिस्सेदारी बढऩे की उम्मीद है क्योंकि कार्वी घटनाक्रम के बाद अपने निवेश की सुरक्षा को लेकर चिंतित निवेशक अपना खाता छोटे ब्रोकिंग हाउस से उनके यहां शिफ्ट कर सकते हैं। अभी बैंक समर्तित चार अग्रणी ब्रोकिंग हाउस के पास सक्रिय क्लाइंटों का एक चौथाई है। एचडीएफसी सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी धीरज रेलि ने कहा, पिछले एक महीने में हमें नए खाते मिले हैं। कुछ ग्राहक हैं जो हमारे यहां खाते हस्तांतरित कर रहे हैं। साथ ही नए खाते भी खुल रहे हैं। उन्होंने कहा, कार्वी घटनाक्रम के बाद निवेशक वैसे ब्रोकिंग हाउस की तरफ देख रहे हैं जहां फंड की सुरक्षा को लेकर वे ज्यादा आश्वस्त हो सके। 

इस बीच, छोटे ब्रोकिंग हाउस को ज्यादा परिचालन खर्च का सामना करना पड़ सकता है क्योंकि सेबी कार्वी जैसे घटनाक्रम को रोकने के लिए नियम सख्त करने पर विचार कर रहा है। यह कहना है उद्योग के सूत्रों का। एक छोटे ब्रोकिंग हाउस के प्रमुख ने कहा, हमें अनुपालन की लागत बढऩे का अंदेशा है, जो हमारे लिए माहौल और चुनौतीपूर्ण बना देगा।

उद्योग के प्रतिभागियों ने कहा कि कार्वी घटनाक्रम ने मार्जिन फंडिंग के जोखिम को रेखांकित किया, जो कुछ ब्रोकरों के लिए आय के स्रोत के तौर पर उभरा है। एक प्रतिभागी ने कहा, कुछ मामलों में मार्जिन फंडिंग की आय में हिस्सेदारी एक चौथाई तक रही है। मार्जिन फंडिंग पर प्रतिफल 12 से 18 फीसदी तक है। हालांकि आय का यह स्रोत गैर-बैंक ब्रोकिंग हाउस के लिए समाप्त हो सकता है क्योंकि सेबी ने क्लाइंटों को मार्जिन की सुविधा देने के लिए ब्रोकरों को क्लाइंट के शेयर को जमानत के तौर पर रखने से रोकना का कदम उठाया है।

आईसीआईसीआई डायरेक्ट ने एक नोट में कहा, क्लाइंट के फंडों के प्रबंधन को लेकर सेबी की तरफ से नियमों से सख्ती से क्लाइंट के शेयरों को गिरवी रखना, ब्रोकर की तरफ से सीधी उधारी आदि समाप्त हो जाएगी। ब्रोकरों को बैंक या एनबीएफसी संग गठजोड़ करना होगा क्योंकि वे ही क्लाइंटों का शेयर गिरवी रखकर फंड मुहैया करा सकते हैं। 

धीरज रेलि ने कहा, बैंक समर्थित ब्रोकिंग हाउस जरूरत के समय कम लागत पर रकम जुटा सकते हैं और क्लाइंटों को मार्जिन की सुविधा दे सकते हैं। छोटे ब्रोकरों ने कहा कि सेबी के नए नियम के तहत जरूरी निवेशकों से अग्रिम मार्जिन (खरीद व बिक्री दोनों के लिए) से उन्हें झटका लगेगा क्योंकि वे बेहतर मार्जिन सुविधा की पेशकश वाले ब्रोकरों का विकल्प चुन सकते हैं।

ब्रोकरों ने लाभ में गिरावट के लिए नकदी वॉल्यूम में गिरावट का भी उदाहरण दिया (जो अपेक्षाकृत ज्यादा मार्जिन की पेशकश करते हैं)। रोजाना औसत कारोबार की हिस्सेदारी के तौर पर नकदी वॉल्यूम करीब दो फीसदी है और यह जानकारी आईसीआईसीआई डायरेक्ट के नोट से मिली। इस बीच, उच्च मार्जिन वाला डिलिवरी ट्रेड और घटा है और नकदी वॉल्यूम में उसकी हिस्सेदारी 10 साल के निचले स्तर के आसपास है।

साल 2014-15 में नकदी बाजार में ब्रोकरों की संख्या 5,899 थी, जो 31 दिसंबर 2018 तक 53 फीसदी घटकर 2,734 रह गई। सेबी के आंकड़ों से यह जानकारी मिली।
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