बिजनेस स्टैंडर्ड - सांघवी भारी नुकसान के कगार पर
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सांघवी भारी नुकसान के कगार पर

देव चटर्जी / मुंबई December 27, 2019

अक्षय ऊर्जा कंपनी सुजलॉन एनर्जी लिमिटेड अगले सप्ताह दिवालिया अदालत का रुख कर सकती है। इससे सन फार्मास्युटिकल इंडस्ट्रीज के अरबपति प्रवर्तक दिलीप सांघवी को भारी नुकसान हो सकता है। सांघवी ने 2014 में इस अक्षय ऊर्जा कंपनी में 1,400 करोड़ रुपये के अपने व्यक्तिगत निवेश से 23 फीसदी हिस्सेदारी हासिल की थी। सुजलॉन के प्रवर्तक तांती परिवार के बाद सांघवी को संभवत: सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।

बैंकरों ने कहा कि सुजलॉन ऋण पुनर्गठन के लिए दिसंबर के अंत तक की समय-सीमा पर खरी नहीं उतरी है। भारतीय रिजर्व बैंक के दिशानिर्देशों के अनुसार, लेनदारों ने सुजलॉन के ऋण पुनर्गठन के लिए एक क्रेडिट रेटिंग एजेंसी से अनुमोदन की मांग की थी लेकिन कंपनी उसे हासिल करने में विफल रही।

इस अक्षय ऊर्जा कंपनी के लेनदारों ने इसी साल जून में एक अंतर-ऋण समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। उसके बाद कंपनी ने एक ऋण पुनर्गठन योजना तैयार की जिसके तहत ऋण को दो श्रेणियों- स्थायी एवं अस्थायी- में बांटा गया था। हालांकि रेटिंग एजेंसी क्रिसिल ने लेनदारों को संकेत दिया कि कंपनी ऋण अदा करने में समर्थ नहीं होगी क्योंकि उसकी आय वित्तीय लागत की भरपाई करने के लिए पर्याप्त नहीं होगी।

कैलेंडर वर्ष 2019 में शुक्रवार तक सुजलॉन एनर्जी के शेयर में 64 फीसदी की गिरावट आ चुकी है और उसकी हैसियत 1,053 करोड़ रुपये की है। इस प्रकार सांघवी की हिस्सेदारी का मूल्यांकन 242 करोड़ रुपये होता है। धनाढ्य व्यक्तियों की ब्लूमबर्ग की सूची में इस साल जनवरी में सांघवी 10वें पायदान पर मौजूद थे लेकिन करीब 1 अरब डॉलर के नुकसान के साथ उनकी कुल शुद्ध हैसियत 7.3 अरब  डॉलर रह गई है। सन फार्मा के शेयर में महज 1 फीसदी की मामूली गिरावट के बावजूद सांघवी को तगड़ा झटका लगा।

एक बैंकिंग सूत्र ने कहा कि सुजलॉन को बिजली क्षेत्र की अन्य कंपनियों के साथ जनवरी के पहले सप्ताह तक ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता के प्रावधानों के तहत ऋण समाधान के लिए भेजा जाएगा। कंपनी पर भारतीय बैंकों के करीब 11,300 करोड़ रुपये केऋण बोझ तले दबी है। आरबीआई के दिशानिर्देशों के तहत बैंकों को मार्च तिमाही में इस ऋण के लिए प्रावधान करना होगा। सुजलॉन ने इस बाबत जानकारी के लिए भेजे गए ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया। सांघवी के प्रवक्ता ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से इनकार किया।

वित्त वर्ष 2013 में बैंकों ने पवन ऊर्जा क्षेत्र में सकारात्मक दीर्घावधि परिदृश्य की उम्मीद में सुजलॉन के कॉरपोरेट ऋण पुनर्गठन (सीडीआर) की प्रक्रिया शुरू की थी ताकि कंपनी को लाभप्रदता की राह पर लौटने में मदद मिल सके। सीडीआर पैकेज 28 मार्च 2013 को ऋण पुनगर्ठन समझौते पर सभी बैंकों के हस्ताक्षर होने के बाद लागू हुआ। साल 2014 तक सांघवी एक निवेशक के तौर पर सामने आए और उन्होंने 450 करोड़ रुपये के अतिरिक्त निवेश का वादा किया। साल 2015 में सुजलॉन ने जर्मनी की अपनी सहायक इकाई सेनवियन एसए को 1 अरब यूरो में सेंटरब्रिज पार्टनर्स को बेच दिया और जुटाई गई रकम का इस्तेमाल ऋण पुनर्भुगतान में किया।

 

 

 

 

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