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शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के निजीकरण को झटका

अदिति दिवेकर / मुंबई December 26, 2019

केंद्र सरकार कई साल की अनिश्चितता के बाद शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एससीआई) के निजीकरण की योजना बना रही है। लेकिन इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि यदि जमीनी स्तर पर कार्रवाई नहीं हुई अथवा उसमें देरी हुई तो  दीर्घावधि में कारोबार प्रभावित हो सकता है। शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के एक पूर्व चेयरमैन ने अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा, 'विनिवेश की खबर आते ही कंपनी में लगभग सभी तरह के निर्णय थम से गए थे। लंबी अवधि के अनुबंध वाले ग्राहकों ने नए सिरे से सोचना शुरू कर दिया है और कारोबारी स्थिति कहीं अधिक अस्तव्यत हो जाएगी।'

अप्रैल 2003 में विनिवेश पर कैबिनेट कमेटी ने शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में विनिवेश को टालने का निर्णय लिया था। लेकिन अब उस प्रक्रिया को दोबारा शुरू किया गया है। सरकार ने विदेशी कंपनियों को पूरी 51 फीसदी हिस्सेदारी के अधिग्रहण की अनुमति दे रही है।

शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया में प्रवर्तक हिस्सेदारी 30 सितंबर के अनुसार 63.75 फीसदी थी।  शेष 36.25 फीसदी हिस्सेदारी आम शेयरधारकों के पास है। पूर्व चेयरमैन ने कहा, 'यह कोई पहला अवसर नहीं है जब शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने विनिवेश योजना की घोषणा की है। इससे पहले 2003 में सभी निर्णय आभासी तौर पर रुक गए थे। इस प्रकार की देरी से लंबी अवधि में कंपनी को नुकसान होगा। सरकार को इस पर गौर करने की जरूरत है।'

कंपनी की वेबसाइट के अनुसार, फरवरी 2019 में उसके बेड़े में 60 जहाज शामिल थे। उसके पास टैंकर, बल्क कैरियर, लाइनर और ऑफशोर आपूर्ति उपलब्ध है। इंडियन नैशनल शिपओनर्स एसोसिएशन के मुख्य कार्याधिकारी अनिल देवली ने कहा, 'विनिवेश चर्चा के दौरान आमतौर पर जहाजों की खरीद एवं बिक्री प्रभावित होती है क्योंकि निवेश निर्णय काफी प्रभावित होता है।'

गेल इंडिया के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा कि जहाजरानी सेवाओं के बंधन के लिए शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया के साथ उनकी कंपनी का अनुबंध अभी जारी है। उन्होंने कहा, 'इससे पहले हमने नामांकन आधार पर इस राष्टï्रीय जहाजरानी कंपनी के साथ अनुबंध किया था। लेकिन इसके निजीकरण होने पर कंपनी को किसी अन्य निजी जहाजरानी कंपनी के तौर पर देखा जाएगा।'

वित्त वर्ष 2018-19 के अंत में कंपनी के पास महज 95 करोड़ रुपये की नकदी एवं नकदी समतुल्य परिसंपत्ति थी जबकि वैश्विक आर्थिक मंदी की शुरुआत से पहले 2006-07 में यह आंकड़ा 2,625 करोड़ रुपये रहा था। वित्त वर्ष 2015 में सुदृढ़ीकरण के बाद उसके नकदी एवं नकदी समतुल्य परिसंपत्तियों में गिरावट आई है। विनिवेश योजना से कंपनी का कामकाज प्रभावित हुआ है। कंपनी के एक वरिष्ठï अधिकारी ने कहा, 'हमारे लिए कारोबार सामान्य है। हमारा बेड़ा भी आईएमओ 2020 के लिए तैयार है।' 

कंपनी के प्रवक्ता ने इस बाबत जानकारी के लिए भेजे ईमेल का कोई जवाब नहीं दिया। सरकार ने इस रणनीतिक बिक्री के लिए आरबीएसए को लेनदेन सलाहकार नियुक्त किया है। पिछले सप्ताह सरकार ने एचके जोशी को कंपनी का पूर्णकालिक चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक नियुक्त करने की भी घोषणा की थी। उद्योग के अधिकारियों ने बताया कि कंपनी वीएलसीसी यानी वेरी लार्ज क्रूड कैरियर और एलएनजी यानी तरलीकृत प्राकृतिक गैस श्रेणियों में मौजूद है जो कारोबार के लिहाज से अच्छा है। इसके अलावा इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन और भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन जैसी कंपनियों के साथ शिपिंग कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की दीर्घावधि अनुबंध है।
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