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बैंक की उधारी वृद्घि औंधे मुंह गिरी

सुब्रत पांडा और अभिजित लेले / मुंबई December 26, 2019

अर्थव्यवस्था में नरमी आने से बैंक द्वारा दी जाने वाली उधारी वृद्घि की रफ्तार भी सुस्त हो गई है। रेटिंग एजेंसी इक्रा ने अपने आकलन में कहा है कि कंपनियों द्वारा कार्यशील पूंजी की जरूरत कम होने और ऋणदाताओं द्वारा जोखिम से बचने की वजह से वित्त वर्ष 2020 में बैंकों की उधारी वृद्घि 6.5 से 7 फीसदी रही। 

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6 दिसंबर, 2019 तक बैंक उधारी महज 80,000 करोड़ रुपये बढ़ी जबकि वित्त वर्ष 2019 में इसी अवधि में 5.4 लाख करोड़ रुपये और वित्त वर्ष 2018 (दिसंबर 2017 तक) में 1.7 लाख करोड़ रुपये का कर्ज आवंटित किया गया था। बैंकरों का कहना है कि निजी निवेश एक तरह से थम जाने से कंपनियों की ओर से उधारी मांग सीमित हो गई। चालू वित्त वर्ष की दूसरी छमाही में गतिविधियां थोड़ी तेजी जरूरत हुई हैं लेकिन पूरे साल की नरमी की भरपाई करने में वह सक्षम नहीं है। कंपनियां दबाव में हैं और खुदरा क्षेत्र में भी उतनी तेजी नहीं है कि इस कमी की भरपाई कर सके।

इक्रा के आकलन के अनुसार 37 अधिसूचित वाणिज्यिक बैंकों की उधारी वृद्घि सितंबर 2019 तक सालाना आधार पर 7.9 फीसदी बढ़ी। इनमें भी सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की उधारी में 4.4 फीसदी का इजाफा हुआ जबकि निजी क्षेत्र के बैंकों ने इस दौरान उधारी देने में 15 फीसदी की वृद्घि दर्ज की। भारतीय स्टेट बैंक के प्रबंध निदेशक दिनेश खारा ने कहा, 'आर्थिक वृद्घि में नरमी से निजी क्षेत्र के निवेश और खपत पर असर पड़ा है। इससे चालू वित्त वर्ष में उधारी वृद्घि में भी कमी आई है। हालांकि अगले वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही से स्थिति में सुधार आने की उम्मीद है क्योंकि अर्थव्यवस्था में मांग को बढ़ाने के लिए कई उपाय किए गए हैं।'

वित्त वर्ष 2019 में बैंक उधारी वृद्घि 12 लाख करोड़ रुपये रही जबकि वित्त वर्ष 2018 में यह 6.5 लाख करोड़ रुपये था। वित्त वर्ष 2019 में काफी वृद्घि देखी गई जो गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) और आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) की वजह से हो सकती है। आईएलऐंडएफएस संकट के बाद एनबीएफसी अपनी वित्तीय जरूरतों के लिए बैंकों से संपर्क साधा था। इक्रा ने कहा कि वित्त वर्ष 2020 की दूसरी छमाही में बैंक की उधारी 6.5 से 7 लाख करोड़ रुपये बढ़ सकता है जो सालाना आधार पर 40 से 45 फीसदी  कम रहेगा।  

इंडियन बैंक्स एसोसिएशन (आईबीए) के मुख्य कार्याधिकारी वीजी कन्नन ने कहा, 'मांग कम होने से कई कंपनियों ने अपना उत्पादन घटा दिया है। इससे उनकी कार्यशील पूंजी की जरूरत भी कम हो गई है। इसके साथ ही जिनके पास नकदी है वे पुराने कर्ज को चुकाना पसंद कर रहे हैं।'

इक्रा ने कहा, 'सेवा क्षेत्र में एनबीएफसी की उधारी बढ़ी है। हालांकि कारोबार से जुड़ी उधारी और अन्य सेवाओं (आवास वित्त आदि) में उधारी मांग कम हुई है। खुदरा ऋण के हिस्से में वृद्घि मुख्य रूप से बैंकों द्वारा एनबीएफसी और आवास वित्त कंपनियों के खुदरा ऋण पोर्टफोलियो खरीदने की वजह से हुई है।' 6 दिसंबर, 2019 तक जमा में वृद्घि बढ़कर 5.3 लाख करोड़ रुपये रह गई जो वित्त वर्ष 2019 की समान अवधि में 4.6 लाख करोड़ रुपये थी।

इक्रा के अनुसार, कुल जमा आधार सालाना आधार पर 10.3 फीसदी बढ़कर 6 दिसंबर, 2019 तक बढ़कर 131.1 लाख करोड़ रुपये रहा। तंत्र में मुद्रा के चलन में कमी, डेट म्युचुअल फंडों के प्रबंधन वाली संपत्तियों में कम वृद्घि के साथ ही कंपनियों के पास अधिक नकदी की वजह से जमा में वृद्घि हुई है। इक्रा के अनुसार सालाना आधार पर जमा वृद्घि वित्त वर्ष 2020 में 8.4 से 9 फीसदी रहने की उम्मीद है, जो उधारी में वृद्घि से अधिक है लेकिन यह वित्त वर्ष 2019 के 10 फीसदी से कम है।

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