बिजनेस स्टैंडर्ड - अपरिपक्व विचार
 Search  BS Hindi  Web   BS E-Paper|      Follow us on 
Business Standard
Monday, January 20, 2020 01:51 PM     English | हिंदी

होम

|

बाजार

|

कंपनियां

|

अर्थव्यवस्था

|

मुद्रा

|

विश्लेषण

|

निवेश

|

जिंस

|

क्षेत्रीय

|

विशेष

|

विविध

|

अर्थनामा

 
होम विशेष खबर

अपरिपक्व विचार

संपादकीय /  December 25, 2019

नीति आयोग इस बात पर विचार कर रहा है कि प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों मसलन मांस, मछली, मुर्ग और अंडों को सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के माध्यम से वितरित किया जाए। यह अपरिपक्व विचार है। दस में से चार बच्चे अल्प पोषण की समस्या से जूझ रहे हैं, ऐसे में प्रोटीनयुक्त खाद्य पदार्थों को बढ़ावा देने की आवश्यकता से इनकार नहीं किया जा सकता है। परंतु तेजी से खराब होने वाली इन वस्तुओं का पीडीएस के व्यापक नेटवर्क के जरिये वितरण करने का विचार समझदारी भरा नहीं लगता। इन उत्पादों को लगातार ठंडा रखना होगा और देश भर की 5 लाख राशन दुकानों में इसकी व्यवस्था सुनिश्चित नहीं की जा सकती। ये दुकानें उन क्षेत्रों में भी हैं जहां बिजली की आपूर्ति ही सही नहीं है।

इन तमाम उचित मूल्य की दुकानों पर मांसाहारी भोजन रखने के लिए विशेष व्यवस्था करनी होगी जो फिलहाल वित्तीय रूप से एक बड़ा बोझ होगी और लॉजिस्टिक्स के स्तर पर भी यह प्रबंधनीय नहीं है। भोजन की गुणवत्ता के साथ किसी तरह का समझौता स्वास्थ्य पर बुरा असर डाल सकता है। इससे इस कदम का उद्देश्य ही खारिज हो जाएगा। खाद्य सब्सिडी पहले ही 1.84 लाख करोड़ रुपये (2019-20 के बजट में) से अधिक है। इन महंगे खाद्य पदार्थों को गरीबों की पहुंच में लाने के लिए इसमें भी बहुत अधिक इजाफा करना होगा। दिक्कत यह भी है कि अगर सरकार जरूरी संसाधन जुटाने में सफल हो भी जाती है तो भी कुपोषण की समस्या शायद पूरी तरह दूर नहीं होगी क्योंकि आबादी का एक बड़ा हिस्सा शाकाहारी है जो शायद नि:शुल्क देने पर भी इन उत्पादों का सेवन न करे।

दूसरी ओर ऐसे किफायती और पोषक वैकल्पिक उत्पादों की भी कोई कमी नहीं है जिन्हें पीडीएस के माध्यम से आसानी से वितरित किया जा सकता है। दालें और मोटे अनाज इसमें शामिल हैं। देश में व्यापक तौर पर उगाए जाने वाले फलीदार अनाजों को अगर गरीबों की आर्थिक पहुंच में लाया जा सके तो देश में प्रोटीन की कमी की समस्या दूर हो सकती है। उनका उत्पादन बढ़ाने की जरूरत है ताकि पीडीएस के जरिये उसका वितरण हो सके। मांसाहारी उत्पादों की तुलना में दालों के वितरण में बहुत मामूली सब्सिडी देनी होगी। मोटे अनाजों को अब पोषक अनाज कहा जाने लगा है और अपनी पोषण क्षमता की बदौलत ये भी पीडीएस में जगह के दावेदार हैं।

इनमें बाजरा, ज्वार, रागी आदि शामिल हैं जो उन सूक्ष्म पोषक तत्त्वों से भरपूर हैं जो चावल और गेहूं में नहीं मिलते। चावल और गेहूं जैसे सब्सिडी वाले अनाज की उपलब्धता के पहले ये अन्न नियमित रूप से आम लोगों के भोजन का हिस्सा हुआ करते थे। कर्नाटक के एक स्कूल में जहां बच्चों को मोटा अनाज दिया जाता था, वहां हुए एक अध्ययन ने इन अनाजों के स्वास्थवर्धक गुणों को नए सिरे से सामने रखा है। हैदराबाद स्थित इंटरनैशनल क्रॉप्स रिसर्च इंस्टीट्यूट फॉर सेमी-एरिड ट्रॉपिक्स  और एक स्वयंसेवी संगठन अक्षय पात्र द्वारा कराया गया यह अध्ययन बताता है कि मध्याह्न भोजन में चावल की जगह मोटे अनाज को शामिल किया जाए तो बच्चों की वृद्धि में 50 फीसदी तक का सुधार हो सकता है।

मोटे अनाज के स्वास्थ्यवर्धक होने के नाते दुनिया भर में उसकी लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। भारत सरकार भी उनके इस गुण से वाकिफ है। बल्कि उसने 2018 को मोटे अनाज का वर्ष भी घोषित किया था। इन फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी इजाफा किया गया ताकि उत्पादन बढ़ सके। परंतु पीडीएस के जरिये वितरण और उसके पहले सरकारी खरीद जैसी विपणन सहायता की उसे अभी भी प्रतीक्षा है। यदि नीति आयोग दालों और मोटे अनाजों का उत्पादन बढ़ाने और इनकी सहायता से कुपोषण समाप्त करने का प्रयास करे तो बेहतर होगा बजाय कि पीडीएस के जरिये पशु उत्पादों के वितरण पर विचार करने के। 
Keyword: Niti Ayog, Economy, Health Index, PDS, Fish, Mead, Egg,
Advertisements
  Cover from Earthquake & Floods. Buy Home Insurance
   Get seamless access to Business Standard & WSJ.com starting at just Rs. 49/- per month*
Display Name  Email-Id  
Post your comment

CAPTCHA Image Reload Image Enter Code*:
  आपका मत
 क्या संपत्तियों की बिक्री से पूरा होगा विनिवेश का लक्ष्य?
हां नहीं  
पढ़िये
ईमेल
About us Authors Partner with us Jobs@BS Advertise with us Terms & Conditions Contact us RSS Site Map  
Business Standard Private Ltd. Copyright & Disclaimer feedback@business-standard.com
This site is best viewed with Internet Explorer 6.0 or higher; Firefox 2.0 or higher at a minimum screen resolution of 1024x768
* Stock quotes delayed by 10 minutes or more. All information provided is on "as is" basis and for information purposes only. Kindly consult your financial advisor or stock broker to verify the accuracy and recency of all the information prior to taking any investment decision. While due diligence is done and care taken prior to uploading the stock price data, neither Business Standard Private Limited, www.business-standard.com nor any independent service provider is/are liable for any information errors, incompleteness, or delays, or for any actions taken in reliance on information contained herein.