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आईएमएफ ने वित्तीय प्रोत्साहन पर चेताया

इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली December 24, 2019

अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) ने वित्तीय प्रोत्साहन देने को लेकर भारत को चेताया है। उसने कहा है कि सरकार के पास इसके लिए सीमित गुंजाइश है। उसने कहा है कि सरकार महत्त्वाकांक्षी राजस्व अनुमान निर्धारित करने और हाल में निगम कर दरों में कटौती करने से 2019-20 के बजट में तय राजकोषीय घाटे के लक्ष्य से चूक सकती है। उसने सरकार को सुधार के उपाय करने और भारतीय रिजर्व बैंक को सुस्त पड़ती अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए मौद्रिक प्रोत्साहन देने का सुझाव दिया है।     

आईएमएफ ने कोष के आर्टिकल चार के तहत आज जारी किए गए भारत पर केंद्रित अपनी रिपोर्ट में कहा, 'अर्थव्यवस्था में व्याप्त चक्रीय सुस्ती को दूर करने के लिए मौद्रिक नीति और विस्तृत पैमाने पर वृहद संरचनात्मक सुधारों पर ध्यान देना चाहिए। नीतिगत क्षेत्र में सीमित गुंजाइश को देखते हुए राजकोषीय प्रोत्साहनों को टाला जाना चाहिए।' आईएमएफ का सुझाव ऐसे समय पर आया है जब उद्योग जगत सरकार से वित्तीय प्रोत्साहन हासिल करने के लिए दबाव बनाने का काम कर रहा है।  

कोष ने कहा कि 2019-20 के केंद्रीय बजट में राजकोषीय घाटे में कुछ कमी लाने की बात कही गई थी लेकिन बढ़ा चढ़ा कर राजस्व लक्ष्य निर्धारित करने और हाल में निगम कर दरों में की गई कटौती से बजट लक्ष्य हासिल कर पाने की संभावना बहुत कम हो गई है। बजट में कहा गया था कि 2019-20 में राजकोषीय घाटा कम होकर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 3.3 फीसदी रह सकता है जबकि एक वर्ष पहले यह 3.4 फीसदी रहा था। आंकड़ों के संदर्भ में देखें तो बजट में चालू वित्त वर्ष में घाटे को कम कर 7.03 लाख करोड़ रुपये पर रखने का लक्ष्य था जो पिछले वर्ष 6.34 लाख करोड़ रुपये था। केवल अक्टूबर महीने में ही घाटा इस लक्ष्य से दो फीसदी से अधिक हो चुका है। 

आईएमएफ ने कहा कि अर्थव्यवस्था में व्याप्त चक्रीय सुस्ती को देखते हुए हाल फिलहाल में मौद्रिक नीति को आसान किया जाना चाहिए और इसे तब तक जारी रखना चाहिए जब तक कि अनुमानित वसूली नहीं हो जाती है। रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति समिति ने चालू वित्त वर्ष में रीपो दर में 1.60 प्रतिशत अंकों की कटौती की है लेकिन अपने दिसंबर की नीति समीक्षा में इसमें और कटौती करने से परहेज किया। आईएमएफ ने कहा कि मजबूत जनादेश के साथ दोबारा सत्ता में लौटी नरेंद्र मोदी सरकार के पास सुधार के ऐसे एजेंडे पर आगे बढऩे का मौका है जिसका लक्ष्य समावेशी और सतत विकास को बढ़ावा देना हो। उसने कहा, 'एक व्यापक सुधार पैकेज की जरूरत है जो अर्थव्यवस्था को पांच साल में 5 लाख करोड़ डॉलर की बनाने के सरकार के लक्ष्य को पूरा करने में सक्षम हो।' 

उसने कहा कि मध्यावधि के लिए ऋण में कमी लाने, निजी निवेश के लिए वित्तीय संसाधनों को मुक्त करने और ब्याज के बिल को कम करने के लिए एक विश्वसनीय वित्तीय समावेशन उपाय की जरूरत है।
Keyword: IMF, MPC, RBI, Fiscal Deficit, Fiscal stimulus, Economy, Slowdown, IMF Report,
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