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कर्ज वितरण पर बैंकरों में जरूरी भरोसे का अभाव

बीएस बातचीत
निधि राय /  December 24, 2019

मॉर्गेज आवास ऋण प्रदाता एचडीएफसी में 2010 से प्रबंध निदेशक की जिम्मेदारी संभाल रहीं रेणु सूद कर्नांड ने निधि राय के साथ साक्षात्कार में इस क्षेत्र की स्थिति और नीति के बारे में विस्तार से बताया। पेश हैं उनसे हुई बातचीत के मुख्य अंश: 

आवासीय ऋण के लिए मांग कैसी है और यह किन क्षेत्रों से ज्यादा है?

मुंबई से आवास ऋण मांग में सुधार आ रहा है, पुणे और बेंगलूरु अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं, दिल्ली और चेन्नई इस संदर्भ में तुलनात्मक रूप से कमजोर हैं। अन्यथा, सभी स्थान, सभी शहर पिछले साल के मुकाबले बेहतर प्रदर्शन कर रहे हैं। नए ऋणों के लिए आवेदनों की संख्या हर जगह बढ़ी है और ज्यादातर मांग टियर-2 शहरों से 1 करोड़ रुपये से कम कीमत के मकानों और 20 से 50 लाख रुपये के बीच की कीमत के किफायती मकानों से आ रही है। 

किफायती आवास खंड कैसा प्रदर्शन कर रहा है? क्या 2020 में इसमें और तेजी आएगी?

मेरा मानना है कि इस क्षेत्र में पहले ही तेजी आ चुकी है। यदि आप प्रधानमंत्री आवास योजना (पीएमएवाई) को देखें तो पता चलेगा कि हमने महज लगभग तीन वर्षों में 140,000 से ज्यादा आवेदन दर्ज किए। ये सभी नए गृह स्वामी हैं। इसलिए पहले की तुलना में ज्यादा तेजी से लोग मकान के मालिक बन रहे हैं। 

क्या आप मानते हैं कि नॉन-इंडिविजुअल सेगमेंट में परिसंपत्ति गुणवत्ता पर दबाव बना रहेगा या फिर इसमें सुधार आएगा? क्या आप इस सेगमेंट को ऋण देने में सतर्कता बरत रहे हैं?

नॉन-इंडिविजुअल श्रेणी को लेकर हम सतर्क हैं। ऐसा इसलिए हो रहा है क्योंकि कई वजहों से बिक्री घटी है। एक साल की अवधि में, नोटबंदी, रेरा और जीएसटी सामने आए। इससे कुछ हद तक अनिश्चितता पैदा हुई और लोगों ने घर की खरीदारी टाल दी थी, क्योंकि उन्हें समय पर घर मिलते नहीं दिख रहे थे। मेरा मानना है कि हालात में सुधार के लिए हमें डेवलपरों को 6 महीने से लेकर तीन तिमाहियों तक का समय देने की जरूरत है। 

अपनी बैलेंस शीट मजबूत बनाने के लिए एचडीएफसी क्या योजना बना रही है?

बुरे वक्त के दौरान बहीखाते में अतिरिक्त नकदी रखना अच्छी बात है। इससे विकास की संभावना तलाशने के लिए भरोसा पैदा होता है, क्योंकि ऐसे समय के दौरान अच्छी परिसंपत्तियां उचित मूल्यांकन पर उपलब्ध हो सकती हैं। जैसा कि आप जानते हैं, हमने हाल में एक स्वास्थ्य बीमा कंपनी में हिस्सेदारी खरीदी है और एक शैक्षिक वित्त कंपनी में अपनी हिस्सेदारी 90 प्रतिशत से बढ़ाकर 100 प्रतिशत की है। हम अच्छे आवास वित्त पोर्टफोलियो खरीदने के लिए स्वतंत्र हैं, बशर्ते कि वे हमारे माकों के अनुरूप हों। 

रियल एस्टेट में हालात आसान बनाने के लिए क्या किया जा सकता है?

केंद्र सरकार द्वारा घोषित 25,000 करोड़ रुपये का कोष एक अच्छा कदम है, लेकिन इस सेक्टर को हालात में सुधार की भी जरूरत है। सकारात्मक बदलाव आ रहे हैं, लेकिन बिल्डरों को अभी भी रकम नहीं मिल रही है। एनबीएफसी और बैंक बिल्डरों को ऋण नहीं दे रहे हैं, क्योंकि इनसे जोखिम जुड़ा हुआ है। इसके अलावा, एनपीए (फंसे कर्ज) वर्गीकरण पर नियमन से हालात चुनौतीपूर्ण हो रहे हैं। मौजूदा समय में, आरबीआई को चाहिए कि वह पैसे के अभाव में फंसी परियोजना के संदर्भ में अतिरिक्त कोष मुहैया कराए।  

आरबीआई ने कहा है कि व्यवस्था में पर्याप्त नकदी है। तो यह जमीनी तौर पर क्यों नहीं दिख रही है? क्या आप निकट भविष्य में नकदी समस्या के समाधान की उम्मीद कर रहे हैं?

आरबीआई का यह कहना सही है कि कोई नकदी समस्या नहीं है। बैंक ऋण नहीं दे रहे हैं क्योंकि वे उधारी को लेकर डरे हुए हैं। हालांकि प्रधानमंत्री यह कह चुके हैं कि वास्तविक व्यावसायिक निर्णयों पर सवाल नहीं उठाए जाएंगे, लेकिन बैंकरों के बीच ऋण वितरण को लेकर जरूरी भरोसे का अभाव है।  

एनबीएफसी-एचएफसी क्षेत्र में क्या चुनौतियां हैं?

हम संकट की वजह से प्रभावित नहीं हुए हैं, क्योंकि हमने देयता और परिसंपत्ति, दोनों के संदर्भ में हमेशा व्यावसायिक अनुशासन पर अमल किया है। मेरा मानना है कि एनबीएफसी संकट कुछ और समय तक बना रहेगा और बैंकों द्वारा एनबीएफसी को कुछ रकम मुहैया कराए जाने से इस संकट में कमी आएगी। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि एनबीएफसी पैसा किस तरह से जुटाएं। 
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