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रात में विमानों की पार्किंग के लिए छोटे शहरों की वकालत

अनीश फडणीस / मुंबई December 23, 2019

भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) चाहती है कि एयरलाइंस अपने ज्यादा विमानों की रात मेंं पार्किंग गैर मेट्रो शहरों में करें, क्योंकि उसके अधीन आने वाले प्रमुख हवाईअड्डों की पूरी क्षमता का इस्तेमाल हो रहा है और उनके विस्तार की बहुत सीमित संभावना है। 

अगले 5 साल में भारत में विमानन कंपनियों के बेड़े का आकार 1,200 से ज्यादा विमानों का हो सकता है और भारत एक दशक में विश्व का तीसरा सबसे बड़ा उड्डयन बाजार बनने की ओर है। बेंगलूरु और दिल्ली (तीसरा सबसे व्यस्त और भारत का सबसे व्यस्त हवाईअड्डा) में जहां दो नए टर्मिनल होंगे और एयरलाइंस के लिए 2021 तक करीब 60 अतिरिक्त पार्किंग बे बन जाएंगे, वहीं एएआई द्वारा संचालित बड़े हवाईअड्डों चेन्नई, गोवा और पुणे (10 व्यस्त हवाईअड्डों में से एक) में विस्तार की संभावना नजर नहीं आती क्योंकि जमीन उपलब्ध नहीं है। 

हाल की बैठक में एएआई ने एयरलाइंस से कहा था कि  व्यस्त हवाईअड्डों की सीमित क्षमता को ध्यान में रखते हुए वे टियर-2 और टियर-3 शहरों में विमानों की रातभर की पार्किंग पर विचार करें। इस समय कोलकाता में रात को पार्किंग के लिए एक भी खाली बे नहीं है, जबकि चेन्नई में कुछ जगहें बची हैं। यहां पर टर्मिनल नहीं बन सकते, ऐसे में परिचालन को लेकर असुविधा हो रही है। निजी हवाईअड्डों में जहां बेंगलूरु और हैदराबाद में 2020 से पार्किंग सुविधा बढ़ाई जा रही है, दिल्ली और मुंबई में विमानों की रात की पार्किंग के लिए जगह शेष नहीं है। 

एएआई के एक अधिकारी ने कहा कि अबसे 2022 तक 20 हवाईअड्डों पर करीब 360 बे जोड़े जाएंगे। प्राधिकरण औरंगाबाद, भुवनेश्वर, इंदौर, गुवाहाटी, मंगलूर, मदुरै के अलावा अन्य जगहों पर बुनियादी ढांचे का उन्नयन कर रहा है। उसने एयरलाइंस को सुझाव दिया है कि वे चंडीगढ़ को आधार बनाएं, जहां कुहरे की स्थिति में भी उड़ान की सुविधा है। 

एएआई के पश्चिमी क्षेत्र ने भी मध्य प्रदेश सरकार से अनुरोध किया है कि भोपाल, इंदौर और जबलपुर में एविएशन टर्बाइन पर मूल्यवर्धित कर घटाए, जिससे वहां विमानों की रात में पार्किंग को प्रोत्साहित किया जा सके। इस तरह की पहल पिछले साल तमिलनाडु ने की थी और कोयंबटूर हवाईअड्डे पर एटीएफ पर कर घटा दिया था, जिसकी वजह से इंडिगो और जेट एयरवेज ने वहां विमानों की पार्किंग शुरू कर दी। 

वहीं विमान कंपनियों ने टियर-2 और टियर-3 शहरों में यात्रियों की संख्या कम होने को लेकर चिंता जताई और कहा कि इससे लागत में बढ़ोतरी होगी। एक निजी विमान कंपनी के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'पायलटों व क्रू के रहने की वव्यवस्था, ट्रांसपोर्ट, इंजीनिरिंग और सुरक्षा से जुड़ी अतिरिक्त लागत पर विचार करते हुए एक एयरलाइंस ोक कम से कम 4 विमान टियर-2 या टियर-3 शहरों के हवाईअड्डों पर खड़े करने होंगे।' एयरलाइंस ने यह भी कहा कि छोटे शहरों में परिचालन के घंटे सीमित हैं और इन्हें हर वक्त उड़ान के लिए खोले जाने की जरूरत है। 

एविएशन ब्लॉग नेटवर्क थॉट्स चलाने वाले अमेय जोशी ने कहा, 'पिछले कुछ साल से एयरलाइंस ने छोटे शहरों जैसे इंदौर, नागपुर, कोयंबटूर, पटना और अन्य हवाईअड्डों पर रात को पार्किंग शुरू कर दी है। आने वाले महीनों में एयरलाइंस को और विमान छोटे शहरों में खड़े करने होंगे, लेकिन यह बेड़े पर निर्भर होगा। 2020 में बेड़े में नए विमान जोड़ा जाना इस बात पर निर्भर होगा कि कितनी जल्दी बोइंग 737 मैक्स आसमान में लौटता है और कब ए320नियो इंजन से जुड़े मसले का समाधान कर लिया जाता है।'

विस्तारा के प्रवक्ता ने कहा कि एयरलाइंस के पास मार्च 2020 तक 42 विमान होंगे। कंपनी ने ए320 और बोईंग787 सहित 56 विमानों का ऑर्डर दिया है और ये विमान अगले 4 साल में बेड़े में शामिल हो जाएंगे। 

इंडिगो ने कहा कि दीर्घावधि जरूरतों को देखते हुए वह एयरपोर्टों व एएआई से लगातार संपर्क में है और उसे भरोसा है कि उनकी वृद्धि योजना में पर्याप्त बुनियादी ढांचा विकसित किया जाना शामिल है। इंडिगो ने कहा, 'एयरलाइंस मेट्रो व नॉन मेट्रो दोनों ही शहरों में पार्किंग बे का इस्तेमाल करती है और उसकी सीजनल शेड्यूल डेवलपमेंट प्रक्रिया में बे की उपलब्धता को देखते हुए अहम डिजाइन तैयार की जाती है, जिससे सभी वक्त तालमेल बिठाया जा सके।' 
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