बिजनेस स्टैंडर्ड - ओएनजीसी के नियंत्रण में पीएमटी
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ओएनजीसी के नियंत्रण में पीएमटी

शाइन जैकब / नई दिल्ली December 23, 2019

पन्ना-मुक्ता एवं ताप्ती (पीएमटी) क्षेत्रों से 4.5 अरब डॉलर के मुनाफा एवं रॉयल्टी के सरकार के दावे को लेकर जारी कानूनी लड़ाई के बीच सरकारी कंपनी ओएनजीसी ने रिलायंस इंडस्ट्रीज (आरआईएल) एवं शेल से उन क्षेत्रों का नियंत्रण हासिल कर लिया है। सरकार ने सऊदी अरामको के साथ 15 अरब डॉलर के सौदे सहित आरआईएल की हिस्सेदारी बिक्री योजनाओं पर रोक लगाने के लिए दिल्ली उच्च न्यायालय से संपर्क किया था। 

सरकार ने अपनी याचिका में कहा था कि अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता पंचाट के फैसले के तहत पीएमटी के लिए  4.5 अरब डॉलर का भुगतान नहीं किया गया है। जबकि मुकेश अंबानी के नेतृत्व वाली कंपनी ने सरकार के दावे का खंडन किया था। सूत्रों के अनुसार, मध्यस्था प्रक्रिया का अंतिम चरण 2020 के मध्य में निर्धारित है और सरकार ने एकतरफा गणना के आधार जिस रकम का दावा किया है उस पर भी विवाद है।

दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को आरआईएल से कहा था कि वह अपनी परिसंपत्तियों का खुलासा करे। इसका मतलब साफ है कंपनी को 20 फीसदी हिस्सेदारी सउदी अरामको को बेचने से पहले अपनी सभी परिसंपत्तियों को सूचीबद्ध कराना होगा। सरकार का दावा ब्रिटेन की अदालत के 2016 के फैसले पर आधारित है जिसमें रकम का उल्लेख नहीं किया गया है। कंपनियों का मानना है कि जब तक ट्रिब्यूनल रकम को निर्धारित नहीं करेगा तक तक मौजूदा स्थिति में कोई भुगतान नहीं किया जा सकता है।

पीएमटी को लेकर जारी कानूनी लड़ाई के बावजूद शनिवार की रात उसका नियंत्रण ओएनजीसी को सौंप दिया गया। इस मामले के एक करीबी सूत्र ने कहा, 'इस कानूनी लड़ाई से पीएमटी पर नियंत्रण का हस्तांतरण प्रभावित नहीं होगा क्योंकि आरआईएल और शेल दोनों इन ब्लॉकों को लौटा रही हैं। वे उन ब्लॉकों को बेच नहीं रही हैं। कुल मिलाकर सरकार की मनोनीत कंपनी उन परिसंपत्तियों को हासिल कर रही हैं।' अदालत का यह निर्देश पिछले सप्ताह हस्तांतरण समझौते पर हस्ताक्षर के बाद आया।

एक सूत्र ने कहा कि मध्यस्थता ट्रिब्यूनल उत्पादन साझेदारी अनुबंध के तहत लागत वसूली सीमा में बढ़ोतरी के संदर्भ में आरआईएल और शेल की याचिका पर सुनवाई कर सकता है। इस मामले में ट्रिब्यूनल का फैसला यदि उनके पक्ष में रहा तो सरकार के दावे में उल्लेखनीय कमी आ सकती है।

सरकार ने ट्रिब्यूनल के फैसले के तहत भुगतान के लिए कंपनी की क्षमता के बारे में चिंता जताई थी क्योंकि इन क्षेत्रों के लिए उत्पादन साझेदारी अनुबंध की समय-सीमा 21 दिसंबर को खत्म हो चुकी है। आरआईएल ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि उसकी वित्तीय स्थिति दमदार है। पन्ना-मुक्ता एवं ताप्ती संयुक्त उद्यम में आरआईएल और शेल दोनों की 30-30 फीसदी हिस्सेदारी थी। जबकि शेष 40 फीसदी हिस्सेदारी ओएनजीसी के पास थी।

Keyword: Panna, Mukta, Tapti, PMT, RIL, Reliance Industries, ONGC, Delhi High Court,
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