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आरबीआई:बिक्री से ज्यादा खरीदे बॉन्ड

अनूप रॉय / मुंबई December 23, 2019

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पहली बार एक ही साथ खुला बाजार परिचालन (ओएमओ) के तहत बॉन्ड की खरीद एवं बिक्री की। आंकड़ों के अनुसार आरबीआई ने इस दौरान बेचने के मुकाबले अधिक संख्या में बॉन्ड की खरीदारी की। आरबीआई ने 10 वर्ष की अवधि के 10,000 रुपये मूल्य तक के बॉन्ड खरीदने और इतनी ही रकम मूल्य तक के 4 छोटी अवधि के बॉन्ड की बिक्री की योजना तैयार की थी।

नीलामी के नतीजों से पता चलता है कि एक ओर केंद्रीय बैंक ने जहां 10 वर्ष की अवधि की बॉन्ड श्रेणी में पूरी खरीदारी कर ली, वहीं अगले एक वर्ष में परिपक्व होने वाले 6,825 करोड़ रुपये मूल्य के 4 छोटी अवधि के बॉन्ड की बिक्री की। इस लेनदेन के लिए बाजार की अवधि आधे घंटे तक बढ़ा दी गई। 

बाजार में ऐसी चिंता जताई जा रही थी कि छोटी अवधि के बॉन्ड की बिक्री से पर्याप्त नकदी उपलब्ध होने के बावजूद ऐसे बॉन्ड पर प्रतिफल बढ़ जाएगा जैसा कि केंद्रीय बैंक कुछ ही चाह रहा है। हालांकि बॉन्ड कारोबारियों ने कहा कि आंशिक बिक्री से छोटी अवधि की प्राप्तियों पर असर नहीं होगा। वास्तव में आरबीआई प्राप्तियों को देखकर असहज दिखा। 10 वर्ष की परिपक्वता अवधि वाले वाले बॉन्ड पर प्राप्ति 6.5462 प्रतिशत रह गई, जो कारोबार बंद होने के स्तर 6.5680 प्रतिशत से थोड़ी कम दर्ज की गई। पिछले सप्ताह ओएमओ की घोषणा से पहले 10 वर्ष की अवधि वाले बॉन्ड पर प्राप्तियां 6.75 प्रतिशत थीं। 10 वर्ष की अवधि के बॉन्ड की खरीदारी के लिए आरबीआई को 20,826 करोड़ रुपये मूल्य के प्रस्ताव आई। छोटी अवधि के बॉन्ड के लिए आरबीआई को करीब 20,330 करोड़ रुपये मूल्य के प्रस्ताव आए। चार बॉन्ड में प्राप्ति 5.22 से 5.578 प्रतिशत के बीच थी, जो उनके मौजूदा बाजार दर से करीब 4 से 5 आधार अंक अधिक रहीं। 

बॉन्ड डीलरों ने कहा कि छोटी अवधि के बॉन्ड को प्रभावित करने के लिए ओएमओ की जरूरत नहीं है, क्योंकि नकदी के लिए वे इसी बॉन्ड पर निर्भर हैं। डीलरों ने कहा कि इस समय औसत नकदी करीब 2.5 लाख करोड़ रुपये है और अगर इसमें यहां से कमी आती है तो छोटी अवधि के बॉन्ड पर प्रातियां वैसे भी बढ़ जाएंगी। कारोबारियों केअनुसार ज्यादातर बैंकों ने अपनी खुदरा उधारी दर रीपो से जोड़ दी है, जो इस समय 5.15 प्रतिशत है।

Keyword: RBI, Bond, Bond Market, Reserve Bank, Open Market Operation,
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