बिजनेस स्टैंडर्ड - मनरेगा की मजदूरी बढ़ाने की तैयारी
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मनरेगा की मजदूरी बढ़ाने की तैयारी

संजीव मुखर्जी / नई दिल्ली 12 22, 2019

ग्रामीण मांग की चिंता

►  ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार 2020-21 में मनरेगा का कुल बजट बढ़ाकर 70,000 करोड़ रुपये कर सकती है
►  2019-20 में मनरेगा का बजट था 60,000 करोड़ रुपये
►  ग्रामीण बाजार कार्यक्रम और ई-नाम के लिए समर्पित कोष बनाने पर भी हो रहा है विचार
►  ग्रामीण सड़कों व आवास कार्यक्रम के लिए सीधे आवंटन

बिजनेस स्टैंडर्ड मनरेगा की मजदूरी बढ़ाने की तैयारीकेंद्र सरकार महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार सृजन अधिनियम (मनरेगा) के तहत मजदूरी में 8 से 10 प्रतिशत बढ़ोतरी की घोषणा कर सकती है। यह बढ़ोतरी उपभोक्ता मूल्य सूचकांक-कृषि श्रमिक (सीपीआई-एएल) की अद्यतन महंगाई सूचकांक से जोड़कर की जा सकती है। यह सरकार की किसानों की पीएम-किसान और मनरेगा जैसी मौजूदा कल्याणकारी योजनाओं के समेकन की योजना का हिस्सा है। सरकार से जुड़े सूत्रों ने कहा कि घटते संसाधनों से तालमेल बिठाने के लिए यह फैसला किया गया है।

अधिकारियों ने कहा कि कृषि क्षेत्र में मुख्य जोर कोल्ड स्टोरेज और वेयरहाउसेज के विस्तार पर जोर होगा और इन्हें कर प्रोत्साहन और आसान कर्ज देकर बढ़ावा दिया जा सकता है। इसके अलावा गेहूं व चावल से किसानों को अन्य लाभदायक फसलों की ओर मोडऩे के लिए भी प्रोत्साहन दिया जा सकता है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए सरकार 2020-21 में मनरेगा का बजट 70,000 करोड़ रुपये कर सकती है, जो चालू वित्त वर्ष में 60,000 करोड़ रुपये है। 

चालू वित्त वर्ष में ग्रामीण विकास मंत्रालय ने मनरेगा के लिए अतिरिक्त 20,000 करोड़ रुपये की मांग की है। इस समय मनरेगा के तहत राष्ट्रीय औसत मजदूरी 178.44 रुपये प्रति दिन है, जो कुछ राज्यों की न्यूनतम कृषि मजदूरी से कम है।सूत्रों ने कहा कि उद्योग के विशेषज्ञों, कृषि वैज्ञानिकों और अर्थशास्त्रियों के साथ कुछ दौर की चर्चा के बाद इस बात पर आम राय बनती दिख रही है कि 22,000 ग्रामीण बाजार स्थापित करने के लिए आवंटन बढ़ाया जाना चाहिए। ग्रामीण कृषि कार्यक्रम (ग्राम) के तहत यह योजना 2018 में पेश की गई थी। 

बहरहाल अधिकारियों ने कहा कि नाबार्ड में बनाए गए 2,000 करोड़ रुपये के समर्पित कृषि बुनियादी ढांचा कोष के तहत इस योजना का वित्तपोषण किया गया था।  एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, 'योजना को रफ्तार देने के लिए अलग बजट आवंटन की जरूरत है क्योंकि समर्पित कोष के मौजूदा मॉडल का इच्छित परिणाम आता है।' 

उन्होंने कहा कि ग्राम के अलावा कुछ फंड आवंटन इलेक्ट्रॉनिक नैशनल एग्रीकल्चर मार्केट (ईनाम) स्कीम से भी आने की उम्मीद है। इसके तहत केंद्र ने 1,000 बाजारों को कॉमन पैन इंडियन इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग पोर्टल के माध्यम से जो़ऩे की योजना बनाई है। अब तक 500 मंडियों या एपीएमसी बाजारों से ई-नाम के तहत ऑनलाइन कारोबार हो रहा है। अधिकारियों ने कहा कि कृषि स्टार्टअप के लिए समर्पित कोष बनाने का भी प्रस्ताव है, जिससे उन्हें बढऩे और कारोबार के लिए उचित माहौल मिल सके। अधिकारी ने कहा, 'कृषि क्षेत्र में निजी फंडों को ज्यादा आकर्षित करने की जरूरत है, जिसके लिए उचित कदम उठाए जाने चाहिए।' 
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