बिजनेस स्टैंडर्ड - निर्यात उपकर पर विचार कर रहा चाय बोर्ड
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निर्यात उपकर पर विचार कर रहा चाय बोर्ड

अभिषेक रक्षित / कोलकाता December 22, 2019

भारतीय चाय बोर्ड चाय निर्यात पर उपकर लगाने पर विचार कर रहा है। इससे होने वाली कमाई का इस्तेमाल देश-विदेश में इस क्षेत्र से संबंधित प्रचारात्मक गतिविधि के लिए किया जाएगा। सूत्रों का कहना है कि उपकर की यह दर प्रति किलोग्राम चाय निर्यात पर दो रुपये हो सकती है। भारतीय चाय बोर्ड का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी श्रीलंका अपनी चाय के प्रचार के लिए प्रति किलोग्राम निर्यात पर 3.5 रुपये उपकर लगाता है। इस साल अब तक भारत 20.669 करोड़ किलोग्राम चाय निर्यात कर चुका है।

फिलहाल चाय बोर्ड कार्य-प्रणाली के साथ-साथ दर संबंधी रूप-रेखा तैयार करने के लिए भारतीय चाय संघ जैसे कई औद्योगिक संगठनों के साथ विचार-विमर्श कर रहा है। हालांकि सूत्रों का कहना है कि यह कर या उपकर सभी निर्यातकों अथवा अपनी उपज सीधे निर्यात करने वाले सभी बागान मालिकों पर नहीं लगाया जाएगा, बल्कि यह भारत या विदेश में प्रचार की इच्छुक चाय कंपनियों के लिए ही होगा।

चाय बोर्ड के डिप्टी चेयरमैन एके रे ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि इस प्रचारात्मक कार्य के लिए धन उपलब्ध कराने के वास्ते हमने अंतिम रूप नहीं दिया है। अगर हमें अपनी बाजार हिस्सेदारी पर नियंत्रण रखना है और कुछ प्रमुख बाजारों का फायदा उठाना है, तो हमें भारतीय चाय को बढ़ावा देने के लिए धन की आवश्यकता होगी। इस प्रस्तावित उपकर पर अंतिम निर्णय चालू वित्त वर्ष के आखिर तक ले लिया जाएगा। एक सलाहकार के साथ मिलकर चाय बोर्ड द्वारा किए गए अध्ययन से संकेत मिला है कि खपत को बढ़ावा देने के लिए अगले तीन सालों में प्रोत्साहन और मार्केटिंग संबंधी कार्यों पर तकरीबन 80 करोड़ रुपये खर्च करने की जरूरत है।

हालांकि पैसे की किल्लत वाले मौजूदा हालात में चाय बोर्ड निर्धारित मार्केटिंग व्यय के 50 प्रतिशत भाग की ही व्यवस्था कर सकता है, इसलिए वह धन प्राप्त करने के लिए अलग-अलग चाय कंपनियों पर दांव लगा रहा है। प्रस्तावित मार्केटिंग और प्रचार तंत्र के तहत इन कंपनियों के नाम विदेशों में चाय बोर्ड के स्टॉल और कियोस्क में दिखाए जा सकते हैं। इसके अलावा प्रभावशाली वर्ग के बीच चाय को बढ़ावा देने केलिए चाय बोर्ड द्वारा इस्तेमाल किए जाने वाले पैकेटों पर भी चाय बागान या कंपनियों के नामों का उल्लेख रहेगा।

मौजूदा व्यवस्था के अंतर्गत चाय बोर्ड निजी कंपनियों से चाय प्राप्त करता है और इसे असम और दार्जिलिंग की परंपरागत, नीलगिरि तथा कई अन्य प्रकार की सामान्य चाय के तौर पर बताया जाता है। इस तरह का प्रचार कार्य आमतौर पर निर्यात किए जाने वाल 47 देशों और भारत में 50 स्थानों पर किया जाता है। रे ने कहा कि प्रमुख निर्यात बाजारों में भारत के मुख्य प्रतिस्पर्धी श्रीलंका ने अगले तीन सालों में प्रोत्साहन देने के लिए 45 करोड़ रुपये का निवेश किया है और जब तक भारत वैश्विक बाजार में जोरदार तरीके से अपनी चाय को बढ़ावा नहीं देता है, तब तक वैश्विक बाजार में हिस्सेदारी गंवाने की आशंका बनी रहेगी। 

उन्होंने कहा, 'मैं निजी उत्पादकों या कंपनियों को प्रोत्साहन के लिए पैसा देने को नहीं, बल्कि हमारे साथ सहयोग करने के लिए कह रहा हूं। चाय कंपनियों को श्रीलंका की चाय कंपनियों की बड़ी चुनौतियों से सतर्क रहने की जरूरत है और साथ ही उन्हें प्रमुख निर्यात बाजार में मार्केटिंग के अपने प्रयास तेज करने की भी आवश्यकता है।' चाय बोर्ड से उम्मीद की जा रही है कि वह चाय को बढ़ावा देने के लिए मुख्य रूप से रूस और सीआईएस (राष्ट्रमंडल देश), ताइवान, जापान, ऑस्ट्रेलिया तथा ब्रिटेन और अमेरिका जैसे अन्य विकसित बाजारों को लक्ष्य बनाएगा। मात्रा के हिसाब से कुल वार्षिक निर्यात में इन देशों का योगदान लगभग 40 प्रतिशत और मूल्य के हिसाब से 35 प्रतिशत रहता है।

बोर्ड विश्व स्तरीय चाय पैकिंग केंद्र स्थापित करने की संभावना पर भी विचार-विमर्श कर रहा है जहां वैश्विक स्तर पर बड़े ब्रांडों के साथ प्रतिस्पर्धा करने के लिए चाय की पैङ्क्षकग की जाएगी और अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप उनका ब्रांड निर्धारित किया जाएगा।
Keyword: Tea, Tea Board, West Bengal, Assam, States, Tea Garden, Tea Estate,
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