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आईएलऐंडएफएस डूबी मगर निदेशक हुए मालामाल

सुब्रत पांडा / मुंबई December 22, 2019

सितंबर 2018 में इन्फ्रास्ट्रक्चर लीजिंग ऐंड फाइनैंशियल सर्विसेज के धराशायी होने के बावजूद उसके निदेशक पारिश्रमिक के तौर पर मोटी रकम ले रहे थे। यह जानकारी कंपनी 2018-19 की सालाना रिपोर्ट से मिली। सरकार ने अक्टूबर 2018 में हालांकि पूरे निदेशक मंडल को बदल दिया था, लेकिन पूर्व निदेशकों ने 2018-19 की पहली छमाही में मोटा वेतन हासिल किया।

हरि शंकरन आईएलऐंडएफएस के वाइस चेयरमैन और प्रबंध निदेशक और सितंबर 2018 तक गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर पारिश्रमिक के तौर पर 6.38 करोड़ रुपये हासिल किए। पूर्व चेयरमैन रवि पार्थसारथि ने गैर-कार्यकारी निदेशक के तौर पर 1 अप्रैल 2018 से जुलाई 2018 तक करीब 4 करोड़ रुपये हासिल किए, जब उन्होंने अवकाश प्राप्त किया।

 

 

कंपनी के पूर्व संयुक्त प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी अरुण के साहा ने वित्त वर्ष 2019 में वेतन के तौर पर 6.88 करोड़ रुपये हासिल किए। वह सहायक व समूह कंपनियों में पूर्णकालिक निदेशक भी थे। कंपनी के स्वतंत्र निदेशकों को भी कमीशन समेत अच्छा खासा पारिश्रमिक दिया गया। आईएलऐंडएफएस के कर्मचारियों का औसत वेतन 13.1 लाख रुपये था। नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) की तरफ से नियुक्त कुछ निदेशकों ने कोई पारिश्रमिक नहीं लिया, वहीं अन्य निदेशकों ने अक्टूबर 2018 से मार्च 2019 की अवधि के लिए 50,000 रुपये से लेकर 13.7 लाख रुपये लिये।

इस फर्म की तरफ से कर्ज भुगतान में चूक के बाद गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी में नकदी का संकट खड़ा हो गया। इसकेबाद केंद्र सरकार ने पुराने निदेशक मंडल की जगह कोटक महिंद्रा बैंक के प्रबंध निदेशक व मुख्य कार्याधिकारी उदय कोटक की अगुआई में नया निदेशक मंडल नियुक्त कर दिया। वह आईएलऐंडएफएस के गैर-कार्यकारी चेयरमैन हैं।

आईएलऐंडएफएस ने 2018-19 में एक आधार पर 22,527 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान दर्ज किया जबकि इससे एक साल पहले कंपनी ने 333 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ दर्ज किया था। कंपनी का राजस्व वित्त वर्ष 2019 में 52.5 फीसदी घटकर 824 करोड़ रुपये रह गया, जो वित्त वर्ष 2018 में 1,734 करोड़ रुपये रहा था। इसी तरह कंपनी की परिसंपत्तियां 81.5 फीसदी घटकर 4,148 करोड़ रुपये रह गई, जो 2017-18 में 23,868 करोड़ रुपये रही थी। कंपनी की देनदारी 15.3 फीसदी बढ़कर वित्त वर्ष 2019 में 21,083 करोड़ रुपये पर पहुंच गई। वित्त वर्ष 2018 में यह 18,276 करोड़ रुपये रही थी। 

वित्त वर्ष 2019 में कंपनी की हैसियत 16,935 करोड़ रुपये नकारात्मक हो गई, जो इससे एक साल पहले 5,592 करोड़ रुपये सकारात्मक थी। एकीकृत आधार पर कंपनी पर कुल कर्ज 94,000 करोड़ रुपये से ज्यादा है।

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