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विरासत में मिली मुश्किलों का टाटा समूह के वित्त पर असर

कृष्ण कांत और देव चटर्जी / मुंबई December 22, 2019

पिछले चेयरमैन साइरस मिस्त्री ने बॉम्बे हाउस छोड़ते समय कहा था कि विरासत में मिली मुश्किल वाली कंपनियों के वित्तीय प्रदर्शन में मामूली सुधार हुआ है, लेकिन इंडियन होटल्स को छोड़ दें तो ये कंपनियां कमजोर लाभ और उच्च कर्ज से जूझ रही हैं।

अक्टूबर 2016 में टाटा संस के बोर्ड से हटाए जाने के बाद टाटा संस व टाटा ट्रस्ट के बोर्ड के निदेशकों को लिखे पत्र में मिस्त्री ने कहा था कि समूह की वित्तीय स्थिति को नीचे ले जाने वाली मुश्किल भरी कंपनियों में टाटा पावर, टाटा स्टील और इंडियन होटल्स कंपनी के अलावा टाटा मोटर्स का देसी यात्री कार कारोबार है।

मिस्त्री ने कहा था कि टाटा समूह की वित्तीय स्थिति पर सबसे ज्यादा असर डालने वाली कंपनियों में से एक टाटा टेलीसर्विसेज थी। मिस्त्री के निकलने के बाद से दूरसंचार सेवा फर्म ने 60,000 करोड़ रुपये गंवा दिए हैं और समूह की होल्डिंग कंपनी बैंकों व सरकार का बकाया चुका रहा है। ऐसा तब देखने को मिला जब इसके वायरलेस सेवा कारोबार को भारती एयरटेल को मुफ्त में बेचा गया।

विश्लेषकों ने कहा, आर्थिक मंदी ने टाटा समूह की अगली पंक्ति की कंपनियों पर असर डालना शुरू कर दिया है और वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में इन कंपनियों के मार्जिन व लाभ में गिरावट देखी गई है। यह उनकी बैलेंस शीट पर आगामी तिमाहियों में भी असर डाल सकता है।

इस पर आश्चर्य नहीं होता कि टाटा पावर, टाटा स्टील और टाटा मोटर्स का बाजार पूंजीकरण उनके खाते में दर्ज कर्ज का एक हिस्सा भर रह गया है, जो शेयरधारकों के लिए वैल्यू सृजित करने की उनकी क्षमता का संकेत देता है। टाटा समूही की सूचीबद्ध कंपनियों में लगी संयुक्त पूंजी में इन चारों कंपनियों (दूरसंचार को छोड़कर) का योगदान करीब तीन चौथाई है और उनके संयुक्त सकल कर्ज में करीब 88 फीसदी, लेकिन वित्त वर्ष 2019 के संयुक्त शुद्ध लाभ (समायोजित) में इनकी हिस्सेदारी महज 20 फीसदी रही।

उदाहरण के लिए टाटा पावर का शुद्ध लाभ वित्त वर्ष 2015 के 168 करोड़ रुपये के मुकाबले वित्त वर्ष 2019 में 2,190 करोड़ रुपये पर पहुंच गया, लेकिन आय में एक बार फिर गिरावट आने लगी है। कंपनी का शुद्ध लाभ मौजूदा वित्त वर्ष की पहली छमाही में सालाना आधार पर 73 फीसदी घटा जबकि इस अवधि में ब्याज की देनदारी सालाना आधार पर 11 फीसदी बढ़ी। कंपनी की मुंद्रा इकाई (नुकसान का इकलौता सबसे बड़ा स्रोत) ने वित्त वर्ष 2019 में 7,064 करोड़ रुपये के राजस्व पर 1,653 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान दर्ज किया और कंपनी के लिए नकदी पर चोट पहुंचाने वाली बनी हुई है।

टाटा पावर उधारी ले रही है और वित्त वर्ष 2019 में उसका सकल कर्ज-इक्विटी अनुपात 2.7 गुना रहा, जो वित्त वर्ष 2015 के मुकाबले मामूली कम है, जो साइरस मिस्त्री के चेयरमैन का आखिरी वर्ष था। टाटा स्टील के मामले में भी ऐसा ही है, जिसने वित्त वर्ष 2018 और 2019 में वैश्विक स्तर पर स्टील की ऊंची कीमतों व कलिंगनगर संयंत्र चालू होने से लाभ में बड़ी उछाल दर्ज की, लेकिन वित्त वर्ष 2020 की पहली छमाही में शुद्ध लाभ में सालाना आधार पर 20 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। कंपनी ने पिछले दो साल में भूषण स्टील ऐंड पावर के अधिग्रहण के लिए अतिरिक्त कर्ज लिया है, जिसने विश्लेषक इस अधिग्रहण की वित्तीय व्यवहार्यता को लेकर संदेह जता रहे हैं क्योंकि वित्त वर्ष 2020 में स्टील की मांग व उत्पादन में कमी आई है।

इस बीच, कंपनी ब्रिटेन और दक्षिण पूर्व एशिया में अपने परिचालन में रकम गंवा रही है और पिछले महीने यूरोप में नौकरियों की कटौती की घोषणा की है। टाटा स्टील ने यूरोपीय परिचालन का हस्तांतरण जर्मनी की टुसेनक्रप को 50-50 संयुक्त उद्यम के तहत करने की कोशिश की, लेकिन इसकी अनुमति नहीं मिल पाई। टाटा के आला अधिकारियों ने पहले बिजनेस स्टैंडर्ड से कहा था कि वह टाटा स्टील यूरोप के लिए समाधान की खोज जारी रखेंगे और कुल राजस्व में भारतीय परिचालन की हिस्सेदारी बढ़ेगी और इस तरह से यूरोपीय परिचालन को नगण्य बना देगा।

भारत में बिक्री घटने और जगुआर लैंड रोवर में मंदी के कारण टाटा मोटर्स की वित्तीय स्थिति पर दबाव है। वित्त वर्ष 2019 में कंपनी ने रिकॉर्ड 29,000 करोड़ रुपये का शुद्ध नुकसान दर्ज किया और उसका देसी कारोबार एक बार फिर वित्त वर्ष 2020 में नुकसान में चला गया जबकि वित्त वर्ष 2019 में लाभ दर्ज हुआ था। इससे कंपनी की वित्तीय स्थिति पर दबाव बना रह सकता है। टाटा मोटर्स का सकल कर्ज-इक्विटी अनुपात वित्त वर्ष 2019 में 1.8 गुना रहा, जो मार्च 2015 के आखिर में 1.3 गुना रहा था। हालांकि इंडियन होटल्स का लाभ पिछले दो साल में सुधरा है और उसके बकाया कर्ज में करीब 50 फीसदी की गिरावट दर्ज हुई। ब्याज देनदारी में कमी से कंपनी का मुनाफा बढ़ा।
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