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'राजकोषीय मजबूती पर टिकी रहे सरकार'

दिलाशा सेठ और इंदिवजल धस्माना / नई दिल्ली December 20, 2019

भारत को मध्यावधि में राजकोषीय मजबूती की योजना पर निश्चित तौर पर कायम रहना चाहिए। अंतरराष्टï्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) की प्रमुख गीता गोपीनाथ ने आज यह बात उद्योग चैंबर फिक्की की 92वे वार्षिक सम्मेलन में कही। उनका यह बयान ऐसे वक्त पर आया है जब यह बहस छिड़ी हुई है कि क्या सरकार को अर्थव्यवस्था को ऊपर उठाने के लिए सरकारी खर्च में इजाफा करना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि आईएमएफ जनवरी में भारत की वृद्घि रुझान में सुधार करेगा क्योंकि उच्च आवृत्ति संकेतक दूसरी छमाही में वैसी तेजी नहीं दिखा रहे हैं जिसकी उम्मीद की जा रही थी।  
 
गोपीनाथ ने कहा, 'भारत के लिए वृहत्ï स्थिरता बहुत महत्त्वपूर्ण है जिसका मतलब राजकोषीय मोर्चे पर स्थायित्व है। वित्तीय समेकन के लक्ष्य पर बने रहने का स्पष्टï नजरिया बहुत महत्त्वपूर्ण है जिसके लिए राजस्व बढ़ाने के साथ ही खर्च में कटौती करना भी जरूरी होगा।' वस्तु एवं सेवा कर के तहत मिलने वाले राजस्व में भारी गिरावट के बीच कई राज्यों ने बुधवार को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण को राजकोषीय घाटे का लक्ष्य सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) के 3.3 फीसदी से बढ़ाकर 4 फीसदी करने और राज्यों की एफआरबीएम सीमा को 3 फीसदी से बढ़ा कर 4 फीसदी करने के लिए कहा था।  
 
हालांकि गोपीनाथ ने कहा, 'जब हम वित्तीय समेकन की बात करते हैं तब हम उसे मध्यावधि लक्ष्य के तौर पर लेते हैं जिसे एक समयावधि में किया जाना चाहिए न कि इसे रातोंरात कर देने की जरूरत है।' उन्होंने कहा कि भारत का संयुक्त घाटा (केंद्र और राज्यों का घाटा मिलाकर) जी20 के अन्य देशों की तुलना में सर्वाधिक है। उन्होंने कहा, 'इसलिए यह दोपहर के मुफ्त भोजन की तरह नहीं है और इसे बहुत सावधानीपूर्वक प्रबंधित किया जाना चाहिए।' जीएसटी पर आईएमएफ प्रमुख ने कहा कि भारतीय अर्थव्यवस्था को औपचारिकता प्रदान करने के लिए सुधार किया जाना जरूरी था लेकिन जहां तक नियमन और कर की दरों का सवाल है इस पर निश्चितता और स्पष्टïता की जरूरत थी। 1 जुलाई, 2017 से जीएसटी को लागू किए जाने के बाद से 400 से अधिक सामानों पर और करीब 80 फीसदी सेवाओं पर जीएसटी की दरों में बदलाव किया गया है। सरकार जीएसटी राजस्व में आई कमी की पूर्ति के लिए फिर से कुछ स्लैबों में बदलाव करने की योजना बना रही है। 
 
भारत की आर्थिक वृद्घि के परिदृश्य में संशोधन पर गोपीनाथ ने कहा कि कुछ उच्च आवृत्ति संकेतकों से तीसरी और चौथी तिमाही में जैसी वृद्घि की उम्मीद थी वह नजर नहीं आई है।  उन्होंने कहा, 'हम उम्मीद कर रहे थे कि वित्त वर्ष 2019-20 की पहली दो तिमाहियों में सुस्ती का परिदृश्य नजर आएगा और उसके बाद तीसरी और चौथी तिमाही में तेजी दिखाई पड़ेगी। कुछ उच्च आवृत्ति संकेतकों पर नजर डालने के बाद हमें उस तरह की तेजी नजर नहीं आ रही है जैसी की हमने उम्मीद की थी। इसलिए मैंने कहा कि हम जनवरी में फिर से अपने अनुमान में संशोधन करेंगे।' 
Keyword: fiscal deficit, revenue, economy, IMF,,
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